बिहार की बेटी मीरा कुमार विपक्ष की राष्ट्रपति उम्मेदवार. लड़ाई तो भाजपा बनाम विपक्ष है.

नितीश का समर्थन अगर विपक्ष को मिला तो बदल सकता है समीकरण 
लालू ने कहा –  हम आइडियोलाजी की लड़ाई लड़ते हैं

(जावेद अंसारी)

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अपना साझा उम्मीदवार बनाया है। मीरा कुमार बड़े दलित नेता और भुतपूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम की बेटी है। वो विदेश सेवा की अधिकारी भी रह चुकी है। बिहार के सासाराम से जीतने वाली मीरा कुमार 15 वीं लोकसभा की अध्यक्ष रह चुकी है। उन्हे देश की पहली महिला स्पीकर होने का गौरव हासिल है, उनका जन्म बिहार के भोजपुर जिले में हुआ है।

विपक्षी दलों की ओर से मीरा कुमार को राष्‍ट्रपति पद का उम्‍मीदवार बनाए जाने के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा कि यह कदम फासिस्‍ट ताकतों को दूर रखने के लिए उठाया गया है। राजद सुप्रीमो ने नई दिल्‍ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सभी विपक्षी दल फासिस्ट ताकतों को दूर करने के लिए इकट्ठा हुए थे। सबने मिलकर यह फैसला लिया है, लालू ने कहा, हम लोगों ने तय किया है बिहार की बेटी विदेश से लेकर सब जगह काम की है। हम आइडियोलाजी की लड़ाई लड़ते हैं।
जदयू के एनडीए उम्‍मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन पर लालू ने कहा कि वे नीतीश कुमार से इस फैसले पर फिर से विचार करने की अपील करेंगे। उन्‍होंने कहा, हमारी सरकार चलती रहेगी। मैं कल पटना जाकर उनसे मिलूंगा। कहूंगा कि उस निर्णय पर विचार कीजिए। ऐसी ऐतिहासिक गलती मत कीजिए, आपका फैसला गलत है। उन्‍होंने आगे कहा, नीतीश ने मुझे फोन कर बताया था कि यह उनका निजी फैसला है। नीतीश ने कहा बहुत सज्जन गवर्नर (रामनाथ कोविंद) रहे हैं। व्यक्ति की सुंदरता और सज्जनता-दुर्जनता पर फैसला नही होता। हम आइडियोलाजी से समझौता नहीं करने वाले, कांग्रेस भी बोलती तो भी हम समर्थन नहीं करते। उन्‍होंने कहाकि उनकी पार्टी के ज्‍यादा विधायक होने के बाद भी उन्‍होंने नीतीश कुमार को सीएम बनाया। उन्‍हें कभी परेशान नहीं किया, सरकार पर खतरा पैदा नहीं करेंगे। लालू यादव ने आरोप लगाया कि उन्‍हें झुकाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उनका इशारा आयकर और सीबीआई की कार्रवाई की ओर था।
मालूम हो कि यूपी में राजनीतिक करियर की शुरूआत करने वाली मीरा कुमार ने 1985 में बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में मायावती और रामविलास पासवान को पराजित कर कालिदास संस्कृत में कदम रखा।वह कांग्रेस महासचिव और कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य भी रह चुकी है, उनके पति मंजुल कुमार सर्वोच्च न्यायालय में वकील हैं।
आपको बता दे कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कह चुके हैं कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनका समर्थन भाजपा की ओर से प्रस्तावित रामनाथ कोविंद को है। वजह यह है कि वो बिहार के राज्यपाल हैं और दलित हैं। अगर कोविंद जीतते हैं तो उत्तर भारत से पहली बार एक दलित राष्ट्रपति बनेगा। नीतीश इसी तर्क के आधार पर गुरुवार को विपक्षी दलों की बैठक में भी शामिल नहीं हुए।
लेकिन संख्या में कमज़ोर विपक्ष एक मज़बूत दांव खेल चुका है। कांग्रेस की नेता और लोकसभा की अध्यक्ष रहीं मीरा कुमार को विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इसके साथ ही अब राष्ट्रपति पद के चुनाव में दोनों नाम दलितों के हो गए हैं। इसीलिए दलित को समर्थन का तर्क अब किसी एक के पाले का तुरुप नहीं रह गया है।
कांग्रेस ने दरअसल भाजपा के तुरुप को उसी टक्कर के तुरुप से काट दिया है। इसलिए इस चुनाव में अब दलित से ज़्यादा अहम फैक्टर भाजपा बनाम विपक्ष हो गया है और यहीं पर हार के बाद भी विपक्षी एकजुटता की लड़ाई में कांग्रेस जीतती नज़र आ रही है। आंकड़े कहते हैं कि भाजपा के प्रत्याशी यानी कोविंद जी को जीतने से रोका नहीं जा सकता है। इसीलिए शुक्रवार को भाजपा के शीर्ष नेताओं और मुख्यमंत्रियों का जंबो समूह रामनाथ कोविंद का नामांकन कराने दिल्ली पहुंच रहा है। लेकिन टूटते और डूबते विपक्ष ने इसे भाजपा बनाम विपक्ष की लड़ाई बनाने में सफलता पा ली है।

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