‘अलीगंज अग्निकांड: 15 युवाओं को निगलने वाली “अवैध” इमारत को ढहाने का विधिक आदेश; एनीमेशन स्टूडियो में 22 जून को भड़की थी आग, SIT जांच के बाद मालिकों पर कसा शिकंजा!’
अलीगंज अग्निकांड: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने 15 युवाओं की जान लेने वाली 'मौत की इमारत' को गिराने का विधिक आदेश जारी किया। 22 जून को एनीमेशन और गेम डेवलपमेंट स्टूडियो में भड़की आग ने छीनी थी मासूमों की जिंदगी। एसआईटी (SIT) जांच, सीलिंग और एफआईआर के बाद मालिकों को 15 दिन का अल्टीमेटम। पढ़ें PNN24 की विशेष खोजी रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
लखनऊ (PNN24 News): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए उस भीषण और रूह कंपा देने वाले अग्निकांड मामले में आखिरकार सबसे बड़ी प्रशासनिक और दंडात्मक गाज गिर गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने उस पूरी इमारत को विधिक रूप से ध्वस्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया है, जहां बीते 22 जून 2026 को लगी विनाशकारी आग में छात्रों समेत 15 युवाओं की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस ऐतिहासिक हादसे ने जहां पूरे सूबे को हिलाकर रख दिया था, वहीं अब एलडीए के बुलडोजर एक्शन के आदेश ने अवैध निर्माण करने वाले भू-माफियाओं में हड़कंप मचा दिया है।
⚖️ उत्तर प्रदेश नगर योजना अधिनियम की धारा 27 के तहत 15 दिन का अल्टीमेटम
एलडीए के विधिक विंग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 का अनुपालन करते हुए इमारत के मुख्य मालिकों— वीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला (सहित अन्य सह-स्वामियों) को एक अंतिम विधिक नोटिस तामील कराया है।
इस कड़े विधिक आदेश की मुख्य शर्तें निम्नलिखित हैं:
- खुद हटाएं अवैध ढांचा: भवन स्वामियों को नोटिस प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर इस पूरी पांच मंजिला अवैध और अनधिकृत इमारत को अपने खर्च पर खुद हटाने का सख्त विधिक निर्देश दिया गया है।
- राजस्व की तरह वसूली: आदेश में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय (15 दिन) के भीतर मालिकों ने विधिक कार्रवाई नहीं की, तो एलडीए अपनी प्रवर्तन टीम और बुलडोजर के जरिए इस इमारत को खुद जमींदोज करेगा। इस ध्वस्तीकरण (Demolition) में आने वाला एक-एक रुपये का प्रशासनिक खर्च संबंधित मालिकों से ‘भू-राजस्व’ (Land Revenue) की तरह सख्ती से वसूला जाएगा।
🖥️ एनीमेशन और गेम डेवलपमेंट स्टूडियो बना था ‘डेथ ट्रैप’
विधिक जांच और ग्राउंड जीरो से मिली खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, बीती 22 जून 2026 को इस इमारत के भीतर अचानक शार्ट सर्किट या अज्ञात कारणों से भीषण आग भड़क उठी थी। इस हादसे में जान गंवाने वाले और गंभीर रूप से घायल होने वाले अधिकांश लोग 19 से 30 वर्ष की आयु के बीच के युवा और छात्र थे।
ये सभी होनहार युवा इसी इमारत की ऊपरी मंजिलों से अवैध रूप से संचालित हो रहे एक हाई-टेक एनीमेशन और गेम डेवलपमेंट स्टूडियो (Animation & Game Development Studio) में काम करते थे और अपने करियर को संवारने आए थे। इमारत में सुरक्षा के विधिक इंतजामात न होने और आपातकालीन निकास द्वार (Emergency Exit) बंद होने के कारण धुएं से दम घुटने और झुलसने की वजह से 15 मासूम जिंदगियां मौके पर ही खत्म हो गईं।
🚨 मानचित्र उल्लंघन, सीलिंग, FIR और SIT का विधिक चक्रव्यूह
हादसे के तुरंत बाद जब स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिवारों का गुस्सा भड़का, तो राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित विधिक कदम उठाए:
- मानचित्र का खुला उल्लंघन: एलडीए की तकनीकी जांच में सामने आया कि मालिकों ने जो विधिक नक्शा स्वीकृत कराया था, धरातल पर निर्माण उसके बिल्कुल विपरीत (Unauthorized Structure) किया गया था। पूर्व में दिए गए नोटिसों का भी मालिकों ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया था।
- SIT जांच और सीलिंग: मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) की प्राथमिक विधिक रिपोर्ट के आधार पर इस पूरी इमारत को पहले ही प्रशासन द्वारा विधिक रूप से सील (Seal) किया जा चुका है।
- गैर-इरादतन हत्या की FIR: भवन मालिकों वीरेंद्र शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला और स्टूडियो संचालकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर व गैर-जमानती विधिक धाराओं के तहत मुकदमा (FIR) दर्ज कर विधिक जेल भेजा जा चुका है।
एलडीए द्वारा जारी यह विध्वंस आदेश इस बात का गवाह है कि अब कूटनीतिक या राजनीतिक दबाव काम नहीं आने वाला है और 15 युवाओं की मौत की जवाबदेही तय होकर रहेगी।










