30 जून को बनारस बंद करने का समर्थन करते हैं, पुर्व विधायक अजय राय

(जावेद
अंसारी)
वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी
में पिछले तीन दिनों से जीएसटी को लेकर व्यापारीयें एवं बुनकरों में आक्रोश
है। वही दुसरी ओर कांग्रेसजनों ने जीएसटी के स्वरूप के खिलाफ व्यापारिक
संगठनों के विरोध और बनारस-बंद के आह्वान के प्रति पार्टी का समर्थन व्यक्त
किया है। आज इंगलिशिया लाइन में पार्टीजनों की एक बैठक में पूर्व विधायक
अजय राय ने कहा कि जीएसटी  दरें और प्रक्रियायें आम लोगों, आम व्यापारियों
और किसानों के खिलाफ हैं। बैठक में तय किया गया कि यद्यपि घोषित आंदोलन
उद्योग-व्यापार संघों द्वारा आयोजित है,लेकिन उनकी मांगें उचित हैं। इसलिए
हम बनारस-बंद का समर्थन करते हैं।
पूर्व
विधायक अजय ने वस्त्र और यहां तक कि बनारसी साड़ी एवं अन्य बनारसी वस्त्र
उत्पादों पर जीएसटी द्वारा कर थोपने की आलोचना करते हुए उसके विरुद्ध
वस्त्र व्यापार जगत के आंदोलन के साथ उद्योग व्यापार संगठनों द्वारा 30 जून
को बनारस बंद के फैसले के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। वक्तव्य
उन्होंने कहा है कि कांग्रेस सरकारों ने बिना सिले कपड़ों और विशेष रूप से
हर भारतीय परिवार की जरूरत वाली बनारसी साड़ी व अन्य बनारसी वस्त्रों को
हमेशा कर से मुक्त रखा, क्योंकि इसका जहां तमाम बुनकरों के घरों के चूल्हों
से सीधा ताल्लुक था,वही गरीब की बैटी की शादी में भी एक बनारसी साड़ी की
हसरत पूरी होने की परंपरा कायम थी। वर्तमान सरकार ने इनपर भी टैक्स थोपकर
गरीब की रोटी एवं कपड़े के साथ साथ उसकी मांगलिक परंपरायें निभाने की हसरतों
पर चोट की है।
आगे
अजय राय ने कहा कि हम लोग सरकार से मांग करेंगे कि बुनकर द्वारा बीने हुए
कपड़े पर आज तक कोई टैक्स नहीं लगा। जीएसटी टैक्स क्यों लगाया जा रहा है।
बुनकर के लोग कपड़े ताने-बाने का काम करते हैं, और जब कि बुनकर समाज गरीब
कम पढ़ा लिखा है।और किसी तरह अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करता है, और
जब से भारत सरकार ने देश में जीएसटी टैक्स लागू करने का फैसला लिया है
पूरे देश में हाहाकार मच गया है।और पूरे देश के लोग जीएसटी का विरोध कर रहे
हैं। बुनकर अपने पावर लुम हैंड लुम से कपड़ा तैयार करते हैं 1 मीटर पे 50
पैसे की मार्जिन रखकर बेचते हैं और भारत सरकार ने 5% से 12 परसेंट तक
जीएसटी लागू कर दिया है। हम सब मिलकर मोदी जी से मांग करते हैं कि बनारस
आपका सांसदिय क्षेत्र हैं। मोदी जी अपना संसदीय क्षेत्र बर्बाद होने से बचा
लीजिए।
आक्रोश 
  • रेशम, जरी, कलाबत्तू, कपड़ा के थोक व्यवसायियों ने भी दिया खुलकर समर्थन
  • 05 हजार करोड़ रुपये लगभग सालाना है बनारस में साड़ी का कारोबार
  • 05 हजार छोटी-बड़ी दुकानें हैं साड़ी की वाराणसी जनपद में
  • 25 लाख लोग पूरे पूर्वाचल के जुड़े हैं इस व्यवसाय से, बनारस है केंद्र
कपड़े
पर कभी कोई कर नहीं लगाया गया। साड़ी उद्योग से काफी संख्या में लोगों को
रोजगार मिला है। सभी जीएसटी के विरोध में हैं और बंद को सफल बनाएंगे। कपड़ा उद्योग को सरकार के प्रोत्साहन की जरूरत है और इस पर करों का बोझ डाला जा रहा है। सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिये। कपड़ा उद्योग से जुड़े ज्यादातर बुनकर और छोटे व्यापारी पढ़े-लिखे नहीं है और वे जीएसटी की जटिल प्रक्रिया में उलझ कर रह जायेंगे।
कपड़े
पर जीएसटी का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। मोदी सरकार को इस निर्णय को वापस
लेना चाहिये। जीएसटी से छोटे व्यापारियों और बुनकरों को नुकसान होगा। जीएसटी
में रिटर्न भरने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। साड़ी उद्योग से जुड़े 85
फीसदी लोग पढ़े-लिखे नहीं है। ऐसे में जीएसटी किसी बोझ से कम नहीं है।
बैठक में ये थे शामिल
प्रजानाथ
शर्मा,बैजनाथ सिंह,शैलेन्द्र सिंह,ब्रह्मदेव मिश्रा,अशोक पाण्डेय,रामसुधार
मिश्रा,ड०जितेन्द्र सेठ,प्रमोद श्रीवास्तव,भुपेन्द्र प्रताप
सिंह,राकेशचन्द,देवेन्द्र सिंह,मनोज वर्मा मनु,इन्द्रजित सिंह,हरीश
मिश्रा,वसूल अहमद,राजेन्द्र प्रसाद शर्मा,अजय सिंह गुड्डी,शशीकान्त तिवारी
आदि शामिल थे।

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