मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: कामजोंग जिले में उपद्रवियों ने फूंके कई घर, ग्रामीणों ने असम राइफल्स कैंप में ली शरण

मणिपुर के कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास फाइमोल कुकी गांव में उपद्रवियों ने 15 से अधिक घरों को आग के हवाले किया। कुकी और तंगखुल नागा समुदाय के बीच बढ़े तनाव के बाद ग्रामीणों ने असम राइफल्स कैंप में ली शरण। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट PNN24 न्यूज़ पर।

आफताब फारुकी

इम्फाल: मणिपुर में शांति बहाली की तमाम कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा की बड़ी वारदात सामने आई है। बुधवार को कामजोंग जिले के ‘फाइमोल कुकी’ गांव में अज्ञात उपद्रवियों ने धावा बोलकर ग्रामीणों के घरों को आग के हवाले कर दिया। इस घटना में कम से कम 15 घर पूरी तरह जलकर राख हो गए हैं।

कामजोंग जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) थोलू रॉकी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह वारदात बुधवार दोपहर करीब 12:30 बजे की है।

भारत-म्यांमार सीमा के पास भारी तनाव

पुलिस के मुताबिक, जिस गांव में यह आगजनी हुई है, वह चस्साड पुलिस स्टेशन से लगभग 45 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में भारत-म्यांमार सीमा (बॉर्डर पिलर नंबर 113) के बेहद करीब स्थित है।

SP थोलू रॉकी ने बताया:

“इस घटना में बर्मी (म्यांमार) शरणार्थियों के कुछ छोटे फूस के घर और तंगखुल समुदाय के कुछ घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के हताहत या घायल होने की कोई खबर नहीं है।”

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने सुरक्षाबलों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बदले की कार्रवाई को सुरक्षाबलों ने किया नाकाम

फाइमोल गांव में हुई आगजनी के बाद इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस द्वारा जारी एक लिखित बयान के अनुसार, इस घटना के बदले के रूप में दोपहर करीब 2 बजे कुछ हथियारबंद बदमाशों ने ‘शंखलोक तंगखुल नागा’ गांव को भी फूंकने की कोशिश की। यह गांव बॉर्डर पिलर नंबर 101 के पास स्थित है। हालांकि, मौके पर तैनात सुरक्षाबलों की मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई के चलते उपद्रवी अपने मंसूबों में नाकाम रहे और एक बड़ी घटना टल गई।

ग्रामीणों का पलायन, असम राइफल्स के कैंप में ली शरण

इस ताज़ा हिंसा और तनावपूर्ण माहौल के कारण फाइमोल गांव के लोगों में डर का माहौल है। ग्रामीणों ने सुरक्षा की खातिर अपने घरों को छोड़ना शुरू कर दिया है। गांव के अधिकांश परिवारों ने अस्थायी रूप से 11वीं असम राइफल्स के कैंप के पास शरण ली हुई है।

दुर्गम क्षेत्र और विदेशी उग्रवादियों की सक्रियता

कामजोंग जिले के फुंगयार विधानसभा क्षेत्र के विधायक लिएशियो कीसिंग ने स्थानीय मीडिया को बताया कि यह हिंसा प्रभावित क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। यह इलाका उन क्षेत्रों से सटा हुआ है जहां केएनए-बी (KNA-B) और म्यांमार के उग्रवादी संगठन पीपुल्स डिफेंस फोर्स (PDF) के कैडर सक्रिय हैं। भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहां सूचनाओं का आदान-प्रदान और राज्य सुरक्षा बलों की आवाजाही काफी चुनौतीपूर्ण है।

कुकी-मैतेई के बाद अब कुकी-नागा संघर्ष

मणिपुर में पिछले तीन साल से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच जारी जातीय हिंसा पूरी तरह थमी भी नहीं थी कि अब कुकी और तंगखुल नागा समुदाय के बीच भी झड़पें शुरू हो गई हैं। फरवरी महीने से शुरू हुए इस नए विवाद में पिछले 5 महीनों के भीतर दोनों समुदायों के 20 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिससे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है।

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