‘धार भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; हाई कोर्ट के आदेश पर एमपी सरकार को नोटिस, शुक्रवार की नमाज़ के लिए परिसर के पास अलग जगह देने का निर्देश!’
धार भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम: एमपी हाई कोर्ट के 'सरस्वती मंदिर' वाले फैसले पर राज्य सरकार को नोटिस जारी। कोर्ट ने यथास्थिति बहाल करने की मुस्लिम पक्ष की मांग ठुकराई, लेकिन शुक्रवार की नमाज़ के लिए परिसर से सटे खुले मैदान में दोपहर 1 से 3 बजे तक अस्थायी जगह देने का विधिक निर्देश। पढ़ें PNN24 की सुप्रीम कोर्ट से विशेष रिपोर्ट।

मो0 सलीम
PNN24 News): देश के सबसे चर्चित और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों से जुड़े कानूनी विवादों में से एक— मध्य प्रदेश के धार जिले का ‘भोजशाला-कमाल मौला परिसर’ मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पूरी तरह गरमा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की विशेष अनुमति याचिकाओं (SLPs) पर संज्ञान लेते हुए राज्य की बीजेपी सरकार को विधिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का रुख: “ऐसा कोई आदेश नहीं देंगे जिससे तनाव पैदा हो”
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति (सीजेआई) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेहद नपी-तुली और कूटनीतिक विधिक टिप्पणी की। लाइव लॉ (Live Law) की विधिक रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का उद्देश्य सामाजिक समरसता बनाए रखना है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा:
“हमें इस संवेदनशील मोड़ पर ऐसा कोई भी अंतरिम आदेश पारित नहीं करना चाहिए, जिससे समाज में या जमीनी स्तर पर किसी भी प्रकार का तनाव अथवा असमंजस पैदा हो।”
इसी विधिक सोच के तहत, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ताओं (मुस्लिम पक्ष) के उस अंतरिम अनुरोध को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश पर पूर्ण स्थगन (Stay) लगाते हुए परिसर में पहले की तरह ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बहाल करने की मांग की थी। मुस्लिम पक्ष की मांग थी कि उन्हें निर्धारित दिनों में हिंदू पूजा के समानांतर ही शुक्रवार को परिसर के भीतर नमाज़ अदा करने की विधिक अनुमति दी जाए।
🕌 शुक्रवार की नमाज़ के लिए निकाला ‘अस्थायी विधिक फॉर्मूला’
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष के पूजा/इबादत के अधिकार और शांति व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने के लिए एक बड़ा मध्यस्थतापूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किया है:
- सटे हुए खुले स्थान का आवंटन: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को कड़ा निर्देश दिया है कि वे भोजशाला-कमाल मौला परिसर से ठीक सटे हुए एक अलग खुले स्थान (Open Space) को चिन्हित करें।
- समय सीमा तय: इस चिन्हित स्थान पर मुस्लिम समुदाय के लोगों को प्रत्येक शुक्रवार को दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे के बीच सामूहिक नमाज़ अदा करने की सुरक्षित जगह उपलब्ध कराई जाए।
- पूरी तरह अस्थायी व्यवस्था: अदालत ने अपने विधिक आदेश में पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यह व्यवस्था केवल एक अंतरिम और पूर्णतः अस्थायी (Temporary) कदम है, जब तक कि इस मामले में अंतिम विधिक फैसला नहीं आ जाता।
🔍 क्या था मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला?
यह पूरा विवाद तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों (ASI Survey) के आधार पर धार की भोजशाला को देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित एक विधिक मंदिर घोषित कर दिया था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में परिसर के भीतर मुस्लिम पक्ष द्वारा नमाज़ अदा किए जाने पर पूरी तरह से विधिक रोक लगा दी थी, जिसके खिलाफ जमीयत और स्थानीय कमाल मौला मस्जिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
PNN24 News देश की सर्वोच्च अदालत में चल रही इस बेहद संवेदनशील ऐतिहासिक-धार्मिक कानूनी लड़ाई, एएसआई की रिपोर्ट और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले आगामी विधिक जवाब पर अपनी पैनी नज़र बनाए रखेगा।











