मध्य प्रदेश: मॉब लिंचिंग मामले में उम्रकैद की सजा सुनाने वाली महिला जज को मिली जान से मारने की धमकी, FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में मॉब लिंचिंग केस में 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली एडीजे तबस्सुम खान को सोशल मीडिया पर मिली जान से मारने की धमकी। गृह मंत्रालय के साइबर सेल के इनपुट पर पुलिस ने दर्ज की FIR। पढ़ें पूरी रिपोर्ट PNN24 न्यूज़ पर।

तारिक आज़मी

नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम (पूर्व में होशंगाबाद) जिले से न्यायपालिका को डराने और सांप्रदायिक रंग देने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने जिला एवं सत्र न्यायालय की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) तबस्सुम खान को जान से मारने की धमकी देने और उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक टिप्पणियां करने के आरोप में दो अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

यह धमकियां और आपत्तिजनक पोस्ट जज तबस्सुम खान द्वारा हाल ही में कथित गो-तस्करी से जुड़े एक मॉब लिंचिंग मामले में 14 दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाए जाने के बाद सामने आई हैं।

सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दी ’10 दिन की चेतावनी’

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिवनी मालवा थाना पुलिस ने शनिवार को इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द बोलना या संकेत करना) और धारा 196 (विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना) के तहत केस दर्ज किया है।

सिवनी मालवा के थाना प्रभारी सुधाकर बरास्कर ने बताया:

“यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय के साइबर सेल द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत भेजे गए नोटिस के बाद की गई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक व्यक्ति धमकी दे रहा है कि यदि 14 दोषियों को 10 दिनों के भीतर रिहा नहीं किया गया तो हिंसा की जाएगी। वहीं, एक अन्य वीडियो में एक महिला ने जज की धार्मिक पहचान को लेकर सांप्रदायिक टिप्पणी की और अंजाम भुगतने की चेतावनी दी। पुलिस दोनों आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।”

कोर्ट परिसर में तनाव और पुतले फूंकने का वीडियो वायरल

यह पूरा विवाद 12 जून को आए एडीजे तबस्सुम खान के उस फैसले के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने साल 2022 के एक मॉब लिंचिंग मामले में 14 आरोपियों को हत्या, हत्या के प्रयास और दंगा भड़काने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फैसले के तुरंत बाद कोर्ट परिसर के बाहर दोषियों के परिजनों ने पुलिस वैन को रोकने की कोशिश की, जिससे तनाव बढ़ गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो और पोस्ट शेयर किए जाने लगे जिनमें जज पर धर्म के आधार पर फैसला सुनाने का मनगढ़ंत आरोप लगाया गया। कुछ जगहों पर जज के पुतले जलाए जाने के वीडियो भी सामने आए हैं, जिसकी कानूनी बिरादरी और बुद्धिजीवियों ने कड़ी निंदा की है।

क्या था 2022 का यह मॉब लिंचिंग मामला?

यह मामला 3 अगस्त 2022 का है। महाराष्ट्र के अमरावती में लगने वाले एक मेले के लिए एक ट्रक में 30 मवेशियों को ले जाया जा रहा था। सिवनी मालवा के बराखड़ गांव के पास स्वयंभू गोरक्षकों और स्थानीय ग्रामीणों की एक उग्र भीड़ ने इस ट्रक को रोक लिया। भीड़ ने ट्रक में सवार तीन लोगों पर लाठियों और लोहे की रॉड से बेरहमी से हमला कर दिया। इस हमले में नज़ीर अहमद नाम के व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

राजनीतिक गलियारों में गरमाया मुद्दा: सत्तापक्ष बनाम विपक्ष

न्यायिक अधिकारी को निशाना बनाए जाने के बाद इस पर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ हो गई है:

  • विपक्ष (कांग्रेस): कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “आमतौर पर नफरत फैलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन आज वे खुलेआम घूम रहे हैं। साइबर सेल सिर्फ नोटिस भेज रहा है। इस मामले में सभी दोषी हिंदू पुरुष हैं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें उनके धर्म के कारण नहीं, बल्कि जांच में हत्या और दंगे का दोषी पाए जाने पर सजा सुनाई है।”
  • सत्तापक्ष (भाजपा): वहीं पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने कहा, “मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज कर ली है। कानून से खिलवाड़ करने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

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