सीएम योगी की विपक्ष को दोटूक; बोले— “सवाल पूछना लोकतंत्र का हक है, तो जवाब सुनना भी जिम्मेदारी”, कांग्रेस तथ्यों से भाग रही है’
विपक्ष को सीएम योगी आदित्यनाथ की दोटूक— "सवाल पूछना लोकतंत्र का हक है, तो जवाब सुनना भी जिम्मेदारी!" संसद में छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे पर सीएम योगी ने कांग्रेस को आईना दिखाया। कहा— अमित शाह जी सदन में जवाब देने को पूरी तरह तैयार हैं, बहस से भागें नहीं। पढ़ें PNN24 की पूरी रिपोर्ट।

आदिल अहमद
लखनऊ/नई दिल्ली (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र की मर्यादा और संसदीय परंपराओं को लेकर विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी पर सीधा और तीखा हमला बोला है। विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों और संसद में जारी राजनीतिक घमासान के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार हर सवाल का उत्तर देने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष को भी जवाब सुनने का धैर्य और गंभीरता दिखानी होगी।
📱 ‘एक्स’ (X) पोस्ट के जरिए विपक्ष को दिखाया आईना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
सीएम योगी ने लिखा:
“लोकतंत्र प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता देता है, तो उत्तर सुनने का दायित्व भी निर्धारित करता है। माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी विद्यार्थियों से जुड़े विषय पर सदन में विस्तारपूर्वक अपना पक्ष रखने के लिए पूर्णतः तैयार हैं।”
उन्होंने आगे संसदीय गरिमा बनाए रखने की नसीहत देते हुए कहा:
“कांग्रेस और समूचे विपक्ष से अपेक्षा है कि तथ्यों का सामना करे, सदन की गरिमा बनाए रखे और उत्तर को पूरा सुने। लोकतंत्र में बहस से प्रतिष्ठा बढ़ती है, भागने से नहीं।”
⚔️ संसद में राहुल गांधी के हमलों के बीच आया बड़ा बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दल प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कार्रवाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और सदन में जवाब की मांग पर अड़े हुए हैं।
🏛️ “संवाद से पीछे नहीं हट रही सरकार, बहस ही लोकतंत्र की ताकत”
सीएम योगी ने अपने वक्तव्य के माध्यम से संदेश देने का प्रयास किया है कि केंद्र सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है। लोकतंत्र में केवल हंगामा खड़ा करना, नारेबाजी करना या सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करना उचित तरीका नहीं है। तथ्यों पर आधारित सार्थक बहस ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है।












