चंबल के पूर्व खूंखार डकैत जगन गुर्जर की अजमेर जेल में हत्या: परिवार धरने पर, CBI जांच सहित रखीं 5 मांगें, पढ़े कौन था फ़िल्मी स्टाइल में डकैत बना जगन गुर्जर
चंबल के बीहड़ों में कभी खौफ का दूसरा नाम रहे पूर्व डकैत जगन गुर्जर की अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बेरहमी से हत्या कर दी गई है। जेल के भीतर हुई इस सनसनीखेज वारदात के बाद राजस्थान के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जगन की मौत के बाद उसके परिवार वाले और समाज के लोग आक्रोशित हैं और शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए अजमेर के जेएलएन (JLN) अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए हैं।

तारिक आज़मी
अजमेर/धौलपुर: चंबल के बीहड़ों में कभी खौफ का दूसरा नाम रहे पूर्व डकैत जगन गुर्जर की अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बेरहमी से हत्या कर दी गई है। जेल के भीतर हुई इस सनसनीखेज वारदात के बाद राजस्थान के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जगन की मौत के बाद उसके परिवार वाले और समाज के लोग आक्रोशित हैं और शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए अजमेर के जेएलएन (JLN) अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए हैं।
बेटे आसाराम ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, रखीं 5 शर्तें
जगन गुर्जर के बेटे आसाराम ने अपने समुदाय के लोगों के साथ मिलकर तहसीलदार ओम लखावत को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। परिजनों का साफ कहना है कि जब तक सरकार उनकी 5 मुख्य मांगें नहीं मानती, तब तक वे शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे।
परिवार की 5 प्रमुख मांगें:
- SHO पर कार्रवाई: जगन गुर्जर को कथित रूप से झूठे आर्म्स एक्ट में फंसाकर अजमेर जेल भिजवाने वाले थानाधिकारी (SHO) को तुरंत सस्पेंड किया जाए और कानूनी कार्रवाई हो।
- भाई को धौलपुर जेल शिफ्ट करना: पोस्टमार्टम से पहले अजमेर जेल में ही बंद जगन के भाई पप्पू गुर्जर को धौलपुर जेल शिफ्ट किया जाए।
- पुलिस प्रोटेक्शन: जगन के परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, इसलिए उन्हें तुरंत सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
- अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति: पप्पू गुर्जर और जगन के अन्य भाइयों को उसके दाह संस्कार में शामिल होने की पैरोल/अनुमति दी जाए।
- CBI जांच और निलंबन: जेल सुपरिटेंडेंट समेत दोषी स्टाफ को तुरंत सस्पेंड कर उन पर हत्या की साजिश का मुकदमा दर्ज हो, और पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी जाए।
जगन के रिश्तेदार प्रह्लाद खटाना ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि इतनी सुरक्षित मानी जाने वाली जेल के सीसीटीवी (CCTV) कैमरे घटना के वक्त बंद क्यों थे? उन्होंने आरोप लगाया कि कैमरों को जानबूझकर बंद किया गया ताकि हत्यारों को बचाया जा सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए अजमेर रेंज आईजी राजेंद्र सिंह और जेल आईजी विक्रम सिंह ने मौके का मुआयना किया है।
क्यों और किसने की हत्या?
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, जगन गुर्जर की हत्या उसी के बैरक में बंद हार्डकोर क्रिमिनल विष्णु जाट (उर्फ बौना) ने की है। बताया जा रहा है कि जगन गुर्जर ने विष्णु की बहन को लेकर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे दोनों के बीच लंबे समय से रंजिश चल रही थी। 29 जून की सुबह जब दोनों को बैरक में बंद किया गया, तब मौका पाकर विष्णु ने वारदात को अंजाम दिया। दोपहर करीब 3 बजे जब सुरक्षा गार्ड बैरक में पहुंचा, तब इस हत्याकांड का खुलासा हुआ।
दूध बेचने वाले से ‘चंबल का चीता’ बनने की फिल्मी कहानी
जगन गुर्जर का अपराध की दुनिया में आना किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा है। धौलपुर के भावुतिपुरा गांव का रहने वाला जगन शुरुआत में अपने पिता के साथ दूध बेचने का काम करता था। एक दिन मंदिर में प्रसाद बांटने को लेकर उसके पिता का विवाद कुछ लोगों से हो गया। पिता के अपमान का बदला लेने के लिए जगन ने उन लोगों की बेरहमी से पिटाई कर दी और पुलिस के डर से चंबल के बीहड़ों में कूद गया। 1994 में शुरू हुआ यह सफर उसे 100 से ज्यादा मुकदमों (हत्या, रंगदारी, डकैती) का सरगना बना गया।
जब वसुंधरा राजे के महल को उड़ाने की दी थी धमकी
जगन गुर्जर साल 2008 में तब देश भर की सुर्खियों में आया, जब गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को बम से उड़ाने की धमकी दे डाली थी। इसके बाद उस पर 11 लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ था।
जगन ने अपने जीवन में तीन बार सरेंडर किया— पहली बार 2001 में IPS बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने, दूसरी बार 2009 में कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने और तीसरी बार 2018 में आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने। साल 2022 में तत्कालीन कांग्रेस विधायक गिर्राज मलिंगा को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में उसे आखिरी बार गिरफ्तार किया गया था। चंबल के इस खूंखार डकैत ने कभी पुलिस के एनकाउंटर से बचने के लिए जेल को अपनी ढाल बनाया था, लेकिन किसे पता था कि उसी जेल की सलाखें उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएंगी।










