वाराणसी: अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर एशियन ब्रिज इंडिया ने रचा इतिहास; 300 युवाओं ने ‘युवा महोत्सव’ में सामाजिक समानता और बदलाव का उठाया संकल्प’
वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर एशियन ब्रिज इंडिया का भव्य युवा महोत्सव! 300 युवाओं ने नृत्य, नाटक, खेल व चर्चा के जरिए दिया सामाजिक समानता का संदेश। मो. मूसा आजमी, फादर अभिषेकतानंद और प्रो. संजय ने युवाओं को किया प्रेरित। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

महविश कुरैशी
वाराणसी (PNN24 News): अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर 12 अगस्त को एशियन ब्रिज इंडिया के तत्वावधान में वाराणसी में एक भव्य एवं प्रेरणादायक ‘युवा महोत्सव’ का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में शहर के विभिन्न सामाजिक व आर्थिक पृष्ठभूमि वाले क्षेत्रों— जैसे कांशीराम आवास (शिवपुर), पक्की बाजार (कचहरी), उस्मानपुर अलेपुरा, बड़ागांव, सामने घाट और बेलवा से आए लगभग 300 युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की।

🎭 सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया सामाजिक एकजुटता का संदेश
कार्यक्रम का सफल संचालन एशियन ब्रिज इंडिया की वरिष्ठ साथी अफ़साना द्वारा किया गया। स्वागत और विषय-परिचय के उपरांत युवाओं ने नृत्य, गीत और लघु नाटकों के माध्यम से सामाजिक विषमता, जातिगत व लैंगिक भेदभाव के खिलाफ प्रभावी प्रस्तुतियां दीं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में युवाओं की रचनात्मक सोच और सामाजिक मुद्दों की गहरी समझ स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
💬 “युवा ही भविष्य का भारत हैं”— प्रमुख अतिथियों का उद्बोधन
- फादर अभिषेकतानंद (प्रमुख अतिथि): युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा, भविष्य के अवसरों और वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन के अभाव में कई युवा भटक रहे हैं। ऐसे में युवाओं को सकारात्मक दिशा और अपने सामाजिक कर्तव्यों को समझने की सख्त जरूरत है, क्योंकि युवा ही भविष्य का भारत हैं।
- मोहम्मद मूसा आज़मी (अध्यक्ष, एशियन ब्रिज इंडिया): अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 से संयुक्त राष्ट्र द्वारा यह दिन मनाया जा रहा है। इस वर्ष के विषय “अलग परिस्थितियाँ, साझा आकांक्षाएँ” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा:
“युवा भले ही अलग-अलग परिस्थितियों से आते हों, लेकिन उनकी आकांक्षाएं एक समान हैं— बेहतर शिक्षा, सम्मानजनक रोजगार और निर्भीक अभिव्यक्ति। युवाओं को केवल मूक दर्शक बनने के बजाय समाज में सकारात्मक बदलाव का सक्रिय भागीदार बनना होगा।”
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सुश्री नीलम (प्रगति पथ फाउंडेशन): उन्होंने विशेष रूप से युवा लड़कों द्वारा ‘घर का काम, सबका काम’ की अवधारणा को अपनाने की सराहना की और इसे केवल एक बदलाव नहीं, बल्कि एक “सामाजिक क्रांति” करार दिया।
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प्रो. संजय (काशी विद्यापीठ): उन्होंने ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) युवतियों की बदलती भूमिका का जिक्र करते हुए लड़कों को संदेश दिया कि भविष्य की महिलाएं केवल घर तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि देश और समाज के निर्माण में बराबरी की भूमिका निभाएंगी। इसलिए पुरुषों को भी घरेलू जिम्मेदारियों में अपनी बराबरी की हिस्सेदारी निभानी होगी।
🎈 खेल और गतिविधियों के जरिए समझाई सामाजिक असमानता
युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए कई रोचक गतिविधियों का आयोजन किया गया:
- साँप-सीढ़ी का खेल: इसके जरिए जीवन की परिस्थितियों और सामाजिक विषमताओं के उतार-चढ़ाव को व्यावहारिक रूप से समझाया गया।
- सवालों का पिटारा (गुब्बारा फोड़ गतिविधि): गुब्बारों में छिपे संदेशों के माध्यम से युवाओं से सामाजिक मुद्दों पर सीधा संवाद किया गया।
- विचार मंच: युवाओं ने जाति, लिंग और आर्थिक स्थिति के आधार पर होने वाली असमानताओं को दूर करने के लिए अपने विचार व सुझाव साझा किए।
👥 गणमान्य जनों व संगठनों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में एशियन ब्रिज इंडिया के अध्यक्ष मोहम्मद मूसा आज़मी के साथ उनके सहयोगी साहिल, कैलाश, चंदन, सुमन, नैंसी, अफसाना, अनुराग समेत पूरी टीम सक्रिय रही। वहीं, नट समुदाय संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रेम नट के नेतृत्व में सौरभ, राहुल, माना देवी, नेहा, मीना देवी, रिया, नंदिनी और ज्योति सहित कई कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि युवाओं को समान अवसर और लोकतांत्रिक मंच प्रदान करके ही एक न्यायपूर्ण, जागरूक और समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।










