‘इंस्टाग्राम पर “चाइल्ड एब्यूज” विज्ञापनों पर भारत सरकार सख्त: आईटी सचिव एस. कृष्णन बोले— “मेटा के औपचारिक जवाब का इंतजार, फिर तय करेंगे कड़ा रुख”!’
इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों (CSEAM) के मामले में भारत सरकार का बड़ा कदम। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने कहा— "मेटा के जवाब के बाद तय करेंगे विधिक पक्ष।" बीबीसी की खोजी पड़ताल के बाद सरकार ने मेटा को थमाया था ७ दिनों का नोटिस। पढ़ें PNN24 की विशेष डिजिटल सुरक्षा रिपोर्ट।

तारिक खान
नई दिल्ली (PNN24 News): सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta) के प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSEAM) के प्रसार को लेकर मचे अंतरराष्ट्रीय बवाल के बीच भारत सरकार ने अपनी पहली औपचारिक और विधिक प्रतिक्रिया दी है। इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा को नोटिस जारी कर कड़े विधिक सवाल पूछे हैं।

“हम मेटा की ओर से हमारे नोटिस के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहे हैं। उस जवाब के डिजिटल और विधिक रूप से आने के बाद ही सरकार अपना अगला पक्ष और सख्त रुख तय करेगी।”
🚨 बीबीसी-आई (BBC-I) की पड़ताल में हुआ था सनसनीखेज खुलासा
यह पूरा प्रशासनिक और विधिक मामला बीबीसी की एक खोजी पड़ताल के बाद सामने आया था। बीबीसी-आई ने अपनी विस्तृत इन्वेस्टिगेशन में पाया था कि इंस्टाग्राम भारत में पैसे लेकर (Paid Ads) ऐसे विज्ञापन धड़ल्ले से चला रहा है, जिसके जरिए बच्चों और बच्चियों के यौन शोषण से जुड़ी अत्यधिक आपत्तिजनक सामग्री (Child Sexual Abuse Material) का न सिर्फ प्रचार हो रहा है, बल्कि उसे बेचा भी जा रहा है।
इस खोजी रिपोर्ट के सामने आते ही भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी ‘मेटा’ को एक कड़ा विधिक नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में मेटा को आदेश दिया गया था कि:
- इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों में दिख रहे ऐसे सभी विज्ञापनों और आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटाया जाए।
- कंपनी इस पूरी विधिक विफलता पर सात दिनों के भीतर सरकार के समक्ष अपना विस्तृत स्पष्टीकरण (Detailed Explanation) पेश करे।
🛡️ “यह एक भयानक अपराध है”— मेटा ने दी सफाई
इस पूरे वैश्विक विवाद और भारत सरकार के विधिक नोटिस के बाद मेटा कंपनी भी बैकफुट पर नजर आ रही है। बीबीसी को दिए अपने आधिकारिक विधिक बयान में मेटा के प्रवक्ता ने सफाई देते हुए कहा:
“बच्चों का शोषण एक भयानक और अक्षम्य अपराध है, जिससे हम अपने प्लेटफॉर्म पर पूरी संजीदगी और अत्याधुनिक तकनीकी टूल्स के जरिए लड़ने की कोशिश कर रहे हैं।”
मेटा ने अपनी आंतरिक विधिक कार्रवाई का ब्योरा देते हुए दावा किया कि वे भारत सरकार के नोटिस से पहले ही कई संदिग्ध विज्ञापनों को डिसेबल कर चुके हैं और उन्हें पोस्ट करने वाले अकाउंट्स को हमेशा के लिए सस्पेंड कर चुके हैं। कंपनी ने आगे स्वीकार किया कि बीबीसी की पड़ताल में सामने आए तथ्यों के बाद उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए और अधिक विज्ञापनों को हटाया है, दोषी अकाउंट्स को ब्लॉक किया है और उनकी सुरक्षा पॉलिसी का उल्लंघन करने वाली अन्य सभी सामग्रियों के यूआरएल (URLs) को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है।
⚖️ आईटी एक्ट के तहत हो सकती है कड़ी विधिक कार्रवाई
डिजिटल कानूनों के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेटा का जवाब सात दिनों के भीतर संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो भारत सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न विधिक धाराओं के तहत इंस्टाग्राम को मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbor) सुरक्षा को वापस ले सकती है। ऐसा होने पर प्लेटफॉर्म पर आपराधिक विधिक कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा।











