सोमालिया ने साइप्रस नीति पर जारी किया स्पष्टीकरण; विवादित पोस्ट हटने के बाद दोहराया— “संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अखंडता का करते हैं सम्मान”‘
सोमालिया के विदेश मंत्रालय ने साइप्रस की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर अपना रुख स्पष्ट किया है। नवनिर्वाचित संसदीय अध्यक्ष द्वारा 'टर्किश रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस' को लेकर किए पोस्ट और विवाद के बाद सोमालिया ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पढ़ें PNN24 की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट।

मुस्कान अंसारी
मोगादिशु (PNN24 News): सोमालिया के विदेश मंत्रालय ने साइप्रस के मुद्दे पर अपनी दीर्घकालिक विदेश नीति को लेकर पैदा हुए भ्रम के बाद आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। सोमालियाई विदेश मंत्रालय ने कहा है कि साइप्रस को लेकर उसकी राष्ट्रीय नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और वह संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के संबंधित प्रस्तावों का पूर्ण समर्थन करता है।

सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, यह विवाद 10 अगस्त को सोमालिया संसद के ‘हाउस ऑफ पीपल्स’ के नए स्पीकर चुने गए अब्दुल कादिर मोहम्मद नूर के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ। स्पीकर चुने जाने पर ‘टर्किश रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस’ (TRNC) की संसद के अध्यक्ष ने उन्हें बधाई दी थी, जिसके जवाब में अब्दुल कादिर ने एक्स (ट्विटर) पर धन्यवाद संदेश पोस्ट किया था।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव और साइप्रस मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए उस पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा (Delete) दिया गया।
1974 से विभाजित है साइप्रस: UN सुरक्षा परिषद का रुख
सोमालियाई विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि वह संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में साइप्रस विवाद का शांतिपूर्ण, द्विपक्षीय और स्थायी समाधान चाहता है।
- भौगोलिक विभाजन: 1974 के घटनाक्रम के बाद से साइप्रस द्वीप दो भागों में बंटा हुआ है। दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त साइप्रस गणराज्य (Republic of Cyprus) है, जबकि उत्तरी हिस्से में केवल तुर्की (Turkey) द्वारा मान्यता प्राप्त ‘टर्किश रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस’ मौजूद है।
- UNSC प्रस्ताव 541 और 550: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 541 (1983) और प्रस्ताव 550 (1984) के तहत उत्तरी साइप्रस में घोषित अलग राज्य को किसी भी देश द्वारा मान्यता न देने और साइप्रस की संप्रभुता बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश है।











