स्नातक MLC चुनाव में सियासी घमासान! BJP-SP के बीच निर्दलीय चंद्रजीत सिंह यादव की एंट्री; छात्रों की बेरोजगारी और वित्तविहीन शिक्षकों के मुद्दों पर घेरा’
स्नातक MLC चुनाव में उतरा निर्दलीय दांव! बीजेपी और सपा की किलेबंदी के बीच प्रत्याशी चंद्रजीत सिंह यादव ने छात्रहित, बेरोजगारी और वित्तविहीन शिक्षकों के मुद्दों को लेकर ठोकी ताल। जानिए कैसे त्रिकोणीय और दिलचस्प हो चला है स्नातक एमएलसी का मुकाबला, PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

मुस्कान अंसारी
डेस्क (PNN24 News): आगामी स्नातक विधान परिषद (Graduate MLC) चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शिक्षित युवाओं और स्नातकों के प्रतिनिधित्व वाले इस बेहद महत्वपूर्ण चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशी अपनी-अपनी चुनावी रणनीति के साथ मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) अपने सांगठनिक कैडर के दम पर चुनावी मुकाबले को अपनी ओर खींचने में जुटी हैं, वहीं निर्दलीय प्रत्याशी चंद्रजीत सिंह यादव के पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प हो गया है।
🎓 “स्नातकों की आवाज उच्च सदन तक पहुंचाना मकसद” — चंद्रजीत सिंह यादव
चुनाव प्रचार के दौरान शिक्षित युवाओं और स्नातकों के बीच पहुंचे निर्दलीय उम्मीदवार चंद्रजीत सिंह यादव ने प्रमुख राजनीतिक दलों के वादों पर सवाल उठाते हुए कहा—
“स्नातक MLC चुनाव सिर्फ किसी दल के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का चुनाव नहीं है, बल्कि यह उन लाखों स्नातकों और शिक्षित युवाओं की वास्तविक आवाज को उत्तर प्रदेश विधान परिषद (उच्च सदन) तक पहुंचाने का माध्यम है, जो सालों से रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।”
📋 प्रमुख मुद्दे: बेरोजगारी, वित्तविहीन विद्यालय और छात्र हित
चंद्रजीत सिंह यादव का पूरा फोकस इस समय चुनावी क्षेत्र के उन ज्वलंत मुद्दों पर है, जिन्हें मुख्यधारा की पार्टियां अक्सर दरकिनार कर देती हैं:
- शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी: प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, समयबद्ध पारदर्शी भर्ती कैलेंडर और उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों का सृजन।
- वित्तविहीन विद्यालयों की समस्याएं: निजी व गैर-सहायता प्राप्त (वित्तविहीन) माध्यमिक/उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक मानदेय, सेवा सुरक्षा और मूलभूत सुविधाएं।
- छात्र हित व अकादमिक अव्यवस्थाएं: विश्वविद्यालयों में अटके रिजल्ट्स, फीस वृद्धि और छात्रों से जुड़ी प्रशासनिक अव्यवस्थाओं का स्थायी समाधान।
🗳️ BJP और SP के बीच निर्दलीय प्रत्याशी की चुनौती
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आमतौर पर दलगत राजनीति के साथ-साथ व्यक्तिगत संपर्क और शिक्षित वर्ग का मूड सबसे निर्णायक भूमिका निभाता है। एक तरफ जहां बीजेपी अपने विकास कार्यों और अनुशासन के नाम पर वोट मांग रही है, तो वहीं समाजवादी पार्टी युवाओं और पुरानी पेंशन व्यवस्था जैसे वादों के सहारे स्नातकों को साधने में लगी है।
ऐसे में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतरे चंद्रजीत सिंह यादव जिस प्रमुखता से स्नातकों व शिक्षकों के मुद्दों को उठा रहे हैं, उसने दलीय समीकरणों को उलझा दिया है। अब देखना यह होगा कि मतदान के दिन स्नातक मतदाता राजनीतिक दलों के सिंबल पर भरोसा जताते हैं या फिर निर्दलीय प्रत्याशी के इन मुद्दों पर मुहर लगाते हैं।










