‘छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सरकारी स्कूलों में “हिंदू प्रार्थनाएं” अनिवार्य करने के सर्कुलर पर रोक; कोर्ट ने कहा— “किसी भी बच्चे को मजबूर नहीं कर सकती सरकार”‘

छत्तीसगढ़ में स्कूलों के भीतर सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र और गायत्री मंत्र अनिवार्य करने के सरकारी सर्कुलर पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला। बिलासपुर उच्च न्यायालय ने कहा— 'किसी भी बच्चे को हिंदू प्रार्थना गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।' वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन की याचिका पर कोर्ट ने दी बड़ी छूट। पढ़ें PNN24 की विशेष विधिक रिपोर्ट।

तारिक खान

बिलासपुर/रायपुर (PNN24 News): छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही शुरू हुआ धार्मिक और नीतिगत विवाद अब सूबे के उच्च न्यायालय के दखल के बाद एक बड़े विधिक मोड़ पर पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में हिंदू प्रार्थनाओं को अनिवार्य करने वाले विवादित सर्कुलर पर रोक लगाते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि प्रदेश के किसी भी सरकारी स्कूल में किसी भी बच्चे को हिंदू धार्मिक प्रार्थनाएं गाने या उनमें भाग लेने के लिए कतई विवश (Compel) नहीं किया जा सकता।

⚖️ जस्टिस अमितेंद्र प्रसाद की पीठ का फैसला और सरकार का विधिक यू-टर्न

प्रतिष्ठित कानूनी वेब पोर्टल ‘बार एंड बेंच’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस अमितेंद्र प्रसाद की एकल पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इस सर्कुलर के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में एक बड़ा विधिक बयान दर्ज कराया गया, जिसने मामले का रुख बदल दिया:

  • लागू न होने का दावा: राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि यद्यपि यह सर्कुलर १२ जून २०२६ को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी कर दिया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक इसे किसी भी स्कूल में अनिवार्य रूप से लागू (Implement) नहीं किया गया है।
  • भविष्य की छूट के साथ याचिका का निपटारा: सरकार के इस लिखित बयान को आधार बनाते हुए जस्टिस अमितेंद्र प्रसाद ने फिलहाल इस याचिका पर सुनवाई बंद (Dispose) कर दी। लेकिन इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह विशेष विधिक छूट दी है कि यदि भविष्य में राज्य के किसी भी हिस्से में किसी बच्चे को इन प्रार्थनाओं के लिए बाध्य किया जाता है, तो वे तुरंत दोबारा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि जबरदस्ती का मामला संज्ञान में आते ही सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

📜 वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दी थी चुनौती

यह हाई-प्रोफाइल विधिक याचिका छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अब्दुल सलाम रिजवी, अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र छाबड़ा और बिलासपुर के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता शफीक अहमद की ओर से संयुक्त रूप से दायर की गई थी। इन याचिकाकर्ताओं ने स्कूल शिक्षा विभाग के इस सर्कुलर की संवैधानिक वैधता (Constitutional Validity) को सीधे चुनौती दी थी।

🏫 क्या था विवादित सर्कुलर में?

राज्य सरकार द्वारा १२ जून को जारी आदेश में प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों की दैनिक दिनचर्या के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देशों को अनिवार्य (Mandatory) बनाने का निर्देश दिया गया था:

  1. सुबह की सभा: राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र का पाठ।
  2. मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal): खाना खाने से ठीक पहले सामूहिक रूप से ‘भोजन मंत्र’ का उच्चारण।
  3. स्कूल की छुट्टी: स्कूल बंद होने से ठीक पहले सभी छात्र-छात्राओं द्वारा अनिवार्य रूप से ‘गायत्री मंत्र’ और ‘शांति मंत्र’ का पाठ किया जाना। इसके अतिरिक्त महापुरुषों की जीवनी का पाठन भी शामिल था।

🏛️ धर्मनिरपेक्षता के मौलिक अधिकारों का तर्क

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 और 28 किसी भी नागरिक या छात्र को सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में किसी विशिष्ट धार्मिक शिक्षा या प्रार्थना को थोपने से पूरी तरह रोकता है। याचिका में तर्क दिया गया था कि इस प्रकार का सरकारी आदेश देश के बुनियादी ढांचे यानी ‘धर्मनिरपेक्षता’ (Secularism) के संवैधानिक सिद्धांतों पर आघात है और एक विशेष धर्म को सरकारी खर्चे पर बढ़ावा देने जैसा है, जिसके चलते यह आदेश पूरी तरह असंवैधानिक और शून्य (Null and Void) घोषित होने योग्य है।

हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार को स्कूलों के भीतर अपनी इस नीतिगत व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करना होगा।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *