ओवैसी के गठबंधन दांव पर कांग्रेस का तीखा हमला; इमरान मसूद बोले— “MIM जीतती है 4-5 सीटें, पर बनवा देती है BJP की सरकार”‘
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के यूपी में गठबंधन प्रस्ताव पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखा हमला बोला है। इमरान मसूद ने कहा कि ओवैसी 4-5 सीटें जीतकर बीजेपी की सरकार बनवा देते हैं। पढ़िए PNN24 की पूरी रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
लखनऊ/नई दिल्ली (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के भावी राजनीतिक समीकरणों को लेकर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी द्वारा यूपी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हराने के लिए विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने की इच्छा जताने के बाद, कांग्रेस पार्टी ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है।

🗣️ “हैदराबाद और यूपी की सियासत में फर्क”— इमरान मसूद का तीखा प्रहार
ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश और प्रदेश में मुख्य उद्देश्य केवल और केवल बीजेपी को सत्ता से बाहर करना होना चाहिए:
- वोट विभाजन से नुकसान: इमरान मसूद ने कहा कि महज मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के बल पर बीजेपी को नहीं हराया जा सकता। यदि चुनावी विभाजन के कारण बीजेपी सत्ता में लौटती है, तो इसका सबसे ज्यादा खामियाजा मुस्लिम समाज को ही उठाना पड़ता है।
- 4-5 सीटों का खेल: मसूद ने तंज कसते हुए कहा— “हैदराबाद की राजनीति और उत्तर प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य बिल्कुल अलग है। ओवैसी साहब भले ही अपनी पार्टी के लिए चार-पांच सीटें जीत लें, लेकिन इस चक्कर में वह पूरे प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनवा देते हैं। जनता को उन 5 विधायकों का क्या फायदा, जब सरकार विरोधी ताकतों की बन जाए? इसलिए आम जनता को बेहद सोच-समझकर फैसला लेना होगा।”
🤝 ओवैसी की दलील और बिहार चुनाव का हवाला
इससे पूर्व एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में कोई भी क्षेत्रीय या राष्ट्रीय दल अकेले दम पर बीजेपी के विजय रथ को नहीं रोक सकता।
उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने वहां भी गैर-बीजेपी दलों को एकजुट होकर लड़ने का सुझाव दिया था, जिसे ठुकरा दिया गया और नतीजतन एनडीए की सरकार बनी। ओवैसी ने दावा किया था कि उनकी पार्टी यूपी में बीजेपी के खिलाफ मजबूती से लड़ने वाले दलों के साथ हाथ मिलाने को तैयार है।
🚫 समाजवादी पार्टी ने भी बनाई दूरी
यह पहला मौका नहीं है जब विपक्षी खेमे ने एआईएमआईएम के गठबंधन प्रस्ताव से खुद को अलग किया हो। समाजवादी पार्टी (सपा) नेतृत्व भी पहले ही साफ कर चुका है कि वह यूपी में एआईएमआईएम के साथ किसी भी सूरत में गठबंधन नहीं करेगी। विपक्षी दलों का लगातार यह आरोप रहा है कि एआईएमआईएम की मौजूदगी से मुस्लिम वोटों का बिखराव होता है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलता है।











