मध्य पूर्व में जंग के बाद क्रूड ऑयल में भयंकर उबाल; 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड, भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया महंगाई का खतरा’
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य संघर्ष और अमेरिका-ईरान तनातनी के बीच कच्चे तेल की कीमतों ने $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर लिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट गहरा गया है। पढ़िए PNN24 की इकोनॉमी रिपोर्ट।

महविश कुरैशी
PNN24 News: मध्य पूर्व में जारी गहराते सैन्य संघर्ष और अमेरिका-ईरान के बीच सीधी तनातनी ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ओमान की खाड़ी और लाल सागर में तेल टैंकरों पर जारी हमलों के बीच बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल ($100/barrel) के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर गई।

⚔️ टैंकरों पर हमले और होर्मुज स्ट्रेट पर गहराया संकट
ऊर्जा आपूर्ति में आई इस रुकावट का मुख्य कारण क्षेत्र में सैन्य संघर्ष का तेजी से विस्तार होना है:
- ईरानी टैंकरों पर कार्रवाई: अमेरिकी सैन्य अभियानों के तहत हाल ही में ओमान की खाड़ी में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) से जुड़े चार तेल टैंकरों और खार्ग द्वीप के पास एक अन्य टैंकर को निशाना बनाया गया।
- तेहरान का पलटवार: जवाब में ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइलें दागीं। साथ ही, ईरान ने समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) में अमेरिकी जहाजों व तेल टैंकरों को निशाना बनाने का दावा किया है।
- यमन के हूती विद्रोही: यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के प्रमुख तेल प्रतिष्ठानों पर किए जा रहे हमलों ने आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है।
📈 आसमान छूती कीमतें: 1 महीने में 25% का उछाल
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने लगा है:
- एक महीने में भारी बढ़ोतरी: पिछले महीने की शुरुआत से लेकर अब तक ब्रेंट क्रूड के दामों में लगभग 25% की तेज वृद्धि दर्ज की गई है।
- ऐतिहासिक उच्चतम स्तर: इस साल फरवरी में संघर्ष की शुरुआत के बाद 30 अप्रैल को कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 126.41 डॉलर प्रति बैरल के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थीं।
- भारत पर संभावित असर: यदि मध्य पूर्व में संकट लंबा खींचता है, तो भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और उपभोक्ता वस्तुओं के महंगे होने (Mudrasphiti) का सीधा खतरा पैदा हो जाएगा।











