भदोही में जातिगत भेदभाव के चलते प्रसूता को लौटाया, सड़क पर हुई डिलीवरी; संविदा डॉक्टर बर्खास्त, नर्स का तबादला, CMS पर गिरेगी गाज’
भदोही के महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में जातिगत भेदभाव के चलते दलित/वनवासी प्रसूता को भर्ती न करने पर बड़ा एक्शन! सड़क पर हुआ प्रसव। जांच रिपोर्ट के बाद संविदा डॉक्टर बर्खास्त, स्टाफ नर्स का तबादला और सीएमओ द्वारा शासन को कड़ी कार्रवाई की सिफारिश। पढ़िए PNN24 पर पूरी रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
भदोही/वाराणसी (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के भदोही स्थित महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को शर्मसार करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। अस्पताल में प्रसव कराने आई 20 वर्षीय दलित/वनवासी महिला को कथित तौर पर जातिगत भेदभाव के कारण भर्ती करने से इनकार कर दिया गया, जिसके बाद महिला को सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।

💔 “हम वनवासी लोगों को हाथ नहीं लगाते” — पीड़ित परिवार का आरोप
पीड़ित महिला की मां के अनुसार, वे अपनी 20 वर्षीय गर्भवती बेटी को मंगलवार रात करीब 10 बजे डिलीवरी के लिए अस्पताल लेकर आई थीं।
पीड़िता की मां ने आरोप लगाते हुए बताया—
“मैंने ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों से गुहार लगाई कि बेटी को बच्चा होने वाला है, इसे चेक कर लीजिए। इस पर वहां मौजूद महिला कर्मचारी/मैडम ने कहा कि ‘हम वनवासी लोगों की डिलीवरी नहीं कराते हैं और न ही उन्हें हाथ लगाते हैं।’ इसके बाद हमें अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया।”
अस्पताल से भगाए जाने के बाद महिला अपनी बेटी को लेकर बाजार के रास्ते पैदल जा रही थी कि ज्ञानपुर में सड़क किनारे ही प्रसूता ने बच्चे को जन्म दे दिया। सड़क पर प्रसव होने की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश पनप गया और जमकर हंगामा हुआ, जिसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने आनन-फानन में जच्चा-बच्चा को अस्पताल में भर्ती कराया।
पीड़ित प्रसूता ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने साफ कह दिया था— “हम तुम्हारी डिलीवरी नहीं कराएंगे, बीएचयू (BHU) वाराणसी जाकर कराओ।”
⚖️ जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन का कड़ा एक्शन
घटना की गंभीरता को देखते हुए भदोही के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) संतोष चक ने जांच समिति का गठन किया था। जांच रिपोर्ट में लापरवाही और दुर्व्यवहार की पुष्टि होने के बाद निम्नलिखित कठोर कदम उठाए गए हैं:
- डॉक्टर की बर्खास्तगी: इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात संविदा चिकित्सक डॉ. पंकज कुमार की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।
- स्टाफ नर्स पर गाज: ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स नीलम मौर्या का स्थानांतरण (Transfer) कर दिया गया है।
- वेतन रोक व शासन को पत्र: संबंधित स्त्री रोग विशेषज्ञ का वेतन रोक दिया गया है। इसके अलावा गंभीर लापरवाही के लिए जिला अस्पताल के सीएमएस (CMS) और संबंधित महिला चिकित्सक के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई के लिए शासन (लखनऊ) को पत्र भेजा गया है।











