‘PNN24 व्यंग्य: अब लॉकर में रखनी पड़ेगी लौंगलता! ₹20 के पार पहुंची कीमत, बोली- औकात है तो खरीद के दिखाओ!’
कभी 5 रुपये में 4 मिलने वाली बनारस की शान 'लौंगलता' अब 30 रुपये पार हो चुकी है। अब यह मिठाई नहीं, बल्कि बैंक लॉकर में रखने वाली प्रॉपर्टी बन गई है! पढ़िए PNN24 पर महंगाई और नेनुआ क्रांति के बाद 'लौंगलता स्वीट क्रांति' का मजेदार व्यंग्य।

अनुराग पाण्डेय ‘अक्खड़ बनारसी’
वाराणसी/न्यूज डेस्क (PNN24 News): देश में नेनुआ (तोरई) की महंगाई के झटके से जनता अभी संभली भी नहीं थी कि अब उत्तर भारत की पारंपरिक और चहेती मिठाई ‘लौंगलता’ ने भी इकोनॉमी में भूचाल ला दिया है। महंगाई डायन ने अब सीधे चाशनी और मैदे पर हमला बोल दिया है, जिसके बाद लौंगलता के तेवर सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं।
💍 चश्मा लगाकर लौंगलता कह रही है—”औकात है तो खरीद के दिखा!”
याद कीजिए वो स्वर्णिम दिन, जब 5 रुपये में चार-चार लौंगलता प्लेट में रखकर ऐसे मिलती थीं जैसे कोई सरकारी योजना का लाभ हो। लेकिन आज वक्त ऐसा बदल गया है कि एक अकेली लौंगलता सोने का हार और काला चश्मा पहनकर दुकान के शीशे के पीछे से सीधे ग्राहकों को आंखें दिखा रही है और ठहाका लगाकर कह रही है—“जरा औकात में रहो, खरीदना है तो बैंक से पर्सनल लोन पास करवा के आओ!”
🏦 अब मिठाई नहीं, प्योर ‘इन्वेस्टमेंट’ बन गई है लौंगलता
हालात ऐसे हो गए हैं कि अब इस कड़क और रसीली मिठाई को खाने से पहले सोचना पड़ता है।
- लॉकर का विकल्प: अब जनता सोने-चांदी के गहने बैंक के लॉकर में रखना बंद करने वाली है, क्योंकि घर में लौंगलता रखना ज्यादा रिस्की हो गया है। कहीं चोर आए और सारा सोना छोड़कर फ्रिज में रखी दो लौंगलता उड़ा ले गए, तो आदमी सीधे सड़क पर आ जाएगा!
- महीने भर की बचत: अब एक प्लेट लौंगलता खाने के लिए मिडिल क्लास आदमी को कम से कम एक महीने का पीएफ (PF) एडवांस निकलवाना पड़ेगा या फिर बच्चों की स्कूल फीस रोकनी पड़ेगी।
📈 नेनुआ क्रांति के बाद अब ‘स्वीट क्रांति’!
पहले सब्जी मार्केट में तोरई (नेनुआ) ने क्रूड ऑयल बनने की तैयारी की और अब मिठाई मार्केट में लौंगलता सीधे स्टॉक मार्केट का ‘ब्लू-चिप शेयर’ बन गई है। लगता है आने वाले दिनों में शादियों में रसगुल्ले और काजू कतली की जगह मेहमानों को प्लेट में एक अदद लौंगलता देना ‘स्टेटस सिंबल’ बन जाएगा। जिसे एक लौंगलता प्लेट में मिल गई, समझ लीजिए उसे सीधे जेड-प्लस (Z+) सुरक्षा मिल गई!
इसलिए देशवासियों, जब तक यह मिष्ठान्न पूरी तरह शेयर बाजार के आईपीओ (IPO) में लिस्ट होकर अडानी-अंबानी के हाथों में नहीं बिक जाता, तब तक जी भरकर इसकी खुशबू सूंघ लीजिए… क्योंकि असली मज़ा तो अब सपनों की दुनिया में ही लौंगलता खाने में है!












