मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर मचे सियासी घमासान के बीच बोले पाक विदेश मंत्री इसहाक डार’ “यह किसी देश के खिलाफ नहीं, पूरी तरह रक्षात्मक है”

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए ऐतिहासिक 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर मचे हंगामे के बीच विदेश मंत्री इसहाक डार की सफाई! 'X' पर पोस्ट कर बोले— "यह समझौता पूरी तरह रक्षात्मक है, किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं।" जानें समझौते की मुख्य शर्तें और PNN24 की पूरी इंटरनेशनल रिपोर्ट।

आदिल अहमद 

PNN24 News: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में हुए ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ (Makkah Joint Defence Agreement) को लेकर मचे वैश्विक और सियासी घमासान के बीच पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इसहाक डार ने बड़ी सफाई दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह समझौता किसी भी तीसरे देश के खिलाफ आक्रामक रुख नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य केवल क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा को मजबूती प्रदान करना है।

🤝 क्या है ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’?

विदेश मंत्री इसहाक डार के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को पवित्र शहर मक्का मुकर्रमा में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता तीनों मुस्लिम बहुल और मित्र देशों के बीच लंबे समय से चल रही उच्चस्तरीय कूटनीतिक वार्ताओं का नतीजा है।

सामूहिक सुरक्षा की सबसे बड़ी शर्त: इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय प्रावधान यह है कि यदि तीनों हस्ताक्षरकर्ता देशों (पाकिस्तान, सऊदी अरब या तुर्की) में से किसी भी एक राष्ट्र पर कोई बाहरी सशस्त्र हमला या आक्रामकता होती है, तो उसे तीनों देशों पर किया गया हमला माना जाएगा। डार ने कहा कि यह सामूहिक आत्मरक्षा का सिद्धांत संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) के अनुच्छेद 51 के तहत मिले अंतरराष्ट्रीय अधिकारों के पूरी तरह अनुकूल है।

💡 इसहाक डार की सफाई और मुख्य बिंदु

इस समझौते से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पैदा हुई चिंताओं के बीच विदेश मंत्री ने तीन प्रमुख बातें सामने रखीं:

  1. पूरी तरह रक्षात्मक नीति: इसहाक डार ने जोर देकर कहा कि इस समझौते का चरित्र आक्रामक नहीं बल्कि पूरी तरह रक्षात्मक (Purely Defensive) है। इसका निशाना कोई विशेष पड़ोसी या तीसरा देश नहीं है।
  2. मौजूदा करारों पर असर नहीं: उन्होंने यह भी साफ किया कि यह नया त्रिपक्षीय समझौता तीनों देशों द्वारा पूर्व में किए गए किसी भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय समझौतों को रद्द या कमजोर नहीं करता है।
  3. अन्य देशों के लिए खुले दरवाजे: पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि यदि क्षेत्र का कोई भी अन्य देश इस समझौते के शांतिपूर्ण सिद्धांतों को स्वीकार करता है और अपने आपसी विवादों को कूटनीति से सुलझाने पर सहमत होता है, तो वह भी इस गठबंधन में शामिल हो सकता है।

🌍 वैश्विक कूटनीति पर क्या पड़ेगा असर?

मुस्लिम दुनिया के तीन बड़े सैन्य व आर्थिक रूप से मजबूत देशों— सऊदी अरब (आर्थिक शक्ति), तुर्की (नाटो सदस्य) और पाकिस्तान (परमाणु शक्ति)— के इस समझौते को वैश्विक राजनीति और मध्य पूर्व/दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

PNN24 News अंतरराष्ट्रीय संबंधों, रक्षा समझौतों और विदेश नीति से जुड़ी हर बड़ी अपडेट आप तक लगातार पहुंचाता रहेगा।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *