‘लखनऊ KGMU में हॉस्टल मेस में नॉन-वेज परोसने पर मौखिक रोक: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की टिप्पणी के बाद हरकत में आया प्रशासन; पढ़ें यूनिवर्सिटी का पूरा स्पष्टीकरण!’
केजीएमयू लखनऊ के 18 हॉस्टलों में मांसाहारी खाना पकाने पर लगी मौखिक रोक— विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा, "लिखित आदेश नहीं, छात्र कमरों में ऑनलाइन मंगाकर खा सकते हैं।" राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की टिप्पणी के ठीक अगले दिन जारी हुई एडवाइज़री; आरएमएल और केजीएमयू के दीक्षांत समारोहों से जुड़े घटनाक्रम पर पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
लखनऊ (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े और ऐतिहासिक किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के छात्रावासों के मेस में खाने के मेन्यू को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। केजीएमयू प्रशासन ने अपने सभी 18 हॉस्टलों (जिम्मे लगभग 2500 छात्र-छात्राएं निवास करते हैं) के मेस में मांसाहारी भोजन पकाने और परोसने पर रोक लगाने की मौखिक एडवाइज़री जारी की है। हालांकि प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि यह कोई विधिक या लिखित प्रतिबंध नहीं है, बल्कि एक व्यवस्थागत सुझाव है।
🏛️ “लिखित आदेश नहीं, केवल मौखिक सलाह”— प्रवक्ता डॉ. केके सिंह
विवाद बढ़ने के बाद केजीएमयू के आधिकारिक प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:
“यूनिवर्सिटी परिसर में दो तरह के मेस का संचालन होता है— कुछ मेस छात्रों की सहकारी व्यवस्था (Co-operative) के तहत संचालित होते हैं, जबकि कुछ का संचालन सीधे यूनिवर्सिटी प्रशासन करता है। इसके अलावा डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) के छात्रों के लिए सैटेलाइट फ्लैट जैसे हॉस्टल हैं, जहाँ उनके पास निजी किचन की सुविधा है और वहां ऐसी कोई रोक नहीं है।”
प्रवक्ता ने आगे स्पष्ट किया:
“हमने केवल यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित मेस को मौखिक रूप से सलाह दी है कि मांसाहारी भोजन की जगह पनीर, चना और अन्य पौष्टिक शाकाहारी विकल्प दिए जाएं। को-ऑपरेटिव मेस से भी ऐसा करने का अनुरोध किया गया है। न तो राजभवन या सरकार ने कोई लिखित आदेश दिया है और न ही हमने कैंपस में छात्रों के नॉन-वेज खाने पर पूर्ण रोक लगाई है। छात्र चाहें तो बाहर से ऑनलाइन खाना ऑर्डर करके अपने कमरों में खा सकते हैं।”
👑 दीक्षांत समारोह और राजभवन के निरीक्षण से जुड़ा घटनाक्रम
दरअसल, यूनिवर्सिटी का यह फैसला १३ जुलाई २०२६ को आयोजित केजीएमयू के २२वें दीक्षांत समारोह के ठीक अगले दिन सामने आया है। समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में छात्रावासों के मेस की स्थिति पर टिप्पणी की थी।
राज्यपाल ने अपने भाषण में कहा था कि राजभवन की विशेष टीम ने विश्वविद्यालय के तीन हॉस्टल मेस का औचक निरीक्षण किया था, जहाँ पाया गया कि वहां नॉन-वेज बनाया जा रहा था और एक स्थान पर एक्सपायर्ड (समय सीमा समाप्त) मसालों का उपयोग हो रहा था। यद्यपि कुलाधिपति ने अपने भाषण में किसी औपचारिक प्रतिबंध का उल्लेख नहीं किया था, लेकिन अगले ही दिन जारी हुई इस एडवाइज़री को सीधे इस घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
📜 पहले भी उठा था हॉस्टल मेस का मुद्दा
यह पहला मौका नहीं है जब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेडिकल संस्थानों के हॉस्टल मेस में परोसे जाने वाले भोजन पर सवाल उठाए हों। इससे पूर्व 15 जून 2026 को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के तीसरे दीक्षांत समारोह में भी उन्होंने सप्ताह में दो दिन हॉस्टल मेस में नॉन-वेज परोसे जाने की व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर की थी। केजीएमयू प्रशासन ने स्वीकार किया है कि उन्होंने आरएमएल और केजीएमयू दोनों दीक्षांत समारोहों में व्यक्त की गई मंशा को ध्यान में रखते हुए यह एडवाइज़री तैयार की है।
चिकित्सा जगत और छात्र संगठनों में इस बात को लेकर मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। कुछ छात्र इसे खान-पान की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रभाव मान रहे हैं, तो वहीं प्रशासन का तर्क है कि स्वच्छता और रसोई प्रबंधन को सुचारू बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। PNN24 News इस विषय पर छात्रों के पक्ष और प्रशासनिक फैसलों की हर अपडेट आप तक लगातार पहुंचाता रहेगा।










