‘दिल्ली दंगों का सबसे बड़ा विधिक फैसला: IB कर्मी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या में पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार; शव पर मिले थे 51 जख्म!’

साल 2020 के दिल्ली दंगों के सबसे बड़े मामले में आया ऐतिहासिक विधिक फैसला। आईबी कर्मी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या के मामले में कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच अभियुक्तों को ठहराया दोषी, छह लोग बरी। सुप्रीम कोर्ट के 6 महीने के समय विधिक आदेश के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट का आया फैसला। पढ़ें PNN24 की विशेष अदालती रिपोर्ट।

शफी उस्मानी

नई दिल्ली (PNN24 News): उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान देश को झकझोर देने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के जांबाज कर्मचारी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या के मामले में दिल्ली की एक सत्र अदालत (Sessions Court) ने सोमवार, 13 जुलाई 2026 को अपना ऐतिहासिक विधिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच अभियुक्तों को हत्या और दंगों का दोषी ठहराया है, जबकि पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में छह अन्य नामजद आरोपियों को बरी कर दिया गया है।

अंकित शर्मा के शरीर पर 51 गहरे घाव देने वाले इस बर्बर हत्याकांड में आए इस विधिक फैसले से पीड़ित परिवार को 6 साल बाद इंसाफ की पहली उम्मीद जगी है।

⚖️ कड़कड़डूमा कोर्ट का विधिक फैसला और सुप्रीम कोर्ट की समय-सीमा

यह ऐतिहासिक अदालती आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनवरी 2025 में दिए गए एक कड़े विधिक निर्देश के बाद आया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट को छह महीने के भीतर इस मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने का आदेश दिया था।

अदालत के फैसले के मुख्य विधिक बिंदु इस प्रकार हैं:

  • दोषी करार: अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या (धारा 302), दंगा भड़काने, और दो समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाने की विभिन्न संगीन धाराओं में दोषी माना है। हालांकि, उन्हें आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) के आरोप से बरी कर दिया गया है।
  • बचे हुए अभियुक्त: इस मामले में कुल 11 नामजद आरोपी थे, जिनमें से अदालत ने ताहिर हुसैन समेत 5 को दोषी ठहराया और शेष 6 को बरी कर दिया। दोषियों की सजा के कड़े विधिक ऐलान की तारीख जल्द घोषित की जाएगी।

🕯️ “हमें घर छोड़ना पड़ा, अब फांसी की उम्मीद”— पीड़ित परिवार का दर्द

अदालत के फैसले के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर के बाहर भावुक होते हुए अंकित शर्मा के बड़े भाई अंकुर शर्मा ने कहा:

“हम माननीय अदालत के इस फैसले से संतुष्ट हैं। हमारे भाई को तड़पा-तड़पाकर मारा गया था, इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि दोषियों को कानूनन फांसी की सजा दी जाएगी। अंकित की मौत के बाद खौफ के कारण हमें अपना पुश्तैनी घर छोड़ना पड़ा, अब हम गाजियाबाद में किराए के मकान में रहकर सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं। इस फैसले से न्याय प्रणाली में हमारा भरोसा और मजबूत हुआ है।”

22 साल की छोटी सी उम्र में देश की खुफिया एजेंसी आईबी में भर्ती होने वाले अंकित अपने परिवार के रीढ़ थे और गृह मंत्री अमित शाह ने भी उनकी शहादत पर विशेष पत्र लिखकर उन्हें एक बहादुर और कर्तव्यनिष्ठ कर्मी बताया था।

🔍 घटनाक्रम की क्रोनोलॉजी: 25 फरवरी 2020 की वह काली शाम

अदालत में पेश की गई दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच एसआईटी (SIT) की चार्जशीट और गवाहों के बयानों के आधार पर इस जघन्य हत्याकांड का क्रोनोलॉजी विश्लेषण नीचे दिया गया है:

  1. छत से गोलीबारी व पथराव: 25 फरवरी 2020 को दयालपुर थाने की जनरल डायरी (GD) प्रविष्टि संख्या 163A के अनुसार, शाम करीब 4:00 बजे ताहिर हुसैन के घर की छत से उग्र भीड़ द्वारा भारी पथराव और गोलीबारी की जा रही थी।
  2. अंकित शर्मा का लापता होना: उसी शाम लगभग 5:00 बजे अंकित शर्मा ड्यूटी से लौटने के बाद घर का कुछ जरूरी सामान लेने बाहर निकले।
  3. भीड़ का हमला व हत्या: चांद बाग पुलिया के पास उग्र हिंसक भीड़ ने अंकित को दबोच लिया। अभियोजन पक्ष के तीन चश्मदीद गवाहों ने गवाही दी कि ताहिर हुसैन स्वयं छत पर खड़े होकर भीड़ को उकसा रहे थे। भीड़ अंकित को घसीटकर ले गई और चाकुओं व धारदार हथियारों से गोदकर उनकी हत्या कर दी।
  4. नाले से क्षत-विक्षत शव की बरामदगी: अगले दिन यानी 26 फरवरी 2020 को खजूरी खास नाले से अंकित का निर्वस्त्र और लहूलुहान शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके पूरे शरीर पर 51 गहरे घाव पाए गए।

🛑 ताहिर हुसैन का विधिक इतिहास और राजनीतिक सफर

दंगों में नाम आने के बाद आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। वह मार्च 2020 से ही न्यायिक हिरासत में बंद हैं।

  • 12 प्राथमिकियों में नाम: ताहिर हुसैन पर दिल्ली दंगों से जुड़े कुल 12 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से 9 मामलों में उन्हें पूर्व में जमानत मिल चुकी थी। लेकिन अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली हाई कोर्ट ने सितंबर 2025 में उनकी नियमित जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत साफ दर्शाते हैं कि ताहिर की भूमिका दंगे भड़काने में अत्यंत सक्रिय और पूर्व-नियोजित थी।
  • चुनावी जमानत: केवल जनवरी 2025 में विधानसभा चुनाव लड़ने के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चुनाव प्रचार के लिए कुछ दिनों की सशर्त अंतरिम जमानत दी थी, जिसके बाद वे वापस तिहाड़ जेल लौट गए थे।

यद्यपि ताहिर हुसैन के वकीलों ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित मामला बताते हुए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर विधिक सवाल उठाए थे, लेकिन अदालत ने उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। PNN24 News देश के इस सबसे चर्चित दंगों के मुकदमे में दोषियों को मिलने वाली अंतिम सजा की अवधि और अदालत के पूर्ण लिखित विधिक आदेश की विस्तृत व्याख्या आप तक निष्पक्षता से पहुंचाता रहेगा।

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