वाराणसी में डॉ राशिद परवेज़ के एम्बिशन अस्पताल पर लगा अमानवीयता का आरोप; मरीज की मौत के बाद 6 घंटे तक शव बंधक बनाने और अभद्रता का आरोप, मुख़्तार अंसारी के शूटरो की दिया धमकी, पुलिस में शिकायत’
वाराणसी के मकबूल आलम रोड स्थित एम्बिशन अस्पताल और डॉ. राशिद परवेज़ पर लापरवाही से महिला मरीज की मौत, महंगी दवाएं बेचने और ₹55,000 का बिल न चुकाने तक 6 घंटे शव रोके रखने का गंभीर आरोप लगा है। परिजनों ने कैंट थाना क्षेत्र की अर्दली बाजार चौकी में तहरीर दी है। पढ़िए PNN24 की ग्राउंड रिपोर्ट।

मुस्कान अंसारी
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी के मकबूल आलम रोड (खजुरी कॉलोनी) स्थित एम्बिशन अस्पताल और उसके संचालक डॉ. राशिद परवेज़ पर एक महिला मरीज के इलाज में भारी लापरवाही, जबरन महंगी दवाएं बेचने और ₹55,000 के बकाया बिल के भुगतान के लिए 6 घंटे तक शव बंधक बनाने के संगीन आरोप लगे हैं।
🏥 मुख़्तार अंसारी गैंग की धमकी, वीडियो साक्ष्य सुरक्षित
यही नहीं हमारे पास इस बात के वीडियो साक्ष्य उपलब्ध है कि पत्रकारों के सवाल पूछने पर डॉ राशिद परवेज़ ने मुख़्तार अंसारी गैंग के एक गुर्गे से फोन पर बात किया और मुख़्तार अंसारी गैंग की धमकी दिया, गौरतलब हो कि डॉ राशिद परवेज़ के करीबी सम्बन्ध अंसारी गैंग से होने की चर्चा शहर में है और इसी के बल पर जमकर वह दबगाई दिखाता है, मामले में पीड़िता की पत्रकार पुत्री और परिजनों ने कैंट थाना क्षेत्र की अर्दली बाजार चौकी में लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
🏥 इलाज में लापरवाही और मनमाने बिलिंग का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामनगर की रहने वाली बानो बेगम को इलाज के लिए मकबूल आलम रोड स्थित डॉ. राशिद परवेज़ की ओपीडी के बाद खजुरी कॉलोनी स्थित एम्बिशन अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था:
- आईसीयू और मिलने पर पाबंदी: परिजनों का आरोप है कि पिछले 4 दिनों से मरीज की स्थिति में सुधार का दावा किया जा रहा था, लेकिन परिजनों को मिलने नहीं दिया गया।
- महंगी दवाओं का दबाव: परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन द्वारा बाहरी दवाइयों की जगह केवल अपनी ही फार्मेसी से चार गुना अधिक कीमत पर दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया गया।
- रसीद बिना वेंटिलेटर चार्ज: शनिवार सुबह मरीज के पति से कथित तौर पर वेंटिलेटर का नकद चार्ज जमा कराया गया और बिना रसीद दिए कुछ कागजों पर दस्तखत ले लिए गए। इसके करीब एक घंटे बाद मरीज को मृत घोषित कर दिया गया।
⏱️ 6 घंटे तक शव न देने और अभद्रता का दावा
परिजनों का कहना है कि मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने ₹55,000 का बकाया जमा न होने तक शव सौंपने से मना कर दिया।
शाम को मिला शव: शाम करीब 6 बजे जब परिजनों ने जैसे-तैसे रकम जुटाई और जमा की, तब जाकर शव उन्हें सौंपा गया।
रिपोर्ट न देने का आरोप: परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मरीज के इलाज और विभिन्न जांचों से जुड़ी कोई भी मेडिकल रिपोर्ट उन्हें मुहैया नहीं कराई गई।














