इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब की अनुमति नहीं, कोर्ट ने याचिका की खारिज’
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल ड्रेस कोड और हिजाब पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित यूनिफॉर्म नीति का पालन करना सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है। प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की छात्रा की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का भी संदर्भ दिया। पढ़िए PNN24 की लीगल रिपोर्ट।

तारिक खान/महविश कुरैशी
प्रयागराज (PNN24 News): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल ड्रेस कोड और धार्मिक स्वतंत्रता के संतुलन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में लागू निर्धारित यूनिफॉर्म (ड्रेस कोड) नीति का पालन करना सभी छात्र-छात्राओं के लिए अनिवार्य है।

⚖️ फैसले के प्रमुख कानूनी बिंदु
- अति-आवश्यक धार्मिक प्रथा का अभाव: जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहीं कि कक्षा के भीतर हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा (Essential Religious Practice) है।
- समानता और अनुशासन का नियम: हाईकोर्ट के अनुसार, यदि किसी स्कूल की यूनिफॉर्म नीति निष्पक्ष और पंथनिरपेक्ष माहौल बनाने के लिए लागू की गई है, तो किसी व्यक्तिगत छात्र को उसमें विशेष छूट नहीं दी जा सकती।
- अतीत की छूट का प्रभाव नहीं: कोर्ट ने साफ किया कि पिछली कक्षाओं (6वीं से 10वीं तक) में यदि स्कूल प्रशासन ने स्कार्फ पर कोई नरमी बरती थी, तो इसका मतलब यह नहीं कि यह भविष्य के लिए कोई स्थायी कानूनी अधिकार बन जाता है।
🏢 क्या था पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद प्रयागराज के अत्तारसुइया स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा सुकैना रिजवी से जुड़ा था।
- छात्रा ने अपनी मां के माध्यम से याचिका दायर कर मांग की थी कि उसे नियमित स्कूल यूनिफॉर्म के साथ सिर पर स्कार्फ (हिजाब) पहनने की अनुमति दी जाए।
- सुनवाई के दौरान स्कूल प्रशासन और राज्य सरकार के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यूनिफॉर्म का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच सामाजिक व धार्मिक अंतर को खत्म करना और अनुशासन बनाए रखना है।
📌 कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का संदर्भ
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कर्नाटक हाईकोर्ट के 2022 के उस बहुचर्चित फैसले का भी संदर्भ दिया, जिसमें हिजाब को अनिवार्य धार्मिक आचरण नहीं माना गया था। पीठ ने कहा कि जब तक इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक शैक्षणिक संस्थानों की अनुशासन संबंधी नीतियों और यूनिफॉर्म के नियमों की संप्रभुता सर्वोपरि रहेगी।











