BHU के 1997 छात्र आंदोलन प्रकरण में बड़ी राहत; मनोज सिंह ‘काका’ और ‘डल्लू’ की अग्रिम जमानत याचिका वाराणसी कोर्ट से मंजूर’

BHU के 1997 के चर्चित छात्र आंदोलन केस में 'काका' और 'डल्लू' को मिली बड़ी कानूनी राहत! वाराणसी अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-1 ने मनोज सिंह 'काका' व राजेश राय 'डल्लू' की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर की। वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी की टीम ने की प्रभावी पैरवी। पढ़िए PNN24 की लीगल रिपोर्ट।

महविश कुरैशी 

वाराणसी (PNN24 News): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से जुड़े करीब तीन दशक पुराने चर्चित छात्र आंदोलन प्रकरण में अभियुक्त मनोज कुमार सिंह उर्फ मनोज सिंह ‘काका’ एवं राजेश कुमार राय ‘डल्लू’ को अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अपर सत्र न्यायाधीश (न्यायालय संख्या-01), वाराणसी द्वारा दोनों अभियुक्तों की अग्रिम जमानत अर्जी स्वीकृत कर ली गई है। न्यायालय ने यह अहम आदेश 30 सितंबर 2026 को पारित किया।

यह मामला थाना लंका, जनपद वाराणसी में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 22/1997 से संबंधित है, जो लगभग 29 वर्ष पूर्व हुए छात्र आंदोलन और उससे जुड़ी घटनाओं के संबंध में पंजीकृत किया गया था।

⚖️ वरिष्ठ वकीलों की टीम ने कोर्ट में रखी मजबूत विधिक दलीलें

मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष शुक्ला ने प्रभावी पैरवी की। वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम ने न्यायालय के समक्ष प्रकरण के विधिक, तथ्यात्मक एवं ऐतिहासिक पहलुओं को मजबूती से प्रस्तुत किया।

अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों, केस डायरी/अभिलेखों तथा बचाव पक्ष की ओर से दी गई दलीलों का गहन परीक्षण करने के पश्चात दोनों अभियुक्तों को अग्रिम जमानत प्रदान करने का आदेश जारी किया।

इस सफलता पर अधिवक्ता दीपक वर्मा, मोनी श्रीवास्तव, गुलशन मिश्रा एवं श्वेता अग्रहरि ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे प्रभावी विधिक पैरवी की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

💬 “कानून के शासन में अधिकारों की रक्षा प्राथमिकता” — वरिष्ठ अधिवक्ता

मामले में मिली सफलता पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा:

“यह प्रकरण लगभग तीन दशक पुराना है। ऐसे मामलों में न्यायालय द्वारा उपलब्ध अभिलेखों, परिस्थितियों तथा अभियुक्तों के विधिक अधिकारों का स्वतंत्र परीक्षण अत्यंत आवश्यक होता है। अधिवक्ता का मूल दायित्व अपने मुवक्किल के संवैधानिक व विधिक अधिकारों की रक्षा करना तथा न्यायालय के समक्ष सही तथ्य प्रस्तुत करना है।”

📋 ₹1 लाख के मुचलके पर सशर्त जमानत

न्यायालय के आदेशानुसार मनोज सिंह ‘काका’ और राजेश कुमार राय ‘डल्लू’ को ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान धनराशि के दो-दो प्रतिभूति बंधपत्र जमा करने की शर्त पर अग्रिम जमानत दी गई है। इसके साथ ही न्यायालय द्वारा निर्धारित अन्य सभी कानूनी शर्तों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *