अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी: वाराणसी की ‘सैनिक सिक्योरिटी’ के निकले 6 आरोपी, SBI पर प्रेशर डालने वाले भी जांच के दायरे में
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा। गिरफ्तार 8 में से 6 आरोपी वाराणसी की 'सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज' के कर्मचारी निकले, जिन्हें SBI ने कैश गिनने के लिए रखा था। बैंक अधिकारियों का आरोप- कुछ खास लोगों को रखने के लिए प्रभावशाली लोगों ने बनाया था दबाव। पढ़ें PNN24 न्यूज़ पर।

ईदुल अमीन
अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) के हाथ कई कड़ियां लगी हैं। जांच के दौरान पता चला है कि अब तक गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 6 आरोपी वाराणसी की एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी के कर्मचारी थे। इस एजेंसी को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मंदिर में नकदी (कैश) गिनने के काम के लिए तैनात किया था।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी का नाम सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज है।
क्या है ‘सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज’ का बैकग्राउंड?
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के डेटाबेस के अनुसार:
- इस एजेंसी की शुरुआत दिसंबर 2017 में वाराणसी के रजिस्टर्ड पते के साथ हुई थी।
- इसे 1 लाख रुपये की ‘पेड-अप’ कैपिटल (वह शुरुआती रकम जिससे कंपनी रजिस्टर्ड होती है) के साथ शुरू किया गया था।
- एजेंसी की वेबसाइट के मुताबिक, यह वर्तमान में देश के 15 राज्यों में ऑपरेट करती है और इसके ग्राहकों में कई बड़ी सरकारी कंपनियां शामिल हैं।
एजेंसी के मालिक और डायरेक्टर गौरव सिंह ने बताया कि उनके पिता ने साल 2000 में इसकी शुरुआत एक सिंगल ओनर के तौर पर की थी, जो बाद में पार्टनरशिप और फिर 2017 में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में तब्दील हो गई।
SBI था क्लाइंट, ट्रस्ट से सीधा संबंध नहीं
डायरेक्टर गौरव सिंह ने स्पष्ट किया है कि राम मंदिर ट्रस्ट उनका क्लाइंट नहीं था, बल्कि SBI की अयोध्या स्थित नया घाट ब्रांच उनकी क्लाइंट थी। यह ब्रांच उन तीन बैंकों में से एक है, जहां श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य अकाउंट है।
गौरव सिंह के मुताबिक:
“SBI बैंक हमारा क्लाइंट था, ट्रस्ट से हमारा कोई सीधा लेना-देना नहीं है। एसबीआई की लोकल ब्रांच ने हमसे कैश काउंटिंग टीम के लिए 19 कर्मचारियों की डिमांड की थी। हमने इन लोगों को हायर करके बैंक को उपलब्ध कराया था। टीम में शामिल सभी लोगों को लगभग 20,000 रुपये प्रति महीने वेतन मिलता था।”
किसे कहां से मिलता था वेतन?
अयोध्या पुलिस द्वारा एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज रजत वर्मा की कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों का वेतन ढांचा इस प्रकार था:
- 6 आरोपी: इन्हें वाराणसी की ‘सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज’ से वेतन मिलता था।
- राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव: इसे सीधे राम मंदिर ट्रस्ट से वेतन मिलता था।
- सुभाष श्रीवास्तव: यह एक पूर्व बैंक कर्मचारी रहा था और कोई वेतन नहीं ले रहा था।
जांच के दायरे में आए ‘प्रभावशाली’ लोग, एसबीआई पर था दबाव!
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब एसबीआई ब्रांच के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने बैंक पर कुछ खास और चुनिंदा लोगों को कैश काउंटिंग टीम में शामिल करने का भारी दबाव (प्रेशर) बनाया था।
हिंदुस्तान टाइम्स से बैंक के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
“वे बेहद प्रभावशाली लोग थे, इसलिए हम उनके प्रस्ताव को मना नहीं कर सके। अब एसबीआई पर कुछ खास चेहरों को काउंटिंग के लिए रखने का प्रेशर डालने वाले लोग भी एसआईटी की जांच के दायरे में आ गए हैं।”
वहीं, लखनऊ में एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर इस तरह की हायरिंग कॉर्पोरेट या सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीय) लेवल पर होती है, लेकिन इस मामले में लोकल ब्रांच के स्तर पर मांग की गई थी। हालांकि, एसबीआई ने साफ किया है कि वह जांच में एसआईटी का पूरा सहयोग कर रहा है।
अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद, 8 आरोपी जेल में
एसआईटी (SIT) इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये की भारी नकदी भी बरामद की जा चुकी है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम:
- अनुकल्प मिश्रा
- लवकुश मिश्रा
- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
- मनीष यादव
- सुभाष श्रीवास्तव
- अविनाश शुक्ला
- रामशंकर मिश्रा
- करुणेश पांडेय
जनवरी 2024 में हुए प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से ही एसबीआई राम मंदिर ट्रस्ट को बैंकिंग सेवाएं दे रहा है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मंदिर में हुई इस बड़ी सेंधमारी के पीछे और कौन-से रसूखदार लोग शामिल हैं, एसआईटी अब इसकी गहराई से तफ्तीश कर रही है।











