भारतीय रेल के नए कड़े नियम लागू: महिला कोच में घुसे तो ₹2,500 जुर्माना, खतरनाक सामान ले जाने पर होगी जेल
भारतीय रेलवे ने सुरक्षा और पेनाल्टी के नियमों में किया बड़ा बदलाव। महिला कोच में सफर करने वाले पुरुषों पर अब लगेगा ₹2500 का जुर्माना, खतरनाक सामान ले जाने पर होगी सीधे जेल। जानिए ज़मीनी हकीकत और यात्रियों की राय PNN24 न्यूज़ पर।

तारिक खान
नई दिल्ली: भारतीय रेल (Indian Railways) ने अपनी सुरक्षा नीति और पेनाल्टी स्ट्रक्चर में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। अगर आप अक्सर ट्रेनों में सफर करते हैं और नियमों को लेकर थोड़े भी लापरवाह हैं, तो अब संभल जाइए। नए नियमों के मुताबिक, ज़रा सी लापरवाही न सिर्फ आपकी जेब पर भारी चोट पहुंचाएगी, बल्कि आपको सीधे जेल की हवा भी खिला सकती है। रेलवे ने साफ कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियत के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
महिला कोच में पुरुषों की एंट्री पर अब ₹2,500 का फटका
अब तक ट्रेनों के महिला कोच में पुरुषों का अनाधिकृत (बिना अनुमति) प्रवेश एक आम और परेशान करने वाली समस्या रही है। अक्सर पुरुष यात्री भीड़ या जल्दीबाज़ी का हवाला देकर महिला डिब्बों में सवार हो जाते थे। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेलवे ने अब इसे बेहद गंभीर ‘अपराध’ की श्रेणी में डाल दिया है।
- नया नियम: महिला कोच में अवैध रूप से सफर करने वाले पुरुषों के लिए जुर्माना राशि बढ़ाकर सीधे ₹2,500 कर दी गई है।
- सख्त निर्देश: रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को निर्देश दिए गए हैं कि महिला कोच में दिखने वाले पुरुषों को तुरंत हिरासत में लिया जाए और उन पर कड़ी कार्रवाई हो।
कागज़ पर कड़े नियम, पर ज़मीन पर कितनी हकीकत?
नियम भले ही सख्त कर दिए गए हों, लेकिन ग्राउंड रियलिटी जानने के लिए जब नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और आनंद विहार टर्मिनल पर नियमित सफर करने वाली महिला यात्रियों से बात की गई, तो मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई। अधिकतर महिलाओं का मानना है कि सिर्फ जुर्माना बढ़ाने से इस समस्या का परमानेंट इलाज नहीं होगा।
स्टेशन पर मिलीं पारुल नाम की एक महिला यात्री ने कहा:
“जुर्माना तो कागजों पर बढ़ा दिया गया है, लेकिन जब तक आरपीएफ (RPF) के जवान हर महिला कोच के गेट पर तैनात नहीं होंगे, तब तक पुरुष अपनी इस हरकत से बाज नहीं आएंगे।”
यह बयान रेलवे के सामने खड़ी मैनपावर (कर्मचारियों) की कमी की बड़ी चुनौती को बयां करता है। इसके साथ ही यह आशंका भी उठ रही है कि भारी-भरकम जुर्माने के डर से कहीं निचले स्तर पर भ्रष्टाचार और अवैध लेनदेन का खेल न शुरू हो जाए।
त्योहारों की भारी भीड़ में कैसे लागू होगा कानून?
सबसे बड़ा संकट फेस्टिव सीज़न (त्योहारों के समय) में देखने को मिलेगा, जब ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं होती। ऐसे में जनरल टिकट वाले यात्रियों की भारी भीड़ को महिला या स्लीपर कोच में घुसने से रोकना आरपीएफ और टीटीई (TTE) के लिए बड़ी चुनौती होगा।
रेलवे के रिटायर्ड स्टेशन मास्टर अशोक कुमार सिंह ने इस व्यावहारिक समस्या पर बात करते हुए कहा:
“नियम तो सबके लिए बराबर हैं, लेकिन जब प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में खचाखच भीड़ हो, तो कानून का पालन करवाना स्टेशन मास्टर, टीटीई और आरपीएफ के लिए सिरदर्द बन जाता है। ऐसी स्थिति में जुर्माना वसूलना लगभग नामुमकिन होता है।”
खतरनाक सामान पर जेल, लेकिन चेकिंग के लूपहोल्स बरकरार
नए नियमों के तहत ट्रेन में पटाखे, गैस सिलेंडर, स्टोव या ज्वलनशील पदार्थ ले जाने पर सीधे जेल भेजने का प्रावधान किया गया है। लेकिन असल समस्या रेलवे स्टेशनों के एंट्री पॉइंट्स (प्रवेश द्वारों) पर है।
अक्सर देखा जाता है कि स्टेशनों पर लगे बैगेज स्कैनर या तो खराब पड़े रहते हैं या फिर वहां तैनात सुरक्षाकर्मी चेकिंग को लेकर बेहद ढीले रहते हैं। ऐसे में जब तक एंट्री पॉइंट पर सुरक्षा चाक-चौबंद नहीं होगी, तब तक खतरनाक सामान को ट्रेनों के अंदर जाने से रोकना और इस नए नियम को पूरी तरह प्रभावी बनाना सिर्फ एक कागजी कवायद बनकर रह जाएगा।










