जापान में ‘दुजुआन’ तूफ़ान का कहर; टोक्यो और आसपास के इलाकों में तबाही, 4 की मौत, 6 लापता व 19 लाख लोगों की निकासी’
जापान की राजधानी टोक्यो और आसपास के इलाकों में 'दुजुआन' तूफान ने तबाही मचाई है। 194 किमी/घंटे की हवाओं और मूसलाधार बारिश से 4 की मौत, 6 लापता और 19 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के आदेश। पढ़िए PNN24 की विशेष अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट।
तारिक खान
PNN24 News: जापान की राजधानी टोक्यो और उसके तटीय प्रेफेक्चर (प्रांतों) में शक्तिशाली चक्रवातीय तूफान ‘दुजुआन’ (Dujuan) ने भीषण तबाही मचाई है। मूसलाधार बारिश और करीब 194 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से चली हवाओं ने पूरे क्षेत्र में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

🚨 19 लाख लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने का अल्टीमेटम
सोमवार को जब तूफान अपने चरम पर था, तब जापानी मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) और आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने आपातकालीन चेतावनी जारी करते हुए नागरिकों के लिए “जीवन को तत्काल खतरा” घोषित किया था:
- बड़े पैमाने पर निकासी: प्रशासन ने कानागावा, चिबा और आसपास के इलाकों से करीब 19 लाख लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों (Evacuation Centers) में चले जाने की सलाह दी थी।
- लैंडस्लाइड से तबाही: कानागावा और चिबा प्रांतों में मूसलाधार बारिश के बाद कई जगहों पर हुए भूस्खलन (Landslides) में आवासीय संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा और मौतें दर्ज की गईं।
⚡ बिजली गुल, सैकड़ों उड़ानें रद्द और थमा परिवहन
तूफान के टकराने के बाद जापान के बुनियादी ढांचे को गहरा झटका लगा है:
- 50,000 घरों में ब्लैकआउट: तेज हवाओं और बिजली के पोल उखड़ने से लगभग 50,000 घरों की बिजली सप्लाई ठप हो गई।
- हवाई व रेल यातायात प्रभावित: टोक्यो के हनेडा और नरीता हवाई अड्डों से सैकड़ों घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि कई बुलेट ट्रेन (Shinkansen) रूटों को एहतियातन रोकना पड़ा।
🌊 क्यों लगातार विनाशकारी हो रहे हैं प्रशांत महासागरीय तूफान?
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में जलस्तर के बढ़ते तापमान और “सुपर अल नीनो” (Super El Niño) जैसी घटनाओं के कारण तूफानों की तीव्रता में लगातार वृद्धि हो रही है। समुद्र के गर्म होने से तूफानों को अधिक नमी और ऊर्जा मिलती है, जिससे वे पहले से कहीं अधिक तीव्र और विनाशकारी रूप ले रहे हैं।
मंगलवार को तूफान के उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने के बाद निकासी आदेशों में ढील दी गई है, लेकिन प्रशासन ने भूस्खलन और नदियों के जलस्तर को लेकर अलर्ट जारी रखा है।











