दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव वरिष्ठ IAS राकेश मेहता का निधन; नोएडा आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला शव, सुसाइड नोट में गंभीर बीमारी का जिक्र’

दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राकेश मेहता का नोएडा स्थित आवास पर शव मिला। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट मिला है जिसमें स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र है। शीला दीक्षित सरकार में अहम प्रशासनिक सुधारों के लिए जाने जाने वाले राकेश मेहता के निधन पर PNN24 की रिपोर्ट।

मुस्कान अंसारी 

नई दिल्ली/नोएडा (PNN24 News): दिल्ली प्रशासनिक तंत्र के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे 1975 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता (74 वर्ष) का नोएडा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया है। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने कथित तौर पर फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।

यह दुखद घटना 6 सितंबर को नोएडा के सेक्टर-82 स्थित ‘केंद्रीय विहार-2’ सोसाइटी के उनके फ्लैट में घटी। घटना के समय उनकी पत्नी देहरादून में थीं। जब उन्होंने लगातार फोन किया और कोई जवाब नहीं मिला, तो सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड को भिजवाकर चेक कराया गया, जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ।

📝 सुसाइड नोट बरामद: स्वास्थ्य समस्याओं और तनाव को बताया वजह

मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची नोएडा पुलिस को घटनास्थल से अंग्रेजी में लिखा हुआ एक पन्ने का सुसाइड नोट बरामद हुआ है।

  • किसी पर आरोप नहीं: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी भी व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
  • बीमारी का जिक्र: उन्होंने नोट में लिखा कि वे लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अत्यधिक मानसिक तनाव से जूझ रहे थे, जिसके कारण वे यह कदम उठा रहे हैं।

पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया, जिसके बाद सोमवार को दिल्ली के लोधी रोड स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

🏛️ शीला दीक्षित सरकार में निभाई मुख्य भूमिका; दिल्ली के बड़े सुधारों के जनक

राकेश मेहता का तीन दशक से अधिक का प्रशासनिक करियर बेहद शानदार और उपलब्धियों से भरा रहा। तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में उन्होंने वर्ष 2007 से 2010 तक दिल्ली के मुख्य सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं।

उनके कार्यकाल के प्रमुख प्रशासनिक सुधार:

  1. परिवहन क्षेत्र में क्रांति: दिल्ली की सड़कों से अनियंत्रित दौड़ने वाली पुरानी ‘ब्लू लाइन’ बसों को हटाकर आधुनिक ‘लो-फ्लोर’ डीटीसी बसों को लाने का श्रेय उन्हें जाता है।
  2. बिजली निजीकरण व टैक्स सुधार: दिल्ली में बिजली क्षेत्र के निजीकरण (Privatization) और संपत्ति कर (Property Tax) आकलन प्रणाली को सरल बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
  3. राष्ट्रमंडल खेल 2010: दिल्ली में आयोजित 2010 राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) के दौरान बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को समय पर पूरा कराने में उन्होंने अहम योगदान दिया था।

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