जिलाधिकारी ने किया खंड विकास कार्यालय का निरीक्षण, खंड विकास अधिकारी की जमकर लगाई क्लास

अंजनी राय 

बलिया । जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने मंगलवार की देर शाम विकासखंड बैरिया का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वहां मिली दुर्व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए खंड विकास अधिकारी अवधेश सिंह को जमकर लताड़ा। साथ ही सुधार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया।

पूर्व में रहे लेखाकार द्वारा चार्ज देने में अनावश्यक देर करने की शिकायत मिलने पर निर्देश दिया कि बुधवार की शाम तक अगर चार्ज का हस्तानांतरण नहीं किया गया तो संबंधित लेखाकार को निलंबित कर अवगत कराया जाए। जिलाधिकारी द्वारा मांगी गई जानकारी को भी बीडीओ व एडीओ पंचायत सही सटीक नहीं बता पाए। इस पर डीएम ने तत्काल सभी ब्लॉक कर्मियों के साथ बैठक की और ग्रामवार विकास कार्यों के बारे में पूछताछ करने लगे। पूछताछ के दौरान पता चला कि किसी किसी गांव में अप्रैल से अब तक एक भी काम नहीं कराया गया, जबकि हर ग्राम पंचायत में धनराशि उपलब्ध है। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन सचिव पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया जिनके गांव में अप्रैल से अब तक कोई काम नहीं हुआ। कहा कि सफाईकर्मियों को किट वितरित किया जाए और साफ सफाई सुदृढ़ किया जाए। मनरेगा पेमेंट, कैशबुक आदि सम्बन्धी पूछताछ की। इंटरनेट के अभाव में मनरेगा एमआईएस सम्बधी जानकारी नही दे पाने पर इंटरनेट व्यवस्था सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान एडीओ पंचायत कक्ष में कबाड़ मिलने पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने एडीओ पंचायत अरविंद कुमार की  कड़ी क्लास लगाई। कहा कि दो दिन के अंदर पूरा साफ सफाई कराएं। प्रिया शॉफ्ट की फीडिंग सम्बन्धी जानकारी मांगी तो कम्प्यूटर ऑपरेटर का बहाना कर टाल दिया गया। बताया गया कि कम्प्यूटर आपरेटर गंगा किनारे ड्यूटी में गया है। मनरेगा कक्ष में रखे कम्प्यूटर चालू करके रिपोर्ट दिखाने के लिए कहा तो कम्प्यूटर आपरेटर ने सर्वर डाउन होने की बात कह हाथ खड़ा कर दिया। डीएम ने निरीक्षण के दौरान कई खामियों को देखा। इसके लिए वीडियो व एडीओ पंचायत को कड़े शब्दों में चेतावनी दिया। सभा कक्ष में बीडीओ, एडीओ व ग्राम पंचायत सचिवों के साथ बैठक में भी जम कर क्लास लिया। सचिवो से पूछा मार्च 2017 से अब तक आपलोग अपने गांव में कौन कौन सा कार्य किये हो इस पर कई सचिवों के पास जबाब नही था। डीएम ने कहा कि मार्च से अब तक ढाई करोड़ रुपया पड़ा है। सबसे छोटे गांव में भी कमसे कम 15 लाख रुपया खाते में है, लेकिन विकास के नाम पर एक रुपया खर्च नही किया जा रहा है, क्यों?

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