‘मिडल ईस्ट में “न युद्ध, न शांति”: ट्रंप बोले— “ईरान के साथ हुआ समझौता दुनिया से अलग”; पर्दे के पीछे मध्यस्थ सक्रिय, क्या होने जा रहा है नया सौदा?’
"यह युद्धविराम दुनिया के दूसरे हिस्सों से बहुत अलग है"— अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने मिडल ईस्ट में 'न युद्ध, न शांति' की स्थिति को उजागर कर दिया है। अस्पष्ट भाषा में लिखे गए समझौते को लेकर अमेरिका और ईरान अपनी-अपनी व्याख्या कर रहे हैं, वहीं पर्दे के पीछे नए समझौते की खिचड़ी पक रही है। पढ़ें PNN24 की विशेष अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रिपोर्ट।

तारिक खान
PNN24 News: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुआ नाजुक युद्धविराम इस वक्त अपने सबसे कड़े इम्तिहान के दौर से गुजर रहा है। दोनों महाशक्तियों के बीच युद्ध भले ही थम गया हो, लेकिन जमीन पर तनाव जस का तस बना हुआ है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को लेकर एक बड़ा और दिलचस्प बयान दिया है। ट्रंप ने हाल ही में हुए इस नाजुक अंतरिम समझौते के बारे में कहा, “यह युद्धविराम दुनिया के दूसरे हिस्सों में हुए युद्धविरामों से बहुत अलग है।” राष्ट्रपति के इस बयान ने साफ कर दिया है कि मिडल ईस्ट में शांति की जो चादर ओढ़ाई गई है, उसके नीचे बारूद की गंध अभी भी बाकी है।
📜 एक छोटा, अस्पष्ट समझौता और ‘न युद्ध, न शांति’ के हालात
वैश्विक मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र को फिलहाल ‘न युद्ध, न शांति’ (Neither War, Nor Peace) जैसी अनिश्चित स्थिति के साथ ही जीना होगा। इस असमंजस की सबसे बड़ी वजह वह समझौता खुद है, जिसे बेहद छोटा और अस्पष्ट भाषा (Vague Language) में लिखा गया है। स्पष्टता न होने के कारण दोनों पक्ष इसकी शर्तों को अपने-अपने तरीके से समझ रहे हैं और दुनिया के सामने अपनी सहूलियत के हिसाब से इसकी व्याख्या (Interpretation) कर रहे हैं।
🌊 ‘होर्मुज़ स्ट्रेट’ पर दोनों देशों के अपने-अपने दावे
इस समझौते के बाद सबसे बड़ा टकराव समुद्री व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते ‘होर्मुज़ स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को लेकर खड़ा हो गया है:
- ईरान का रुख: ईरान का विधिक और रणनीतिक तौर पर मानना है कि इस समझौते के तहत उसे होर्मुज़ स्ट्रेट के मैनेजमेंट में मुख्य भूमिका मिली है। तेहरान का दावा है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल और सैन्य जहाजों को उन्हीं मार्गों का पालन करना चाहिए, जिन्हें ईरान तय करेगा।
- अमेरिका का दावा: इसके ठीक उलट वाशिंगटन का कहना है कि इस समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत समुद्री यातायात की आजादी (Freedom of Navigation) पूरी तरह बहाल हो गई है। अमेरिका के मुताबिक, अब इस रूट से जहाजों की आवाजाही पहले की तरह सामान्य रूप से हो सकती है और इस पर किसी एक देश का एकाधिकार नहीं होगा।
🥊 पूर्ण युद्ध से तौबा, लेकिन बैकअप प्लान तैयार
राहत की बात सिर्फ इतनी है कि अमेरिका और ईरान, दोनों ही पक्ष इस मोड़ पर एक पूर्ण और विनाशकारी युद्ध (Full-scale War) में लौटना नहीं चाहते। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वे पीछे हट रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों ही देश किसी भी समय जवाबी कार्रवाई (Retaliation) करने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे हैं।
इस तनाव को हवा देने में दोनों देशों के भीतर सक्रिय कट्टरपंथी और युद्ध समर्थक समूह (Hardliners) भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। ईरान और अमेरिका, दोनों जगह ये आंतरिक समूह अपनी-अपनी सरकारों पर लगातार दबाव बना रहे हैं कि वे झुकें नहीं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
🕵️♂️ “समझौते के लिए बेताब हैं ट्रंप”— पर्दे के पीछे सक्रिय हुए मध्यस्थ!
तनाव और बयानों के इस भारी माहौल के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपना पुराना कूटनीतिक दांव खेलते हुए कहा है कि “वे किसी समझौते के लिए बेताब हैं।” ट्रंप का यह सीधा इशारा ईरान की तरफ था।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के मुताबिक, ट्रंप का यह बयान महज एक सामान्य टिप्पणी नहीं है। कूटनीति की भाषा में आमतौर पर ऐसे बयानों को इस बात का पुख्ता संकेत माना जाता है कि पर्दे के पीछे (Behind the Scenes) दोनों देशों के बीच कोई न कोई तीसरा मध्यस्थ (Mediator) जैसे ओमान या कतर बेहद सक्रिय हो चुके हैं। ये मध्यस्थ दोनों धुर विरोधियों के बीच किसी नए और अधिक स्पष्ट समझौते या सीधी बातचीत का रास्ता निकालने की गुप्त कोशिशों में जुट गए हैं।











