अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 8 आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, अब तक का पूरा घटनाक्रम
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित धांधली का मामला लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिन्हें कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए फैजाबाद बार एसोसिएशन ने आरोपियों का केस लड़ने से इनकार कर दिया है।

निलोफर बानो
अयोध्या: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित धांधली का मामला लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिन्हें कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए फैजाबाद बार एसोसिएशन ने आरोपियों का केस लड़ने से इनकार कर दिया है।

आरोपियों के पक्ष में नहीं लड़ेगा कोई वकील इस मामले ने स्थानीय स्तर पर भी हलचल पैदा कर दी है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने एक आम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि राम मंदिर मामले के आरोपियों की पैरवी कोई भी अधिवक्ता नहीं करेगा। एसोसिएशन ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि कोई सदस्य नियमों का उल्लंघन कर पैरवी करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसकी सदस्यता भी समाप्त कर दी जाएगी।
क्या है यह कथित घोटाला? (टाइमलाइन) यह मामला जून के महीने में तब सुर्खियों में आया जब दान पात्रों की नकदी और कीमती सामान गायब होने की खबरें सामने आईं। सपा के पूर्व विधायक पवन पांडे और अखिलेश यादव ने इस पर गंभीर सवाल उठाए थे।
- एसआईटी का गठन: विवाद बढ़ने पर योगी सरकार ने आईएएस विजय विश्वास पंत, आईपीएस किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन की एक एसआईटी गठित की।
- प्रारंभिक रिपोर्ट और गिरफ्तारी: एसआईटी ने महज 10 दिनों (23 जून) में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- आरोपी: गिरफ्तार लोगों में टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, करुणेश पांडे और रामशंकर मिश्रा शामिल हैं।
- ट्रस्ट में हलचल: 27 जून को ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबर ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से इसकी पुष्टि होने के बावजूद चंपत राय के खेमे ने इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
कांग्रेस की मांग और सरकार की चुनौती 30 जून को कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सरकार पर कड़ा प्रहार किया। सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मांग की कि एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए और पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से कराई जाए।
अयोध्या में भगवान राम के भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं कि मामले में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होकर रहेगा। अब सबकी निगाहें एसआईटी की अगली रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।











