‘घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिजनों का फूटा दर्द: कहा— “छात्रों के आंदोलन में घुसे असामाजिक तत्व, खून से सनी वर्दी देख कांप उठी रूह”; न्याय के लिए पहुंचे सुप्रीम कोर्ट’

जंतर-मंतर प्रदर्शन में घायल दिल्ली पुलिस जवानों के परिजनों का छलका दर्द! शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीड़ित परिवारों ने कहा— "छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हो चुके थे असामाजिक तत्व"। 25 जुलाई को सब-इंस्पेक्टर को पीट-पीटकर अधमरा करने और ACP के घायल होने का दास्तां सुनाते हुए परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

आदिल अहमद 

नई दिल्ली (PNN24 News): दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों के हालिया प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में घायल हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षाबलों के परिजनों ने शुक्रवार को एक भावुक व तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पीड़ित परिवारों ने प्रदर्शनकारियों के हिंसक रवैये पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के नाम पर हुए इस आंदोलन में असामाजिक तत्व शामिल हो चुके थे, जिन्होंने ड्यूटी पर तैनात जवानों पर जानलेवा हमले किए।

CJP द्वारा दर्ज एफ़आईआर वापस लेने की मांगों और सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने की कोशिशों के बीच, अब घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने भी अपने अधिकारों और न्याय के लिए देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

🩸 “मंच के पास पिता को घसीटकर पीट-पीटकर मारने की कोशिश की”— सब-इंस्पेक्टर की बेटी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 25 जुलाई को जंतर-मंतर पर गंभीर रूप से घायल हुए दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर (SI) की बेटी का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने आपबीती सुनाते हुए कहा:

“मेरे पिता मुख्य धरना स्थल पर तैनात थे। वे अक्सर घर आकर कहते थे कि यह विरोध अब केवल छात्रों का नहीं रहा, इसमें कई असामाजिक तत्व घुस चुके हैं। 25 तारीख को दोपहर करीब 2:00 बजे एक उपद्रवी भीड़ ने मेरे पिता को खींच लिया और जंतर-मंतर मंच के पास उन्हें पीट-पीटकर लगभग मार डालने की कोशिश की।”

उन्होंने आगे बताया कि उनके पिता राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में करीब चार घंटे तक बेहोश रहे। रात करीब 10 बजे जब उनके साथी उन्हें घर लाए, तो उनकी वर्दी पूरी तरह खून से सनी हुई थी।

“उन्हें उस हालत में देखना हमारे लिए अत्यंत दर्दनाक था। सोशल मीडिया पर पुलिस को ही अपराधी बताया जा रहा था, जबकि हमला करने वाले लोग खुद को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। तब मैंने ठान लिया कि पुलिसकर्मियों के परिवारों को भी न्याय मिलना चाहिए।”

💔 “2 साल की बच्ची के सामने लहूलुहान पहुंचे पति”— ACP की पत्नी का बयान

वहीं 20 जुलाई को संसद मार्च/प्रदर्शन के दौरान भीड़ के हमले में घायल हुए दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) की पत्नी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी आपबीती साझा की।

उन्होंने बताया कि 20 जुलाई की देर रात जब उनके पति गंभीर चोटिल हालत में घर पहुंचे, तो वह पल उनके और उनकी महज दो साल की मासूम बेटी के लिए बेहद खौफनाक और दर्दनाक था।

⚖️ पुलिस परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई न्याय की गुहार

सरकार और CJP के बीच हुई वार्ताओं में सभी प्रदर्शनकारियों व छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग की जा रही है। ऐसे में पीड़ित पुलिस परिवारों ने एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

परिजनों ने बताया कि उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए वकील से अनुरोध किया है। कानूनी प्रतिनिधियों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि इस देश के नागरिक के तौर पर पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को भी कानून के समक्ष समान अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।

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