राजस्थान में बड़ा मेडिकल स्कैम: विदेश से MBBS कर लौटे 3 फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, 25 लाख देकर बनवाया FMGE सर्टिफिकेट
राजस्थान में सरकारी व्यवस्था और मेडिकल सिस्टम में सेंध लगाने वाले एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने तीन ऐसे फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है, जो विदेशों से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे थे, लेकिन यहां की अनिवार्य परीक्षा पास किए बिना ही फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप कर रहे थे।

शफी उस्मानी
जयपुर: राजस्थान में सरकारी व्यवस्था और मेडिकल सिस्टम में सेंध लगाने वाले एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने तीन ऐसे फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है, जो विदेशों से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे थे, लेकिन यहां की अनिवार्य परीक्षा पास किए बिना ही फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप कर रहे थे। कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 4 जुलाई 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
बिना परीक्षा पास किए बने ‘डॉक्टर’, दलालों को दी 25 लाख की रिश्वत
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान नवदीप तम्बोलिया, चिराग साहू और आफरीदी खान के रूप में हुई है। एडीजी (SOG) विशाल बंसल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके आने वाले छात्रों के लिए भारत में प्रैक्टिस या इंटर्नशिप करने से पहले ‘फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन’ (FMGE) स्क्रीनिंग टेस्ट पास करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
जांच में सामने आया है कि ये तीनों आरोपी कई प्रयासों के बाद भी इस परीक्षा को पास नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद इन्होंने शॉर्टकट अपनाया और परीक्षा माफिया व दलालों से संपर्क किया। आरोपियों ने करीब 23.5 से 25 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत देकर FMGE के फर्जी पासिंग सर्टिफिकेट तैयार करवाए।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कर डाली इंटर्नशिप
हैरान करने वाली बात यह है कि इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में अपना रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया। इतना ही नहीं, सिस्टम की लापरवाही का फायदा उठाते हुए तीनों आरोपियों ने राजकीय मेडिकल कॉलेज दौसा, पैसिफिक मेडिकल कॉलेज उदयपुर और राजकीय मेडिकल कॉलेज अलवर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी इंटर्नशिप भी पूरी कर ली। इस खुलासे ने पूरे मेडिकल सिस्टम की सुरक्षा और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दलालों का नेटवर्क और राजस्थान मेडिकल काउंसिल की मिलीभगत
SOG इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इस खेल के मुख्य किरदार भानाराम माली, शुभम गुर्जर और इन्द्रराज गुर्जर हैं, जो विदेश से लौटने वाले छात्रों को फर्जी सर्टिफिकेट मुहैया कराने और मेडिकल काउंसिल में सेटिंग कर रजिस्ट्रेशन कराने का काम करते थे।
इस मामले में अब तक गिरफ्तार होने वाले आरोपियों की संख्या 28 तक पहुंच चुकी है। SOG इससे पहले 17 अन्य फर्जी विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट डॉक्टरों सहित राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर और एलडीसी फरहान हसन को भी दबोच चुकी है। साफ है कि इस खेल में विभाग के अंदर बैठे अधिकारियों की भी बड़ी मिलीभगत थी।
SOG अब आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क के तार और कहां-कहां जुड़े हैं और अब तक ऐसे कितने फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा चुका है।











