‘अंकिता भंडारी केस में देहरादून में भारी आक्रोश: प्रदर्शनकारियों ने किया CBI दफ्तर का “प्रतीकात्मक लॉकडाउन”; पूछा— “कौन है वो VIP जिसे बचा रही है जांच एजेंसी?”‘
अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर देहरादून सीबीआई कार्यालय के बाहर भारी बवाल। 'अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच' के कार्यकर्ताओं ने की दफ्तर की प्रतीकात्मक तालाबंदी। वीआईपी के नाम और साक्ष्य मिटाने पर सीबीआई अधिकारियों से तीखे सवाल। पढ़ें PNN24 की ग्राउंड रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
देहरादून (PNN24 News): अंकिता भंडारी हत्याकांड में निष्पक्ष न्याय और त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर उत्तराखंड की सड़कों पर एक बार फिर जन-आक्रोश फूट पड़ा है। गुरुवार, २ जुलाई २०२६ को देहरादून स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के प्रादेशिक कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के बैनर तले एकजुट हुए आंदोलनकारियों ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कार्यालय की ‘प्रतीकात्मक तालाबंदी’ (Symbolic Lockdown) कर दी।

🚧 पुलिस बैरिकेडिंग को छकाकर दूसरे गेट पर जड़ा ताला
प्रत्यक्षदर्शियों और आंदोलनकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन की भनक लगते ही स्थानीय पुलिस ने सुबह से ही सीबीआई कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार (Main Gate) पर भारी बैरिकेडिंग कर दी थी ताकि प्रदर्शनकारियों को परिसर के भीतर जाने से रोका जा सके।
हालांकि, रणनीति बदलते हुए आंदोलनकारियों का एक बड़ा जत्था पुलिस को चकमा देकर कार्यालय के दूसरे खुफिया गेट तक जा पहुंचा। वहां उन्होंने केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गेट पर प्रतीकात्मक रूप से ताला जड़ दिया।
🗣️ सीबीआई अधिकारियों के बाहर आने पर तीखे सवालों की बौछार
मामले के तूल पकड़ने और दफ्तर के बाहर तालाबंदी की स्थिति को देखते हुए सीबीआई के वरिष्ठ विधिक अधिकारी खुद बातचीत के लिए दफ्तर से बाहर परिसर में आए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के सामने सुलगते हुए सवालों की पूरी फेहरिस्त रख दी:
- ‘वीआईपी’ कौन है?: इस पूरे मामले में शुरू से ही जिस ‘वीआईपी’ (VIP) गेस्ट का जिक्र आ रहा है, जिसकी खातिर अंकिता पर अनैतिक दबाव बनाया गया था, उसकी पहचान अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
- नेताओं से पूछताछ में ढिलाई क्यों?: भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम और अजय कुमार से अब तक इस विधिक मामले की कड़ियों को जोड़कर गहन पूछताछ क्यों नहीं की गई?
- साक्ष्य मिटाने की साजिश: घटना के तुरंत बाद रिजॉर्ट पर जो प्रशासनिक बुलडोजर चलाया गया था, जिसके चलते संभावित फॉरेंसिक साक्ष्य मिटने के आरोप लगे थे, उस कृत्य पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
- माता-पिता के बयान लंबित: पीड़िता अंकिता भंडारी के माता-पिता के आधिकारिक बयान दर्ज करने में इतनी लंबी विधिक देरी क्यों की जा रही है?
मंच के नेताओं ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों द्वारा जांच की प्रगति (Progress Report) को लेकर दिए गए गोलमोल जवाबों से वे बिल्कुल संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने मुख्य द्वार (Main Entry Gate) पर भी आकर प्रतीकात्मक रूप से ताला लगा दिया।
📢 “आर-पार की होगी जंग”— आंदोलनकारियों का अल्टीमेटम
‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के शीर्ष पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर सीबीआई ने जांच में कोई ठोस विधिक प्रगति नहीं दिखाई और उनके बुनियादी सवालों के लिखित व स्पष्ट जवाब नहीं दिए, तो इस आंदोलन को पूरे उत्तराखंड के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा। देवभूमि की बेटियों की सुरक्षा और न्याय के लिए यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।










