‘PNN24 इन्वेस्टिगेशन: “कोडीन मारक है!”— हाईकोर्ट के जज तक पहुंचा कफ सिरप माफिया का हाथ; कोर्ट ने कहा “ब्लैक डे”, दुबई से सिस्टम हांक रहे शुभम जायसवाल पर “काका” का तीखा तंज’

कोडीन कफ सिरप सिंडिकेट में बड़ा भूचाल! इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जज को अप्रोच करने की कोशिश, कोर्ट ने कहा— "न्यायपालिका के इतिहास का ब्लैक डे", जज ने खुद को केस से किया अलग। दुबई में बैठे किंगपिन शुभम जायसवाल की राजनीतिक पकड़, खाकी-सफेदपोश साठगांठ और 'काका' का तीखा विश्लेषणात्मक तंज। पढ़ें PNN24 की एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट।

तारिक आज़मी 

वाराणसी/प्रयागराज (PNN24 News): “कोडीन सिर्फ एक सिरप नहीं, बल्कि एक ऐसा मारक सिंडिकेट बन चुका है जिसके लंबे हाथ अब लोकतंत्र के सबसे पवित्र स्तंभ— न्यायपालिका के दरवाजे तक जा पहुंचे हैं।”

हजारों करोड़ रुपये के अवैध कोडीन कफ सिरप तस्करी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से आई एक खबर ने पूरे प्रशासनिक, राजनीतिक और कानूनी हलकों में हड़कंप मचा दिया है। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीश ने खुली अदालत में जो टिप्पणी की, उसने साबित कर दिया है कि इस सिंडिकेट के सरगना शुभम जायसवाल की पहुंच और हौसले किस हद तक बुलंद हैं।

🏛️ “न्यायपालिका के इतिहास का ब्लैक डे”— हाईकोर्ट ने खुद को केस से किया अलग

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को जब यह आभास हुआ कि फैसला आने से पहले जज साहब को अप्रोच (प्रभावित) करने का प्रयास किया गया है, तो माननीय न्यायाधीश ने कड़ा रुख अपनाया।

  • अदालत की सख्त टिप्पणी: कोर्ट ने इसे “न्यायपालिका के इतिहास का ब्लैक डे (Black Day)” करार देते हुए स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका को प्रभावित करने की कोई भी कोशिश कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
  • बेंच से खुद को किया अलग: निष्पक्षता और न्याय की शुचिता बनाए रखने के लिए जज साहब ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया।
  • चीफ जस्टिस को भेजी फाइल: अब जमानत याचिका की फाइल माननीय मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) को भेज दी गई है। नई बेंच के गठन के बाद ही जमानत पर दोबारा सुनवाई संभव हो सकेगी।

🇦🇪 दुबई में बैठकर ‘ऐश’ और यूपी में ‘सिस्टम मैनेज’?

इस पूरे रैकेट का मुख्य अभियुक्त और मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल आज भी पुलिस और जांच एजेंसियों की पहुंच से दूर है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वह दुबई में बैठकर आलीशान जिंदगी जी रहा है और वहीं से हवाला व अपने राजनीतिक संपर्कों के जरिए उत्तर प्रदेश में सिस्टम पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

सफेदपोश दोस्तों पर चुप्पी क्यों? चर्चाएं गर्म हैं कि कभी 1000-500 रुपये की हैसियत रखने वाला शुभम जायसवाल रातों-रात हजारों करोड़ के सिंडिकेट का मालिक कैसे बन गया? सोशल मीडिया पर कई कद्दावर सफेदपोशों के साथ उसकी तस्वीरें वायरल होने के बावजूद जांच एजेंसियों ने उन सफेदपोशों से पूछताछ तक करने की जहमत नहीं उठाई। छोटे-मोटे मोहरे जरूर जेल भेजे गए, लेकिन ‘किंगपिन’ का बाल भी बांका नहीं हुआ।

☕ ‘काका’ की चाय पर चर्चा: “ईरानी ड्रोन से भी ज्यादा मारक है कोडीन की क्षमता!”

मामला सार्वजनिक होने के बाद बनारसी मिजाज के ‘काका’ ने कुल्हड़ की गर्म चाय की चुस्की लेते हुए अपने तल्ख अंदाज में पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की:

“बबुआ! कल का मामूली लड़का आज हजारों करोड़ का सिंडिकेट चला रहा है, तो बिना तगड़े राजनीतिक संरक्षण के यह संभव नहीं है। जब दाऊद दुबई से मुंबई चला सकता था, तो शुभम जायसवाल दुबई से बनारस और यूपी का सिस्टम क्यों नहीं हांक सकता? जज साहब ने फैसले के ऊपर इंसाफ को तरजीह दी, ऐसे ईमानदार जज को सलाम है। लेकिन जब हाई कोर्ट के जज को अप्रोच किया जा रहा है, तो समझ लो कि दाल में सिर्फ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है!”

जब काका से पूछा गया कि आगे क्या होगा, तो उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा— “होगा क्या? नई बेंच बैठेगी, बहस-जिरह होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अगली बेंच फैसला सुनाती है या वह भी ‘काला दिन’ कहकर किनारे होती है। हमने तो पहले ही कहा था— ‘बतिया है, कर्तुतिया नाही’!”

PNN24 News कोडीन माफिया, हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट्स और न्यायपालिका से जुड़े इस गंभीर घटनाक्रम पर अपनी बेबाक और निष्पक्ष कवरेज जारी रखेगा।

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