High Court का बड़ा फैसला— 11वीं-13वीं JPSC रद्द करने के सरकारी आदेश पर लगी रोक; सैकड़ों नवनियुक्त अफसरों को मिली बड़ी राहत’

झारखंड हाई कोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC की रद्द नियुक्तियों के हेमंत सोरेन सरकार के फैसले पर लगाया स्टे! पदस्थापित अधिकारियों को मिली बड़ी राहत। बिना पक्ष सुने एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ अभ्यर्थियों ने खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा। पढ़ें PNN24 की पूरी रिपोर्ट।

आफताब फारुकी

रांची (PNN24 News): झारखंड में परीक्षाओं के रद्द होने और बहाली विवाद के बीच झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य के सैकड़ों प्रशासनिक अभ्यर्थियों और कार्यरत अधिकारियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षाओं और उनके आधार पर की गई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर फिलहाल अंतिम सुनवाई तक रोक (Stay) लगा दी है।

हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद से सेवा में तैनात उन दर्जनों अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी नौकरियां सरकार के अचानक लिए गए एकतरफा फैसले से अधर में लटक गई थीं।

⚖️ कोर्ट में दलील: “बिना पक्ष सुने सालों की मेहनत पर फेरा पानी”

JPSC परीक्षा पास कर विभिन्न विभागों में तैनात हो चुके प्रभावित अभ्यर्थियों ने सरकार के निरस्तीकरण (Cancellation) आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

  • याचिकाकर्ताओं की दलील: याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में कहा कि सरकार ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) का उल्लंघन किया है। अभ्यर्थियों को कोई नोटिस जारी किए बिना और अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना ही एकतरफा फैसला सुनाकर उन्हें सेवा से हटा दिया गया, जो पूरी तरह असंवैधानिक है।
  • राज्य सरकार का रुख: दूसरी तरफ, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि परीक्षा का संचालन करने वाली एजेंसी ‘टीडीपीएल’ (TDPL) और पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गई थीं। CID जांच की शुरुआती रिपोर्ट और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए ही परीक्षा रद्द करने का कड़ा निर्णय लिया गया था।

🔥 छात्र आंदोलन के दबाव में सरकार ने लिया था फैसला

गौरतलब है कि रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और सड़कों पर छात्रों के बड़े आंदोलन और सीआईडी (CID) जांच की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने टीडीपीएल द्वारा संचालित जेपीएससी और जेएसएससी की कई परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी।

अदालत द्वारा स्टे दिए जाने के बाद अब कार्यभार संभाल चुके अफसरों की सेवाएं फिलहाल सुरक्षित रहेंगी, हालांकि इस मामले में अंतिम न्यायिक स्पष्टता हाई कोर्ट की अगली सुनवाई के बाद ही सामने आएगी।

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