काशी में बारिश बनी आफत! डेंगू के 47 केस मिलने से हड़कंप; स्वास्थ्य विभाग ने नगर निगम को लिखा पत्र, डीडीयू अस्पताल कॉलोनी खुद जलमग्न’
वाराणसी में बारिश के बाद जलजमाव बना आफत! जिले में डेंगू के 47, मलेरिया के 7 और चिकनगुनिया के 4 मरीजों की पुष्टि। स्वास्थ्य विभाग ने नगर निगम को लिखा पत्र, एंटी-लार्वा छिड़काव और फॉगिंग तेज करने के निर्देश। डॉक्टरों की कॉलोनी में ही भरा पानी। पढ़िए PNN24 की ग्राउंड रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): मानसून की लगातार बारिश के बाद वाराणसी में जलजमाव ने गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। शहर के तमाम वार्डों, कॉलोनियों और तंग गलियों में जमा पानी के कारण मच्छर जनित बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। जिले में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों में अचानक आई तेजी ने स्वास्थ्य महकमे और नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है।
🦟 डेंगू के 47 केस दर्ज, मलेरिया और चिकनगुनिया का भी प्रकोप
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार:
- डेंगू (Dengue): जिले में अब तक 47 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है।
- मलेरिया (Malaria): 7 मामले सामने आए हैं।
- चिकनगुनिया (Chikungunya): 4 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जिला मलेरिया विभाग ने नगर निगम प्रशासन को कड़ा पत्र जारी किया है। पत्र में शहर भर में तत्काल एंटी-लार्वा छिड़काव, फॉगिंग (Fogging) और सफाई अभियान को युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
⚠️ “घर के आसपास न जमने दें पानी”: जिला मलेरिया अधिकारी की अपील
जिला मलेरिया अधिकारी शरत चंद्र पांडे ने आम जनता से सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने बताया कि एडीज और एनोफिलीज मच्छर मुख्य रूप से कूलर, गमलों, पुराने टायरों, बाल्टियों और खुले बर्तनों में जमा साफ पानी में तेजी से पनपते हैं।
“लोग अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले और बाल्टी का पानी सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर बदलें और पूरी बांह के कपड़े पहनें।”
— शरत चंद्र पांडे, जिला मलेरिया अधिकारी, वाराणसी
🏥 पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल की डॉक्टर्स कॉलोनी खुद जलमग्न
स्वास्थ्य व्यवस्था की लाचारी का सबसे बड़ा नमूना पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल (DDU Hospital) की डॉक्टर्स कॉलोनी में देखने को मिल रहा है।
- आवासीय परिसर में जलभराव: सड़क से लेकर आवासीय परिसर तक कई दिनों से गंदा पानी जमा है।
- स्वास्थ्य कर्मी परेशान: दुर्गंध और मच्छरों के भारी प्रकोप के कारण अस्पतालों में सेवाएं देने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी खुद बीमारियों के साये में जीने को मजबूर हैं।











