‘श्रीगंगानगर में इंसानियत शर्मसार: 12 साल की मासूम को 4 दिन बंधक बनाकर 25 दरिंदों ने किया सामूहिक दुष्कर्म; 18 गिरफ्तार, गुनाहगारों के 3 होटलों पर चला बुलडोज़र’
राजस्थान के श्रीगंगानगर में 12 साल की मासूम से दरिंदगी की रूह कंपा देने वाली वारदात। सोशल मीडिया फ्रेंड से मिलने गई बच्ची को रिक्शा चालक ने होटल पहुँचाया; 4 दिनों तक बंधक बनाकर 20-25 दरिंदों ने किया सामूहिक दुष्कर्म। पुलिस ने 18 आरोपियों को किया गिरफ्तार, 3 होटलों पर चला प्रशासन का बुलडोजर। पढ़ें PNN24 की विशेष खोजी रिपोर्ट।

तारिक खान
श्रीगंगानगर (PNN24 News): राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली और घिनौनी वारदात सामने आई है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। यहाँ एक महज 12 वर्ष की मासूम बच्ची को चार दिनों तक बंधक बनाकर अलग-अलग होटलों में सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) का शिकार बनाया गया और उससे जबरन देह व्यापार करवाया गया। इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ जहां स्थानीय जनता का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है, वहीं पुलिस ने इस संगठित सिंडिकेट के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी विधिक कार्रवाई करते हुए 18 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
📱 इंस्टाग्राम की दोस्ती से शुरू हुआ ‘खौफ का सफर’
इस पूरे मामले की विधिक जांच कर रहे जांच अधिकारी और एडिशनल एसपी कैलाश दान ने वारदात की सिलसिलेवार क्रोनोलॉजी साझा की है। उन्होंने बताया कि पीड़ित बच्ची की इंस्टाग्राम (Instagram) पर एक लड़का दोस्त बना था।
- 18 जून की रात: मासूम बच्ची अपने उसी सोशल मीडिया फ्रेंड से मिलने के लिए 18 जून 2026 को श्रीगंगानगर से करीब 100 किलोमीटर दूर विजयनगर गई थी। वहाँ उस कथित दोस्त ने धोखे से उसके साथ पहली बार दुष्कर्म किया।
- बस स्टैंड से रिक्शा चालक की दरिंदगी: विजयनगर से किसी तरह बचकर बच्ची उसी रात बस द्वारा वापस श्रीगंगानगर बस स्टैंड पहुँची। यहाँ से उसने घर जाने के लिए एक ऑटो-रिक्शा किया। लेकिन रिक्शा चालक उसे घर छोड़ने के बजाय बहला-फुसलाकर शहर के एक होटल में ले गया। वह रिक्शावाला खुद भी रातभर होटल में रुका और उसने बच्ची के साथ दरिंदगी की।
🏨 3 होटलों में बंधक और 20 से 25 लोगों द्वारा हैवानियत
महिला पुलिस थाना प्रभारी कलावती चौधरी के अनुसार, पीड़ित बच्ची ने अपने विधिक बयानों में जो आपबीती सुनाई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। बच्ची को मुख्य रूप से एक होटल में बंधक बनाकर रखा गया, जहाँ उसके साथ सबसे ज़्यादा बार सामूहिक दुष्कर्म हुआ। इसके बाद उसे दो अन्य होटलों में भी ले जाया गया। बच्ची के मुताबिक, 4 दिनों के भीतर करीब 20 से 25 लोगों ने उसके साथ हैवानियत की हदें पार कीं।
🚔 पुलिस की मुस्तैदी और त्वरित विधिक कार्रवाई
इधर, बच्ची के घर न पहुँचने पर उसकी माँ लगातार उसे तलाश रही थी। जब २२ जून तक कोई सुराग नहीं मिला, तो वह सदर थाने पहुँची। सदर थाना प्रभारी सुभाष चंद्रा ने बताया कि माँ के थाने पहुँचने से पहले ही मुखबिरों और तकनीकी सर्विलांस के जरिए पुलिस को घटना की भनक लग चुकी थी। पुलिस ने तुरंत दबिश देकर बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू किया और मौके से कई अभियुक्तों को हिरासत में ले लिया।
चूंकि मामला नाबालिग से जुड़ा था, इसलिए तत्काल महिला थाना प्रभारी और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के सदस्यों को बुलाया गया। महिला विधिक थाने में आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act), जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act), देह व्यापार निवारण अधिनियम और सामूहिक दुष्कर्म की संगीन धाराओं के तहत एफ़आईआर (FIR) दर्ज की गई है।
🏗️ दरिंदों के ठिकानों पर चला जिला प्रशासन का बुलडोज़र
मामले की संवेदनशीलता और जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक (SP) हरिशंकर ने बताया:
“इस जघन्य मामले की विधिक जांच लगभग अंतिम चरण में है। हमने अब तक 18 बालिग अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें लड़की का सोशल मीडिया फ्रेंड और वो रिक्शा चालक भी शामिल हैं। कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद अब सभी आरोपी ज्यूडिशियल कस्टडी में जेल में हैं।”
एसपी ने आगे बताया कि होटलों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगाला जा रहा है और जल्द ही इस घिनौने अपराध में शामिल 3 से 4 अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी। वहीं, कड़ा विधिक संदेश देने के लिए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन तीनों होटलों को पूरी तरह जमींदोज (Demolish) कर दिया है, जहाँ मासूम के साथ यह घिनौना कृत्य किया गया था।
🩺 बच्ची की हालत और चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता
पीड़ित बच्ची का विधिक मेडिकल परीक्षण और कोर्ट में धारा 164 के तहत बयान दर्ज करा दिए गए हैं। पुलिस ने बच्ची से आरोपियों की शिनाख्त (Identification) भी करवा ली है और वर्तमान में बच्ची को उसके माता-पिता के संरक्षण में घर भेज दिया गया है।
इस प्रकार के गहरे मानसिक आघात (Trauma) पर चिंता व्यक्त करते हुए दिल्ली एम्स (AIIMS, Delhi) के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. गणेश मीणा बताते हैं:
“जब कोई भी नाबालिग ऐसे भयानक विधिक और शारीरिक शोषण से गुजरता है, तो वह पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिऑर्डर (PTSD) का शिकार हो जाता है। पीटीएसडी में बच्चे का आत्मविश्वास पूरी तरह खत्म हो जाता है। वह अपनों पर भी भरोसा करना बंद कर देता है, खामोश और गुमसुम रहता है, और समाज व बाहरी लोगों से भय खाने लगता है। वह बार-बार उस डरावनी घटना को याद कर सहम जाता है, जिससे उसका पूरा भविष्य अंधकारमय हो सकता है।”
डॉ. मीणा ने इसके विधिक व चिकित्सकीय समाधान के रूप में बताया कि ऐसे बच्चों को तुरंत और लंबे समय तक किसी अच्छे साइकियाट्रिस्ट (Psychiatrist) की देखरेख में रखा जाना चाहिए। इसके लिए विशेष थेरेपी, दवाओं और परिवार के अत्यधिक संवेदात्मक विधिक सहयोग की आवश्यकता होती है, क्योंकि इस दौर में बच्चों के मन में कई नकारात्मक और आत्मघाती विचार आ सकते हैं।
श्रीगंगानगर की जनता और सामाजिक संगठन लगातार कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। PNN24 News मांग करता है कि इस मामले की विधिक सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में चलाकर सभी नरपिशाचों को जल्द से जल्द फांसी या कठोरतम विधिक सजा दी जाए।










