‘यूपी कॉलेज घोटाला: शिवपुर पुलिस को कोर्ट की कड़ी फटकार; क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर “अग्रिम विवेचना” का बड़ा विधिक आदेश!’
यूपी कॉलेज बंदोबस्ती ट्रस्ट घोटाला मामले में वाराणसी कोर्ट का ऐतिहासिक रुख! सिविल जज तरुण कुमार सिंह ने शिवपुर पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को किया खारिज, इंडियन बैंक कर्मियों के खिलाफ 'अग्रिम विवेचना' के दिए विधिक आदेश। वरिष्ठ अधिवक्ता शिशिर सिंह की दलील— "कातिल की दलील मुंसफ ने मान ली..."। पढ़ें PNN24 की विशेष अदालती ग्राउंड रिपोर्ट।

महविश कुरैशी
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी के गौरवशाली इतिहास से जुड़े उदय प्रताप कॉलेज (UP College) के ‘एंडोमेंट ट्रस्ट’ के पैसों में हुई कथित धोखाधड़ी का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। वाराणसी की सिविल जज (जू.डि.)/न्यायिक मजिस्ट्रेट (14वें वित्त आयोग) तरुण कुमार सिंह की अदालत ने शिवपुर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर विधिक सवाल उठाते हुए उनकी अंतिम रिपोर्ट (Final Report) को निरस्त कर दिया है। अदालत ने वादी मुकदमा की प्रोटेस्ट पिटीशन को स्वीकार करते हुए इंडियन बैंक के मैनेजर व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ फिर से गहनता से जांच (Further Investigation) करने का विधिक आदेश पारित किया है।

🏦 क्या है पूरा मामला? (ट्रस्ट के खाते से ब्याज का अवैध आहरण)
यह पूरा विधिक विवाद ‘उदय प्रताप कॉलेज एंड हीवेट क्षत्रिय स्कूल एंडोमेंट ट्रस्ट’ के एक बैंक खाते से जुड़ा हुआ है, जो इंडियन बैंक की स्थानीय शाखा में संचालित है।
- अवैध आहरण का आरोप: आरोप है कि इस ट्रस्ट के खाते में जमा भारी-भरकम राशि पर मिलने वाले ब्याज का अवैध रूप से आहरण ‘उदय प्रताप शिक्षा समिति’ द्वारा किया जाता रहा है।
- बैंक कर्मियों की कथित संलिप्तता: इस वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने में इंडियन बैंक के तत्कालीन प्रबंधकों और कर्मियों की भी कथित तौर पर मिलीभगत थी।
- दर्ज मुकदमा: इस कथित घोटाले को लेकर ट्रस्ट के सचिव आनंद विजय सिंह ने वर्ष 2021 में शिवपुर थाने में FIR संख्या 459/2021 दर्ज कराई थी। यह एफआईआर भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं 406 (विश्वासघात), 409 (सरकारी कर्मचारी या बैंकर द्वारा विश्वासघात), 419 (पहचान छिपाकर धोखाधड़ी) और 420 (जालसाजी) के तहत पंजीकृत की गई थी।
📂 4 साल तक धूल फांकती रही फाइल, वकील की जिरह पर झुकी पुलिस
मामले की मैराथन जांच के नाम पर शिवपुर थाने के विवेचक ने करीब 4 साल का लंबा समय लिया। इसके बाद 8 जनवरी 2024 को महज बैंक मैनेजर के एकतरफा बचाव वाले बयानों को आधार बनाकर मामले में अंतिम रिपोर्ट (Final Report) लगा दी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि यह अंतिम रिपोर्ट सालो अदालत में पेश ही नहीं की गई और एसीपी (ACP) दफ्तर की अलमारियों में धूल फांकती रही।
इस प्रशासनिक हीलाहवाली के खिलाफ वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता शिशिर सिंह ने अदालत के समक्ष तीखा विधिक विरोध दर्ज कराया। अदालत के बेहद सख्त रुख अपनाने के बाद बैकफुट पर आई पुलिस ने आनन-फानन में अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।
⚔️ “मकतूल खुद गिरा था खंजर की नोक पर…”— कोर्ट में जोरदार बहस
अंतिम रिपोर्ट पेश होने के बाद वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता शिशिर सिंह ने कोर्ट में आपत्ति (Protest Application) दाखिल की और पुलिस की जांच पर जोरदार प्रहार करते हुए एक मशहूर शेर के जरिए विधिक तंज कसा:
“हुजूर! पुलिस की यह अंतिम रिपोर्ट तो ठीक उसी तर्ज पर तैयार की गई है कि— ‘कातिल की ये दलील मुंसफ ने मान ली, कि मकतूल खुद गिरा था खंजर की नोक पर।’ बिना बैंक कर्मियों की कड़ियों को जोड़े पुलिस ने आरोपियों को विधिक क्लीनचिट दे दी है।”
अधिवक्ता शिशिर सिंह की इस अकाट्य विधिक दलील और तर्कों से इत्तेफाक रखते हुए सिविल जज तरुण कुमार सिंह ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को पूरी तरह से विधिक रूप से निरस्त (Cancel) कर दिया। अदालत ने प्रकाश में आए नए तथ्यों के आधार पर मामले की नए सिरे से ‘अग्रिम विवेचना’ करने का आदेश जारी कर दिया है।
PNN24 News यूपी कॉलेज के इस हाई-प्रोफाइल मामले में होने वाली आगामी पुलिसिया जांच, बैंक अधिकारियों की संलिप्तता और कोर्ट की हर एक विधिक कार्यवाही की पल-पल की निष्पक्ष रिपोर्ट आप तक लगातार पहुंचाता रहेगा।











