महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में बड़ा बवाल; रिजल्ट की विसंगतियों पर छात्रों का हल्ला बोल, प्रशासनिक भवन और कक्षाएं कराईं बंद’
वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में रिजल्ट में भारी विसंगतियों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन! प्रशासनिक भवन और कक्षाएं बंद कराकर गेट पर की नारेबाजी। बीए फर्स्ट ईयर के रिजल्ट में जीरो नंबर और एब्सेंट किए जाने का आरोप। छात्र नेता शिवम यादव व छात्रा प्रियांशी मिश्रा ने उठाए सवाल। पढ़ें PNN24 की पूरी रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) में सोमवार को एक बार फिर रिजल्ट संबंधी गंभीर विसंगतियों, जीरो अंक दिए जाने और अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। आक्रोशित छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासनिक भवन में ताला जड़ दिया और सभी जारी कक्षाओं को जबरन बंद करवाकर मुख्य गेट पर बैठकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
डेढ़ साल बाद आया बीए फर्स्ट ईयर का रिजल्ट, 100 से अधिक छात्र प्रभावित
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता शिवम यादव ने विश्वविद्यालय प्रशासन और परीक्षा नियंत्रक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
“काशी विद्यापीठ में हर बार रिजल्ट में भारी गड़बड़ी होती है। हाल ही में बीए फर्स्ट ईयर का रिजल्ट पूरे डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद जारी किया गया है, लेकिन इसके बावजूद इसमें भारी विसंगतियां हैं। सैकड़ों छात्रों को या तो फेल कर दिया गया है या अनुपस्थित (Absent) दर्शा दिया गया है।”
शिवम यादव ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो एजेंसी विश्वविद्यालय के रिजल्ट तैयार करती है, वह पिछले 5 वर्षों से विश्वविद्यालय परिसर के बाहर से अपना दफ्तर चला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले एजेंसी के दलाल नंबर सही कराने का खेल करते थे, और अब परीक्षा नियंत्रक कार्यालय के करीबी दलाली में शामिल हैं।
“10वीं से OMR भर रहे हैं, सब एक साथ गलती कैसे करेंगे?”— छात्रा प्रियांशी मिश्रा
रिजल्ट में जीरो अंक मिलने से नाराज बीए की छात्रा प्रियांशी मिश्रा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए प्रशासन के दावों की पोल खोली। उन्होंने कहा:
“हमें परीक्षा के एक पूरे विषय में जीरो (0) नंबर दे दिया गया है। जब हमने इसकी जानकारी मांगी, तो कहा जा रहा है कि छात्रों ने ओएमआर (OMR) शीट में गोला सही से नहीं भरा। हम हाईस्कूल (10वीं) के समय से ओएमआर शीट भरते आ रहे हैं। अगर एक-दो छात्रों से गलती होती तो समझ आता, लेकिन क्या 100 से ज्यादा छात्र एक जैसी गलती कर देंगे? विश्वविद्यालय को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए।”
जांच और डिग्री करेक्शन के नाम पर अवैध वसूली का आरोप
छात्र नेता शिवम यादव ने आंदोलन के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगे रखीं:
- जवाबदेही तय हो: पिछले 5 वर्षों से लगातार खराब और विसंगतिपूर्ण रिजल्ट आने की जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
- एजेंसी परिसर में आए: विश्वविद्यालय का डेटा संभालने वाली प्राइवेट एजेंसी को बाहर के बजाय परिसर के अंदर से संचालित किया जाए।
- डिग्री करेक्शन घोटाला: छात्र अपनी सभी आवश्यक आईडी/दस्तावेज और फॉर्म जमा करते हैं, इसके बावजूद गलत डिग्री छापी जाती है और बाद में करेक्शन के नाम पर छात्रों से पैसे वसूले जाते हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।











