सत्य निकेतन हादसे पर दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख; कहा— “सरकार जिम्मेदारी से नहीं बच सकती”, MCD को उच्च स्तरीय जांच और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश’
सत्य निकेतन इमारत हादसे पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि 'सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।' कोर्ट ने एमसीडी को उच्च स्तरीय जांच, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और दिल्ली के पीजी/हॉस्टलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पढ़िए PNN24 की लीगल रिपोर्ट।

फारुख हुसैन
नई दिल्ली (PNN24 News): दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में 5 मंजिला बॉयज पीजी इमारत ढहने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने राहत और बचाव अभियान को और तेज करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा कि “सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।”

⚖️ “इससे ज़्यादा दुखद और कुछ नहीं हो सकता” — हाई कोर्ट
बार एंड बेंच के अनुसार, हाई कोर्ट की पीठ ने राजधानी में बार-बार होने वाले ऐसे हादसों पर चिंता जताते हुए कहा:
“आप (सरकार) अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते… 50 छात्र जो अपनी ज़िंदगी के एक नए पड़ाव पर खड़े थे, उनमें से ज़्यादातर शायद अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं, इससे ज़्यादा दुखद और कुछ नहीं हो सकता। राष्ट्रीय राजधानी में लगभग हर दूसरे साल ऐसी त्रासदियां सामने आती हैं।”
📋 उच्च स्तरीय जांच और अधिकारियों पर एक्शन के आदेश
हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) और संबंधित निकायों को निम्नलिखित सख्त निर्देश दिए:
- निर्माण की वैधता की जांच: उच्चतम स्तर पर जांच कर यह पता लगाया जाए कि ढही इमारत का निर्माण वैध नक्शे और अनुमति के तहत हुआ था या नहीं।
- अधिकारियों की जवाबदेही: अवैध निर्माण और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रस्तावित सख्त कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाए।
🏛️ कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का पक्ष
केंद्र सरकार, एमसीडी और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि बचाव अभियान पूरी गति से चल रहा है और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
इसके साथ ही तुषार मेहता ने सोशल मीडिया पर मलबे में फंसे या घायलों के संवेदनशील वीडियो प्रसारित किए जाने पर गहरी चिंता जताई और इनके प्रसार पर रोक लगाने के लिए अदालत से निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।











