मानसून सत्र में आ सकता है बड़ा राजनीतिक बदलाव: 30 दिन जेल में रहने पर जाएगी PM-CM और मंत्रियों की कुर्सी, सरकार ला रही है बिल
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से हो सकता है शुरू। मोदी सरकार लाने जा रही है ऐतिहासिक 130वां संविधान संशोधन विधेयक, जिसके तहत 30 दिन जेल में बिताने पर जाएगी PM, CM और मंत्रियों की कुर्सी। विपक्ष के भारी विरोध के बीच JPC सौंपेगी रिपोर्ट। पढ़ें PNN24 न्यूज़ पर।

फारुख हुसैन
नई दिल्ली: संसद का आगामी मानसून सत्र इस बार बेहद हंगामेदार होने के आसार हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। इस सत्र के दौरान केंद्र सरकार एक ऐसा ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील विधेयक (Bill) दोबारा पेश करने की तैयारी में है, जो देश की राजनीति की दशा और दिशा बदल सकता है। इस कानून के तहत अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर अपराधों के मामले में 30 दिन से अधिक समय तक जेल में रहता है, तो उसे अपने पद से हाथ धोना पड़ेगा।

अमित शाह ने पेश किया था बिल, JPC के पास भेजी गई थी रिपोर्ट
बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले साल 21 अगस्त को इस ऐतिहासिक विधेयक को संसद के पटल पर रखा था। इसके बाद बिल की बारीकियों और संवैधानिक पहलुओं की जांच के लिए इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया था।
विपक्षी गठबंधन (INDIA Alliance) के कई दलों ने इस जेपीसी के गठन और इसके तौर-तरीकों का कड़ा विरोध किया था। अब जेपीसी की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने साफ संकेत दिए हैं कि इस मानसून सत्र में यह महत्वपूर्ण बिल संसद में चर्चा और पास कराने के लिए पेश किया जाएगा।
सबसे विवादित हिस्से को बरकरार रखने की तैयारी
ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) ने इस 130वें संविधान संशोधन विधेयक के हर एक पहलू पर बेहद गहराई से विचार-विमर्श किया है। सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर आ रही है कि:
- 17 जुलाई को रिपोर्ट: जेपीसी 17 जुलाई को इस बिल से संबंधित अपनी अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर सकती है।
- विवादित क्लॉज रहेगा बरकरार: सूत्रों के मुताबिक, इस बिल के जिस हिस्से पर सबसे ज्यादा बवाल मचा था, जेपीसी उसे अपनी रिपोर्ट में बरकरार रख सकती है। यानी गंभीर आरोपों में 30 दिन से ज्यादा जेल में रहने पर पद गंवाने का सख्त प्रावधान वैसा ही रहेगा।
क्यों भड़का हुआ है विपक्ष? जानिए तर्क
विपक्षी दलों ने इस कानून के इसी 30 दिन वाले प्रावधान का सबसे तीखा विरोध किया है। विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि किसी भी नेता या लोकसेवक पर आरोप लगने या जांच के दौरान जेल जाने का मतलब यह नहीं है कि वह दोषी है।
विपक्ष के नेताओं का कहना है:
“अदालत द्वारा दोषी सिद्ध होने (Conviction) से पहले ही महज़ 30 दिन जेल में रहने के आधार पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री को पद से हटा दिया जाना पूरी तरह से गैर-न्यायसंगत है। इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक द्वेष और विपक्ष के मुख्यमंत्रियों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।”
बहरहाल, 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे इस मानसून सत्र में अगर सरकार इस बिल को टेबल करती है, तो सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच एक बार फिर जोरदार सियासी घमासान देखने को मिलेगा।
बता दें कि दिल्ली सरकार की शराब नीति मामले में जब अरविंद केजरीवाल जेल गए थे तो उन्होंने पद से इस्तीफा नहीं दिया था. काफी समय तक उन्होंने जेल में रहते हुए ही सरकार चलाई थी और कार्यकारी सीएम आतिशी को बनाया गया था. इसे लेकर बीजेपी ने कड़ा विरोध दर्ज किया था. इसके बाद पिछले साल जब यह बिल लाया गया तो विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया था. इसके बाद इसे जेपीसी के पास भेजा गया था. हालांकि, ऐसा लग रहा है कि ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी ने विपक्षी दलों की आपत्तियों को दरकिनार कर दिया है. मानसून सत्र में कई और अहम बिल भी पेश होने की उम्मीद की जा रही है. इसके अलावा, टीएमसी में टूट और शिवसेना (UBT) सांसदों के पाला बदलने के बाद संख्या बल में भी परिवर्तन देखने को मिलेगा.










