‘ईरान का महापलटवार: ट्रंप के एलान के बाद तेहरान ने दी सीधी सैन्य कार्रवाई की धमकी; खाड़ी देशों को कड़ा अल्टीमेटम— “अमेरिका को जमीन दी तो भुगतने होंगे गंभीर अंजाम!”‘

ट्रंप के एलान के बाद ईरान का महापलटवार: ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा— "सशस्त्र बल अमेरिकी हमलावर ठिकानों को सीधे निशाना बनाने के लिए तैयार।" खाड़ी देशों को अपनी जमीन या एयरस्पेस अमेरिका को न देने की दी सख्त चेतावनी; होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान हमलों को लेकर अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार। पढ़ें PNN24 की विशेष अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट।

आदिल अहमद

PNN24 News: मिडल ईस्ट में जारी बारूदी तनाव अब उस मोड़ पर पहुँच चुका है जहाँ से वापसी का रास्ता लगभग असंभव नजर आ रहा है। बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में हुए युद्धविराम समझौते को “पूरी तरह ख़त्म” बताने के चंद घंटों के भीतर ही ईरानी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक और बेहद सख्त जवाबी बयान सामने आ गया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है और उसके सशस्त्र बल किसी भी हमले का मुंहतोड़ विधिक जवाब देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

🚀 “जहाँ से हुआ हमला, उन ठिकानों को कर देंगे नेस्तनाबूद”

ईरानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक विधिक बयान में बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। ईरान ने सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा:

“ईरानी सशस्त्र बल (Iranian Armed Forces) अब पूरी तरह से स्वतंत्र और सतर्क हैं। हमारे ऊपर जहाँ से भी हमले किए गए हैं, या भविष्य में जिन भी जगहों से हमारे खिलाफ सैन्य हमलों की विधिक योजना बनाई जा रही है, ईरानी सेना उन सभी ठिकानों और लॉन्च पैड्स को सीधे निशाना बनाने और उन्हें तबाह करने के लिए विधिक रूप से अधिकृत है।”

🇦🇪 खाड़ी देशों को सख्त विधिक अल्टीमेटम: “अपराध में भागीदार न बनें”

ट्रंप के सैन्य आदेशों के बीच ईरान ने सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे तमाम खाड़ी देशों (Gulf Nations) के लिए एक बेहद गंभीर और रणनीतिक चेतावनी जारी की है। ईरान ने दो टूक कहा है कि कोई भी खाड़ी देश किसी भी संभावित अमेरिकी कार्रवाई या हवाई हमलों के लिए अपनी ज़मीन, सैन्य अड्डों (Military Bases) या हवाई क्षेत्र (Airspace) का इस्तेमाल अमेरिका को कतई न करने दे।

तेहरान ने साफ लफ्जों में सचेत किया कि यदि किसी भी देश ने अपनी जमीन या सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करने की विधिक अनुमति अमेरिका को दी, तो इसे सीधे तौर पर ‘अमेरिका का साथ देने’ और ‘ईरान के खिलाफ युद्ध के अपराध में भागीदार बनने’ जैसा माना जाएगा, और फिर उस देश को भी ईरानी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

📡 अमेरिका पर लगाया समझौता तोड़ने का विधिक आरोप

ईरान ने इस वैश्विक अशांति के लिए पूरी तरह से वॉशिंगटन को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने ऑन-रिकॉर्ड दावा किया है कि:

  1. निगरानी केंद्रों पर हमला: अमेरिका ने युद्ध समाप्ति से जुड़े विधिक समझौते का खुला उल्लंघन करते हुए ईरान के दक्षिणी तट के पास मौजूद कई महत्वपूर्ण ईरानी निगरानी और सर्विलांस केंद्रों (Surveillance Centers) पर सीधे हमले किए हैं।
  2. होर्मुज़ स्ट्रेट में उल्लंघन: वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में ईरान से जुड़ी स्थापित विधिक व सुरक्षा व्यवस्थाओं का अमेरिकी नौसेना द्वारा बार-बार उल्लंघन किया गया है।
  3. लेबनान संकट: अमेरिका के पूर्ण संरक्षण में लेबनान पर इज़राइल के लगातार हो रहे बर्बर हमले भी इस शांति समझौते की विधिक भावना के विपरीत हैं।

ईरान का विधिक तर्क है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की इन अवैध और हिंसक हरकतों की वजह से ही अप्रैल २०२६ में हुआ युद्ध समाप्ति समझौता अब व्यावहारिक और विधिक रूप से पूरी तरह ‘प्रभावहीन’ (Null and Void) हो चुका है।

🌊 रणनीतिक विश्लेषकों की चिंता: क्या बंद होगा ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’?

इस ताजा जवाबी कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ईरान अब पलटवार के तौर पर ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह ब्लॉक कर सकता है, जहाँ से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। यदि ऐसा होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभालना मुश्किल हो जाएगा। PNN24 News इस महासंकट के हर एक पल की खोजी और जमीनी रिपोर्ट आप तक लगातार पहुँचाता रहेगा।

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