‘धार भोजशाला में विधिक घमासान: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हिंदू पक्ष की पूजा संपन्न; वैकल्पिक जगह पर नमाज़ से मुस्लिम पक्ष का इनकार, प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें!’

धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक रस्साकसी। हिंदू पक्ष की पूजा संपन्न, लेकिन मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक नमाज़ स्थल का आवंटन बना चुनौती। ग्राम मालीवाड़ा की ज़मीन को मुस्लिम समुदाय ने किया खारिज, जिला कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने संभाली कमान। सुप्रीम कोर्ट में अब 5 अगस्त को होगी अगली विधिक सुनवाई। पढ़ें PNN24 की ग्राउंड विधिक रिपोर्ट।

तारिक खान

धार (PNN24 News): मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक सरस्वती सदन ‘भोजशाला’ परिसर में धार्मिक अधिकारों को लेकर कानूनी लड़ाई अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के अंतरिम आदेश के अनुपालन में शुक्रवार को भोजशाला के भीतर हिंदू समाज ने पारंपरिक पूजा-अर्चना तो संपन्न की, लेकिन कोर्ट के निर्देशानुसार मुस्लिम समुदाय को नमाज़ के लिए परिसर से अलग खुली ज़मीन आवंटित करना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी विधिक और कानून-व्यवस्था की चुनौती बन गया है।

🕋 मालीवाड़ा की ज़मीन आवंटित, मुस्लिम पक्ष ने क्यों किया इनकार?

विधिक घटनाक्रम के अनुसार, इंदौर हाई कोर्ट ने पूर्व में वैज्ञानिक सर्वेक्षण (Scientific Survey) के आधार पर भोजशाला को मंदिर मान्य करते हुए शुक्रवार की जुमे की नमाज़ पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत के तौर पर निर्देश दिया था कि शुक्रवार की जुमे की नमाज़ के लिए मुस्लिम पक्ष को संरक्षित क्षेत्र से बाहर एक खुला और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए।

विधिक आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद धार जिला प्रशासन ने आनन-फानन में ग्राम मालीवाड़ा की सर्वे क्रमांक 664 पर नमाज़ के लिए ज़मीन चिन्हित की और वहां साफ-सफाई का काम तेज कर दिया। हालांकि, मुस्लिम समुदाय ने इस जगह को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।

  • इनकार का कारण: मुस्लिम पक्ष का विधिक तर्क है कि चिन्हित की गई यह ज़मीन भोजशाला परिसर से करीब एक किलोमीटर दूर है और यह ‘चालीस पीर दरगाह’ के ठीक सामने स्थित है, जो व्यावहारिक रूप से नमाज़ के लिए उपयुक्त नहीं बैठ रही है।
  • समय बीता, चर्चा जारी: इस असमंजस के कारण जुमे की नमाज़ का निर्धारित समय निकल गया, लेकिन मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ लगातार विधिक संवाद और चर्चा में जुटे रहे।

👮 “कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता”— जिला कलेक्टर

इस बेहद संवेदनशील विधिक स्थिति और तनाव को देखते हुए धार के जिला कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने प्रशासनिक रुख स्पष्ट किया है।

कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने मीडिया से बातचीत में कहा:

“माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर आदेश की प्रमाणित प्रति अपलोड कर दी है। प्रशासन विधिक निर्देशों का पूरी तरह से विश्लेषण कर रहा है। कोर्ट के हर निर्देश को अक्षरशः लागू करने के लिए ज़रुरी कदम उठाए जा रहे हैं। जिला प्रशासन धार में हर कीमत पर कानून-व्यवस्था (Law and Order) बनाए रखने और शांतिपूर्ण स्थिति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।”

दूसरी तरफ, भोजशाला उत्सव समिति (हिंदू पक्ष) ने सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश का स्वागत किया है, हालांकि उनका कहना है कि आदेश की विस्तृत कॉपी का वे भी अध्ययन कर रहे हैं।

⚖️ अब 5 अगस्त की तारीख पर टिकी निगाहें

भोजशाला का यह विधिक विवाद अब पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के अधीन है। दोनों पक्षों को अंतरिम राहत देने के बाद सर्वोच्च अदालत ने इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 5 अगस्त २०२६ की तारीख मुकर्रर की है। 5 अगस्त को होने वाली इस सुनवाई में कोर्ट तय करेगा कि धार की इस ऐतिहासिक धरोहर में दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकारों का स्थायी विधिक संतुलन कैसे बनाया जाए।

PNN24 News धार भोजशाला मामले से जुड़े हर एक विधिक घटनाक्रम, प्रशासनिक निर्णयों और कानून-व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर अपनी निष्पक्ष व खोजी नजर बनाए रखेगा।

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