सावन में चिकन-मटन शॉप बंद कराने का विवाद पहुँचा इलाहाबाद हाईकोर्ट; अनडेटेड नोटिस को रद्द करने की मांग को लेकर PIL दाखिल’
सावन माह में चिकन-मटन शॉप बंद कराने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँचा! अमरोहा के नासिर फारूकी ने PIL दाखिल कर पुलिस के अनडेटेड नोटिस की वैधानिकता को दी चुनौती। कांवड़ मार्ग से हटकर गलियों की दुकानें भी बंद कराने से आजीविका संकट का आरोप। पढ़ें PNN24 की पूरी रिपोर्ट।

तारिक खान
प्रयागराज (PNN24 News): उत्तर प्रदेश में सावन माह के दौरान चिकन और मटन दुकानों को जबरन बंद कराए जाने का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँच गया है। अमरोहा जिले में स्थानीय पुलिस द्वारा चिकन-मटन दुकानदारों को जारी किए गए अनडेटेड नोटिस की वैधानिकता को एक जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
⚖️ “कांवड़ मार्ग से हटकर गलियों की दुकानें भी कराई गईं बंद”— याचिकाकर्ता का आरोप
अमरोहा निवासी नासिर फारूकी की ओर से दाखिल इस जनहित याचिका में कहा गया है कि अमरोहा जिले में जो दुकानें मुख्य कांवड़ मार्ग से हटकर अंदरूनी गलियों और मोहल्लों में स्थित थीं, पुलिस ने उन्हें भी अनडेटेड (बिना तिथि वाले) नोटिस जारी करके जबरन बंद करा दिया है। इसके कारण सैकड़ों गरीब दुकानदारों और उनके परिवारों के सामने रोज़गार व आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
अधिवक्ता का पक्ष: याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मुस्तकीम अहमद ने कहा कि जनहित याचिका में माननीय उच्च न्यायालय से इस संवेदनशील मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और पुलिस द्वारा जारी किए गए अनडेटेड नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है।
📝 “नोटिस में 4 सोमवार का जिक्र, लेकिन पूरे महीने नहीं खोलने दे रहे दुकानें”
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन/पुलिस द्वारा दिए गए नोटिस में केवल सावन के चार सोमवार को दुकान बंद रखने का उल्लेख किया गया था, लेकिन पुलिसिया सख्ती के कारण पूरे सावन माह में चिकन और मटन की दुकानें नहीं खोलने दी जा रही हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि नियम विरुद्ध और बिना तय मापदंडों के की जा रही इस कार्रवाई से व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे दैनिक मजदूरों व दुकानदारों के जीवन-यापन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।












