तिलहर रेलवे स्टेशन पर मेल और फास्ट ट्रेनो का स्टाप कब और कौन कराएगा

इमरान सागर/तिलहर,शाहजहाँपुर
तिलहर बिधान सभा का एक मात्र लेकिन प्रतिदिन टिकटो की बड़ी बिक्री करने वाले रेलवे स्टेशन पर मेल और फास्ट ट्रेनो का स्टाप आखिर कब और कौन कराएगा, यह एक बड़ा सबाल है।

क्षेत्र की जनता को विभिन्न मूलभूत सुविधाओं से अब तक दूर रखने वाले जन प्रतिनिधि बिधान सभा चुनाव 2017 में एक बार फिर क्षेत्र के मैदान में खड़े है बादशाहत पाने के लिए, एैसे मे सबाल उठता है कि क्षेत्र दो सबसे बड़ी समस्याओं को आखिर अब कौन दूर करने का आश्वासन देगा! देश में अच्छे दिन देखने के साथ ही क्षेत्रवासी अपने क्षेत्र को भी अच्छा देखना चाहते थे और चाहते हैं लेकिन विगत आठ वर्षों से टूटते टूटते एक गहरी खाईं बनी निगोही रोड पर ग्राम रटा के पास की सड़क और रेलवे स्टेशन पर मेल और फास्ट ट्रेनो के लिए तमाम धरना प्रदर्शन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का रत्ती भर योगदान नही रहा तो एैसे में अब किससे उम्मीद नज़र आएे यह एक बड़ा सबाल है।
सबाल जहाँ तक क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं का है तो एक बहुत बड़ी सूचि बनाई जा सकती है और वह भी एैसे ही नही बल्कि क्षेत्रवासियों के सामने एक बड़ी हकीकत है लेकिन सारी समस्याओं को एक ओर कर बात तिलहर स्टेशन से गुजरने वाली उन ट्रेनो की है जो शाहजहाँपुर और फरीदपुर तो अपना स्टाप लेती हैं लेकिन यहाँ नही। वर्ष 2015- 2016 में ही नही बल्कि 2012 के लोक सभा चुनाव में भी यह मुद्दा कई वार उठाया गया परन्तु किसी भी जनप्रतिनिधि की ओर क्षेत्रवासियों के आन्दोलन को सहयोग नही मिला! इससे पहले भी कई वार आबाजं उठाई गई लेकिन नतीजा आज तक सिफर ही रहा जबकि रेल किराया बढ़ते बढ़ते कई गुना पार गया और प्रतिदिन यात्रियों की यात्रा से तिलहर रेलवे स्टेशन नब्बे हजार से सवा लाख रुपये तक की इन्कम कर रहा है बाबजूद इसके स्टेशन परिसर में यात्रियों को सुविधा देने के नाम पर न तो जरूरत के हिसाब लम्बे रूट की मेल, या फास्ट ट्रेनो का स्टाप है और नही लैट्रिन, सीटे, छायादार टिन शेड बल्कि टिकिट बितरण के नाम पर एक बी बिन्डो से अनारक्षित टिकिट एंव पूंछ ताछ! वहीं उसी एक मात्र टिकिट बिंडो पर रविवार छोड़ कर आरंक्षित टिकटो की बिक्री पर ब्लैकमेलिंग का कारोबार।
जनप्रतिनियों का अब सौतेला व्यवहार रहा तिलहरवासियों से वे चाहे सासंद रहे हो या क्षेत्र के बिधायक सभी ने अब तक सौतेला व्यवहार ही किया क्षेत्रवासियों से जिसके चलते रेल प्रबंधन की हठधर्मिता ने रेलवे स्टेशन ने क्षेत्रवासियों से प्रतिदिन कारोबार तो बड़ा करता है लेकिन सुविधा देने के नाम पर कुछ नही।
आए दिन दुर्घटनाओं की गवाही देता रेलवे फाटक पूरी तरह असुरक्षित होता गया लेकिन तमाम शिकायते एंव समाचार प्रकाशित होने के बाद भी जनप्रतिनिधियों ने देखने तक की कोशिश नही की! लगातार पैदा होते एैसे हालातो में किस पर विश्वास किया जाए यह एक बड़ा सबाल है परन्तु समझा जाता है कि इस सबाल का आज भी शायद ही किसी के पास जबाब हो सिबाय आश्वासन के! लेकिन क्या आश्वासन तक ही आखिर सीमित रखा जाएगा तिलहरवासियों को यह कभी उनकी गंभीर समस्या का किसी जनप्रतिनिधि के पाल भी निकलेगा।
दो वर्ष लगभग बसपा की सरकार एंव आठ वर्ष लगभग(परिसिमन बदलाव पर) समाजवादी पार्टी की प्रदेश में सरकार के बिपक्षी रहे बिधायक रोशन लाल वर्मा क्षेत्र के प्रतिनिधि होने के बाद भी एंव प्रदेश सरकार के सत्ता पक्ष के सासंद मिथलेश कुमार ने भी क्षेत्र की समस्याओं से रुबरू होना जरूरी नही समझा जबकि दोनो ही माननीयो की एक छोटी सी कोशिश तिलहर वासीयों को कमसे कम रेलवे स्टेशन पर मेल और फास्ट ट्रेनो के स्टाप करा सकती थी लेकिन शायद तिलहर को सौतेला जान एैसा नही किया गया! फिलहाल तो समस्या का समाधान अभी भी समय के गर्भ में है और एक बड़ा सबाल खड़ा करता है कि उक्त समस्या के समाधान के लिए आखिर किसका चयन किया जाए।

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