‘CIA ठिकानों पर ईरान के सटीक हमले से हैरान अमेरिका: क्या मॉस्को ने दी थी गुप्त मदद? शाहेद ड्रोन में रूसी “Kometa-M” नेविगेशन और डेटा शेयरिंग के शक पर CIA की जांच शुरू!’
खाड़ी देशों में CIA के गुप्त ठिकानों पर ईरान के सटीक हमले से हैरान अमेरिका! मार्च 2026 में रियाद और इराक में हुए हमलों की जांच में जुटा CIA; क्या रूस ने 'Kometa-M' नेविगेशन और सैटेलाइट डेटा देकर की थी ईरान की मदद? रॉयटर्स और द वॉल स्ट्रीट जर्नल के सनसनीखेज खुलासे से अमेरिका-ईरान-रूस के बीच नया सैन्य तनाव। पढ़ें PNN24 की पूरी रिपोर्ट।

ईदुल अमीन
वाशिंगटन/रियाद (PNN24 News): मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच एक बेहद सनसनीखेज सामरिक खुलासा हुआ है। लगभग पांच महीने पहले (मार्च 2026 में) खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA (सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी) के ठिकानों पर हुए बेहद सटीक और भीषण ड्रोन हमलों ने अमेरिकी रक्षा व खुफिया विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। अमेरिका अब इस बात की गहन जांच कर रहा है कि ईरान ने इतने गुप्त और अत्यधिक सुरक्षित CIA ठिकानों को इतनी सटीकता से कैसे निशाना बनाया? वाशिंगटन के रणनीतिक हलकों में यह मजबूत आशंका जताई जा रही है कि इस हमले के पीछे रूस (मॉस्को) की उच्च-स्तरीय तकनीकी मदद और सैटेलाइट नेविगेशन सपोर्ट था।
🎯 मार्च 2026 में रियाद और पूर्वी इराक स्थित CIA ठिकानों पर हुआ था हमला
रॉयटर्स (Reuters) द्वारा अमेरिकी इंटेलिजेंस के चार वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में CIA की कम से कम दो मुख्य फैसिलिटीज को निशाना बनाकर बमबारी की थी:
- रियाद (सऊदी अरब): अमेरिकी दूतावास परिसर के भीतर स्थित गुप्त CIA सेंटर।
- पूर्वी इराक: इराक के संवेदनशील पूर्वी क्षेत्र में मौजूद CIA का इंटेलिजेंस बेस।
इन दोनों घोषित ठिकानों के अलावा कुछ अन्य गुप्त CIA परिसरों पर भी आत्मघाती हमले किए गए, जिनकी सटीक जानकारी सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की गई है। इंटेलिजेंस विश्लेषकों ने इस संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है कि ईरान ने ये हमले किसी तुक्के या ‘इत्तेफाक’ से किए थे। CIA का मानना है कि केवल कुछ ही चुनिंदा देश हैं जिनके पास अमेरिकी इंटेलिजेंस के खिलाफ ऐसा सटीक डेटा जुटाने की क्षमता और हिम्मत है—और रूस इनमें सबसे आगे है।
🛸 शाहेद ड्रोन और रूसी ‘Kometa-M’ सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली
अमेरिकी रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि रियाद स्थित दूतावास परिसर में हुए हमले में ईरान निर्मित शाहेद (Shahed-136) आत्मघाती ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, इन ड्रोनों की मारक क्षमता और नेविगेशन सटीकता को रूस द्वारा दिए गए अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों से कई गुना बढ़ाया गया था।
- Kometa-M सिस्टम: रिपोर्ट और ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के दावों के अनुसार, मॉस्को ने ईरान को इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और जैमिंग से बचाने वाला Kometa-M एंटी-जैमिंग सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम मुहैया कराया था। इसी नेविगेशन टूल की बदौलत ईरानी ड्रोन अमेरिकी सुरक्षा और एयर डिफेंस रडार को चकमा देकर सीधे CIA के ठिकानों पर गिरे।
- रूसी सैटेलाइट डेटा: जांच अधिकारी इस बात का भी पता लगा रहे हैं कि क्या रूस ने अपने मिलिट्री सैटेलाइट्स के जरिए अमेरिकी ठिकानों का लाइव कोऑर्डिनेट डेटा (Coordinates) ईरान के साथ साझा किया था। हालांकि, रूस ने इन दावों को पूरी तरह से ‘फेक न्यूज’ बताकर खारिज कर दिया है।
🌐 सुलगता मिडिल ईस्ट: क्या महाशक्तियों में छिड़ेगा सीधा टकराव?
हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अभी तक इस अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं कि हमले में रूस की प्रत्यक्ष भूमिका थी या नहीं, लेकिन इस जांच ने वाशिंगटन, तेहरान और मॉस्को के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अमेरिका और ईरान पहले से ही एक-दूसरे के ठिकानों पर हवाई हमले और बमबारी कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह साबित हो जाता है कि रूस ने अमेरिका के खिलाफ ईरान को इंटेलिजेंस और नेविगेशन सपोर्ट दिया है, तो यह मध्य पूर्व की जंग को एक नए और विनाशकारी वैश्विक मोड़ पर ला खड़ा करेगा।











