‘दालमंडी चौड़ीकरण में मुनाफाखोरों का खेल: ज़द से बची दुकान पर चली पोकलैंड, भड़के व्यापारियों ने किया शिकायत, दालमंडी व्यापार मंडल ने थाने पर दी विधिक तहरीर; काका बोले— “ये अनर्थ है!”‘
वाराणसी की ऐतिहासिक दालमंडी में चौड़ीकरण के नाम पर बड़ा खेल! ज़द से बची सुरेश की दुकान का शटर पोकलैंड से तोड़ने पर भड़के व्यापारी। दालमंडी व्यापार मंडल के महामंत्री शाहनवाज़ खान 'शानू मोबाइल' ने थाने में दी तहरीर; पीडब्लूडी और मुनाफाखोर भू-स्वामियों के कथित गठजोड़ पर उठे सवाल। पढ़ें तारिक आज़मी की 'मोरबतियाँ' और PNN24 की ग्राउंड विधिक रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी के सबसे व्यस्त व्यावसायिक इलाकों में से एक— दालमंडी गली का चौड़ीकरण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है। जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) के सख्त विधिक निर्देशों के बावजूद, ग्राउंड पर काम कर रहे निजी ठेकेदारों और मुनाफाखोर भू-स्वामियों (Landlords) के एक कथित गठजोड़ ने एक नया प्रशासनिक व विधिक विवाद खड़ा कर दिया है। चौड़ीकरण की विधिक ज़द से बची सुरक्षित दुकानों को जबरन तुड़वाने और पुराना कब्जा हटाकर नई ‘मोटी पगड़ी’ ऐंठने के खेल के खिलाफ दालमंडी व्यापार मंडल पूरी तरह लामबंद हो गया है।
🚧 क्या है पूरा मामला? फ्रंट की दुकान बनते ही भू-स्वामी की नीयत खराब!
प्रशासनिक और विधिक गाइडलाइंस के मुताबिक, पीडब्लूडी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि चौड़ीकरण के दायरे में आने वाले चिन्हित ढांचों के अतिरिक्त एक इंच संपत्ति को भी स्पर्श नहीं किया जाएगा। लेकिन कल बृहस्पतिवार को दालमंडी के भीतर इन नियमों को ताक पर रख दिया गया।
पीड़ित दुकानदार सुरेश की दुकान पहले गली के अंदर की तरफ थी। चौड़ीकरण के कारण आगे के भवन टूटने से सुरेश की दुकान अचानक मुख्य मार्ग (फ्रंट) की बेशकीमती संपत्ति बन गई। दुकान की विधिक और बाजारू कीमत बढ़ती देख मुनाफाखोर भवन स्वामी ने कथित तौर पर कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों से साठगांठ कर ली। इसके बाद, अचानक पोकलैंड मशीन लगाकर सुरेश की दुकान का शटर अवैध रूप से उखाड़ दिया गया, जबकि वह दुकान ध्वस्तीकरण के दायरे में ही नहीं थी।
👮 थाने पर चली देर रात तक पंचायत, शानू मोबाइल ने दी विधिक तहरीर
इस मनमानी और अवैध तोड़फोड़ की खबर फैलते ही दालमंडी के व्यापारियों में भारी आक्रोश फैल गया। बाजार बंद कर बड़ी संख्या में व्यापारी स्थानीय थाने पहुंचे, जहां देर रात तक विधिक पंचायत और प्रशासनिक मान-मनौव्वल का दौर चला।
दालमंडी व्यापार मंडल के महामंत्री शाहनवाज़ खान ‘शानू मोबाइल’ ने कार्यदायी संस्था के अज्ञात ठेका कर्मियों और साजिशकर्ताओं के खिलाफ थाना प्रभारी को लिखित विधिक शिकायत (तहरीर) सौंपी। पीडब्लूडी के उच्चाधिकारियों को भी पत्र भेजते हुए शाहनवाज़ खान ने कड़े शब्दों में कहा:
“मरे को और मारने वाली यह हरकते कतई स्वीकार्य और बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। जिन दुकानदारों का कारोबार इस अभियान में पहले ही उजड़ चुका है, उन्हें अब बचे हुए स्थानों पर शांति से व्यापार करने दिया जाए। पीडब्लूडी अपने बेलगाम ठेकेदारों और घूसखोर कर्मियों को सख्त विधिक हिदायत जारी करे और भवन स्वामी उन गरीब दुकानदारों को परेशान करना बंद करें जिनकी दुकानें विधिक रूप से सुरक्षित बची हैं।”
🕯️ तारिक आज़मी की ‘मोरबतियाँ’ (काका का तीखा विधिक व सामाजिक प्रहार)
आज सुबह जब यह गंभीर समाचार हमारे काका के कानों तक पहुंचा, तो उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की। पहले तो उन्होंने हमेशा की तरह अपनी नाक पर टिका चश्मा ऊपर की तरफ चढ़ाया और कुल्हड़ की चाय की चुस्की लेते हुए बोले:
“बबुआ, दालमंडी का इतिहास भाईचारे और व्यापार का रहा है। मगर चंद मुनाफाखोर भवन स्वामी अपनी गिरती नीयत के कारण पूरी दालमंडी को बदनाम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को अगर हम सिर्फ ‘मुनाफाखोर’ कहें, तो यह शब्द भी छोटा पड़ जाएगा। अपनी ही बेची हुई संपत्ति को दोबारा हथियाने के लिए किसी गरीब की आजीविका उजाड़ना सरासर विधिक और नैतिक पाप है।”
जब मैंने काका से पूछा कि इस प्रशासनिक लापरवाही और जमीनी अराजकता के लिए वे किसे सबसे बड़ा कसूरवार मानते हैं? तो काका ने चश्मा ठीक करते हुए विधिक व्यवस्था पर उंगली उठाई:
“देखो बबुआ, इसके लिए हम शीर्ष जिला प्रशासन या सरकार को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते, क्योंकि नीतियां सही बनाई गई थीं। असली गुनाहगार वह भवन स्वामी है जिसकी नीयत में खोट आ गया है। और दूसरे नंबर पर आते हैं पीडब्लूडी के वह ठेकेदार और उनके भ्रष्ट कर्मचारी, जो चंद रुपयों की लालच में पोकलैंड का मुंह किसी गरीब की दुकान की तरफ मोड़ देते हैं। पीडब्लूडी को इन छोटे मजदूरों पर नहीं, बल्कि मूल ठेकेदार पर सख्त विधिक और दंडात्मक कार्रवाई (Blacklist) करनी चाहिए, ताकि ठेकेदार खुद मौके पर खड़ा रहकर काम कराए। अगर ऐसा नहीं हुआ बबुआ, तो ये घूसखोर कर्मचारी आने वाले दिनों में दालमंडी में कोई बड़ा विधिक ‘अनर्थ’ कर बैठेंगे।”











