‘PNN24 बिजनेस: त्योहारों से पहले ‘महंगाई की मार’; प्याज-चीनी के बाद अब काजू, बादाम और पिस्ता के दाम आसमान पर, बजट बिगड़ना तय’
त्योहारों से ठीक पहले आम आदमी की रसोई पर महंगाई की दोहरी मार पड़ी है। प्याज और चीनी के बाद अब काजू, बादाम और पिस्ता के दाम आसमान छू रहे हैं। नवी मुंबई की वाशी मंडी से लेकर पुणे और गुजरात के बाजारों में ड्राई फ्रूट्स 20% से 80% तक महंगे हो गए हैं। पढ़िए PNN24 की विशेष बिजनेस रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
PNN24 News): रक्षाबंधन, गणेशोत्सव और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों की दस्तक के साथ ही देश भर में मिठाइयों और पकवानों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लेकिन इस बार त्योहारों की मिठास पर महंगाई का साया मंडरा रहा है। आम आदमी पहले से ही प्याज और चीनी के बढ़ते दामों से परेशान था, और अब ड्राई फ्रूट्स (सूखे मेवों) की कीमतों में आई भारी तेजी ने मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।
📈 बाजारों का हाल: 20% से 80% तक उछले रेट
गुजरात के अहमदाबाद और सूरत से लेकर महाराष्ट्र की थोक मंडियों तक ड्राई फ्रूट्स के रेट तेजी से ऊपर जा रहे हैं:
- नवी मुंबई वाशी मार्केट: एशिया की बड़ी थोक मंडियों में शुमार नवी मुंबई की वाशी होलसेल मार्केट में पिछले कुछ ही दिनों के भीतर सूखे मेवों के दाम में 20% से लेकर 80% तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- पुणे मंडी में उछाल: पुणे के थोक व खुदरा बाजारों में महज 15 दिनों के भीतर बादाम, पिस्ता और काजू के दाम 100 रुपये से लेकर 300 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं।
📊 ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में बढ़ोतरी का अनुमानित ब्योरा (Price Hike Data)
| मेवे का नाम (Dry Fruit) | कीमतों में बढ़ोतरी (रु प्रति किलो) |
| काजू (Cashew) | ₹150 से ₹250 प्रति किलो की बढ़ोतरी |
| बादाम (Almond) | ₹100 से ₹200 प्रति किलो की बढ़ोतरी |
| पिस्ता (Pistachio) | ₹200 से ₹300 प्रति किलो की बढ़ोतरी |
🔍 क्यों बढ़ रहे हैं ड्राई फ्रूट्स के दाम?
बाजार विशेषज्ञों और थोक व्यापारियों के अनुसार, कीमतों में इस अचानक तेजी के तीन मुख्य कारण हैं:
- त्योंहारी मांग (Festive Demand): गणेशोत्सव, नवरात्रि और दिवाली के चलते देश भर के बाजारों में मिठाइयों, गिफ्ट पैक और घरेलू खपत के लिए खरीदारी तेजी से बढ़ी है।
- सप्लाई चेन पर दबाव: अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आयात प्रभावित होने और स्थानीय थोक मंडियों में सीमित स्टॉक होने के कारण आपूर्ति में रुकावट आई है।
- ट्रांसपोर्टेशन खर्च: लॉजिस्टिक्स और माल भाड़े में हुई बढ़ोतरी का सीधा असर थोक और खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है।
मिठाई विक्रेताओं से लेकर आम खरीदारों तक, सभी इस बढ़ोतरी से परेशान हैं। सूखे मेवों की ऊंची कीमतों से इस बार त्योहारों के स्वाद पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।











