वाराणसी में पिता की संपत्ति की जाली लीज डीड बनवाकर हड़पने का मामला; कोर्ट के आदेश पर कैंट पुलिस दर्ज करेगी FIR’

वाराणसी की CJM अदालत ने पिता की संपत्ति का कूटरचित लीज डीड बनवाकर स्कूल लाइसेंस हासिल करने के मामले में कैंट पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया है। शैलेंद्र कुमार वर्मा की याचिका पर कोर्ट ने सुषमा रतन, नील रतन और नंदा रतन के खिलाफ यह कार्रवाई की है। पढ़िए PNN24 की लीगल रिपोर्ट।

मुस्कान अंसारी

वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी में धोखाधड़ी और कूटरचना के जरिए स्वर्गीय पिता की करोड़ों की संपत्ति की लीज डीड तैयार कराने और उसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर स्कूल का लाइसेंस प्राप्त करने के संगीन मामले में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मनीष कुमार की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद कैंट थाना पुलिस को आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना करने का आदेश दिया है।

🏛️ बीएनएनएस (BNSS) की धारा 173(4) के तहत याचिका

कश्मीरीगंज (भेलूपुर) निवासी वादी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने अपने अधिवक्ता अनुज यादव और नरेश यादव के माध्यम से अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था:

  • संपत्ति का मालिकाना हक: वादी शैलेंद्र कुमार वर्मा के अनुसार, उनके स्वर्गीय पिता जित्तूराम वर्मा के नाम दो मकान (बी. 24/70ए व बी. 24/70) और माता स्वर्गीय राजमनी वर्मा के नाम एक भवन (बी. 24/64) दर्ज था।
  • अनापत्ति के बाद दाखिल-खारिज: माता-पिता के निधन के बाद प्रार्थी और उनकी बहन सुषमा रतन ही कानूनी वारिस थे। बहन सुषमा रतन की सहमति व अनापत्ति (NOC) के आधार पर वर्ष 2023 में राजस्व अभिलेखों में तीनों मकानों पर अकेले शैलेंद्र कुमार वर्मा का नाम बतौर स्वामी दर्ज हो गया।

📜 जाली लीज डीड और गलत तथ्यों का आरोप

अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार:

  1. खुद को बताया स्वामिनी: आरोप है कि बहन सुषमा रतन ने छल और धोखाधड़ी की नीयत से 3 दिसंबर 2022 को भवन संख्या-बी. 24/70ए की लीज डीड उपनिबंधक सदर तृतीय वाराणसी में पंजीकृत करवा ली, जिसमें उन्होंने खुद को भवन का मालिक और ‘बनारस पब्लिक स्कूल’ का प्रबंधक दर्शाया।
  2. बैकडेट लीज का खेल: पंजीकृत लीज डीड की शर्त संख्या-1 में लीज अवधि 18 जून 2000 से 30 वर्षों के लिए दर्शाई गई, जबकि वर्ष 2000 से लेकर 2023 तक उक्त मकान सरकारी कागजों में पिता स्व. जित्तूराम वर्मा के नाम दर्ज था।
  3. स्कूल लाइसेंस में फर्जीवाड़ा: वादी का आरोप है कि इस कूटरचित लीज डीड का इस्तेमाल संबंधित विभाग में जमा करके स्कूल का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए किया गया, जो एक गंभीर अपराध है।

👮 इन 3 लोगों के खिलाफ FIR का आदेश

अदालत ने वादी के अधिवक्ताओं की दलीलें और प्रस्तुत साक्ष्यों को सुनने के बाद मामले में आरोपी सुषमा रतन, नील रतन और नंदा रतन के खिलाफ कैंट पुलिस को तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच (Investigation) शुरू करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

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