डीएम के आदेश का खुलेआम खनन माफिया उड़ा रहे हैं धज्जियाँ

इमरान सागर/शाहजहाँपुर/पुवायाँ खुटार बंडा

प्रशासन और श्रम विभाग को भट्टों पर बच्चों द्वारा कराई जा रही बाल मजदूरी नहीं दे रही है दिखाई।

शासन प्रशासन और कोर्ट के तमाम आदेश और सख्तियों के बाद भी पुवायाँ तहसील क्षेत्र में खनन रूकने का नाम नही ले रहा है।  

जिलाधिकारी के आदेश को धत्ता बताकर एसडीएम पुवायाँ खनन रोकने में बेअसर नजर आ रहे हैं।प्रशासन और कोर्ट के द्वारा खनन की चल रही जाँच सीबीआई के द्वारा फिर से कराई जा रही है। खनन रोकने के लिये माननीय न्यायालय के संज्ञान लेने तथा प्रदेश सरकार को इसे रोकने के लिये सख्त से सख्त कदम उठाने का आदेश देने  के बाद भी पुवायाँ तहसील क्षेत्र में बालू और मिट्टी का खनन चालू है। बीते दिनों एसडीएम पुवायाँ ने बंडा और खुटार के एक मिलों में खनन कर इक्टठा की जा रही मिट्टी को पत्रकारों ने मौका मुयाना भी कराया था लेकिन उसके बावजूद भी एसडीएम पुवायाँ ने कोई कार्रवाई नहीं की और आज भी बन रहे मिलों में खनन बदस्तूर जारी है।
इस विषय पर जब जिलाधिकारी रामगणेश जी से वार्ता की गई तो डीएम ने भी अधीनस्थ अधिकारियों को कड़े शब्दों में खनन पर रोक लगाने का फरमान सुनाया था लेकिन उसके बावजूद भी अभी तक खनन माफियों पर कोई रोंक नहीं लग पा रही है। क्षेत्र में ऐसा कहीं से भी नही लग रहा है। कि प्रशासन बालू अथवा मिट्टी खनन  रोकने के लिये कोई प्रभावी कदम उठा रहा हो क्षेत्र में स्थित यह है।कि सभी भट्टों के द्वारा कुछ ट्रालियों की परमीशन एसडीएम के द्वारा ली जाती है।लेकिन परमीशन मिलने के बाद खनन माफिया अपने स्तर से दो दो हजार ट्राली मिट्टी खनन कराकर भट्टों पर जमा करा लेते हैं।

खुटार ब्लाॅक में कुछ भट्टे ऐसे हैं।

जो जंगल के किनारे होने से खनन माफिया जंगल के अंदर भी खनन करनें में विल्कुल नहीं घबराते हैं।
इसी कारण खनन माफियों के हौंसले बुलंद हैं।इस समय सर्दी और कोहरे का लाभ उठाकर जंगल क्षेत्र में लगे भट्टे जैसे ग्राम हीरपुर लौंगापुर धनसिंहपुर जैसे क्षेत्रों में खुलेआम खनन माफिया खनन करा रहे हैं।पुवायाँ बंडा रोड पर पड़ रहीं नदियाँ जैसे गोमती नदी झुकना नदी को खनन माफियों ने विल्कुल बर्बाद करके रख दिया है। खनन माफियों की क्षेत्र में पुलिस प्रशासन से ऐसी दोस्ती है।कि खनन माफियों को हर तरह से पुलिस प्रशासन बचाव करनें में पीछे नहीं हट रहा है। सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में पड़ने वाली नहरों व किसानों से ओनें पौनें दामों में सौदा करके रातों रात मिट्टी का खनन जेसीबी द्वारा रात भर कराया जाता हैं।

अब आपको यह भी बताते चलें की इन खनन करनें वालों पर क्या कहता है कानून 

ऐसा ही एक मामला कानपुर का है। जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अमेठी के मोचवा गांव से 200 मीटर दूर स्थित ईट भट्टे को तत्काल बंद किये जाने का आदेश दिया है। साथ ही भट्ठा मालिक व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर पांच लाख रूपये का हर्जाना ठोंका है। परंपरागत ईट भट्टों से उत्सर्जित होने वाली हानिकारक गैस और धुआं पर्यावरण को बड़े पैमाने पर प्रदूषित कर रहे हैं। ईट भट्टों के आसपास रहने वाले लोगों में सांस से जुड़ी बीमारियों में इजाफा होने से जब टीबी और अस्थमा के मरीजों की तादाद बढ़ी तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इस पर खासी आपत्ति जताई। साथ ही राज्य सरकार को प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए ईट भट्टों के बाबत नीति निर्धारित करने के आदेश जारी कर डाले। इन आदेशों की पालना करते हुए राजस्थान सरकार की तरह उ. प्र  राज्य में ईको फ्रेंडली ईट भट्टे लगाने का फैसला किया है। बनारस के ईट भट्टा क्लस्टर को रोल मॉडल मानकर सरकार नई नीति तय करने में जुटी है।
मिट्टी खनन के नियम 
शासन ने जेसीबी से खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ईट-भट्टा व्यवसाई अब दो मीटर से ज्यादा खनन नहीं करा सकेंगे। यदि वे ऐसा करते हैं तो खनन अधिनियम में फंस जाएंगे। वहीं दो मीटर का खनन भी मजदूरों के द्वारा कराया जाएगा। लेकिन यहां तो कहानी ही दूसरी है भट्टा मलिक. दो मीटर के बजाये पचासों मीटर तक गहरी खुदाई जेसीबी मशीन से कराते है जिससे कानून का पालन भी नहीं. हो रहा है। और मजदूरों का भी लाखों में  घाटा हो रहा है।
अब देखने वाली बात यह है। कि अब कोर्ट के आदेश और सीबीआई जाँच व जिला प्रशासन क्या करता है।

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